रोहित शर्मा को टेस्ट ओपनर बनाने में किसका हाथ? पूर्व सेलेक्टर प्रसाद ने लिए दो नाम

रोहित शर्मा ने अपने टेस्ट करियर में अभी तक 38 मैच खेले हैं जिसमें 7 शतकों की मदद से कुल 2615 रन बनाए हैं. (Instagram)

पूर्व चीफ सेलेक्टर एमएसके प्रसाद (MSK Prasad) ने बताया है कि कैसे टीम प्रबंधन ने टेस्ट में ओपनर के तौर पर रोहित शर्मा (Rohit Sharma) को मौका दिया. उन्होंने कहा कि टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली से भी इस बारे में काफी चर्चा हुई थी.

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    नई दिल्ली. स्टार ओपनर रोहित शर्मा (Rohit Sharma) की गिनती सीमित ओवरों के दिग्गज क्रिकेटरों में होती है, अब उन्होंने टेस्ट फॉर्मेट में भी खुद को साबित किया है. कुछ समय पहले रोहित का टेस्ट करियर नहीं चल पा रहा था. 2019 विश्व कप के बाद, उन्हें वेस्टइंडीज टेस्ट के लिए प्लेइंग-XI में नहीं चुना गया था लेकिन केएल राहुल के नई गेंद का लगातार सामना करने को देखते हुए भारतीय टीम प्रबंधन को रोहित के बारे में सोचना पड़ा. पूर्व मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद (MSK Prasad) ने बताया है कि कैसे टीम प्रबंधन ने टेस्ट में ओपनर के तौर पर सीमित ओवरों के उप-कप्तान के साथ जाने का फैसला किया.

    रोहित ने 2019 में इंग्लैंड में खेले गए विश्व कप में पांच शतक बनाए थे और कई लोगों का मानना ​​था कि उन्हें खेल के सबसे लंबे फॉर्मेट में ओपनिंग का मौका दिया जाना चाहिए. वहीं, पृथ्वी शॉ भी कुछ कारणों के चलते टीम से बाहर हो गए थे. प्रसाद ने खुलासा किया कि विश्व कप के दौरान इंग्लैंड में उनके शतकों ने उन्हें टेस्ट ओपनर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. उन्होंने साथ ही बताया कि टीम के कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली से भी इस बारे में काफी चर्चा हुई थी.

    प्रसाद ने क्रिकबज से कहा, 'रोहित ने पिछले कुछ वक्त में सफेद गेंद के फॉर्मेट में शानदार प्रदर्शन किया, इसमें कोई दोराय नहीं है. जब कोई इंग्लैंड में वनडे विश्व कप में पांच शतक बनाता है, तो आपको उन पर ध्यान देना होगा. हमने पृथ्वी शॉ को देखा, उन्होंने शानदार शुरुआत की लेकिन फिर उनकी फिटनेस खराब हो गई, उनकी फॉर्म गिर गई और किसी भी कारण से वह टीम से बाहर हो गए. मयंक वहां थे लेकिन दूसरे सलामी बल्लेबाज को लेकर चिंता थी. हम किसी विश्वसनीय और अनुभवी व्यक्ति के साथ जाना चाहते थे.'

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    उन्होंने आगे बताया कि चयन समिति ने विराट कोहली और रवि शास्त्री के साथ बैठकर इस मामले पर काफी बहस की. इसके अलावा प्रियांक पांचाल और अभिमन्यु ईश्वरन के लिए एक कठिन घरेलू सीजन का मतलब यह भी था कि भारत के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए आत्मविश्वास के साथ सलामी बल्लेबाज नहीं था. रोहित ने लंबे समय तक सफेद गेंद वाले क्रिकेट में ऐसा किया था.

    उन्होंने कहा, 'अगर कोई इंग्लैंड में पांच शतक लगा रहा है तो बेशक वह सफेद गेंद है लेकिन अपनी तकनीक मजबूत की है. विश्व कप के बाद, हम इंग्लैंड में विराट और रवि के साथ बैठकर चर्चा करने लगे कि हम उन्हें कैसे टीम में ला सकते हैं. दुर्भाग्य से प्रियांक पांचाल और एआर ईश्वरन का सीजन थोड़ा कठिन रहा. इसी सब को ध्यान में रखते हुए हमने सोचा कि हमें अनुभव के साथ एक ठोस व्यक्ति की जरूरत है. सफेद गेंद के क्रिकेट में उनके प्रदर्शन को देखते हुए हमने सोचा कि क्यों ना हम उन्हें आजमाएं. हमने बहुत बहस की थी.'

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    46 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर ने आगे कहा, 'मैंने व्यक्तिगत रूप से रोहित से बात की. वह इस चुनौती को स्वीकार करने से ज्यादा खुश थे. वह चुनौती के लिए तैयार थे. हमने उन्हें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ इलेवन में मौका दिया. टेस्ट सीरीज शुरू होने के बाद उनका अनुभव हावी हो गया और उन्होंने शानदार शुरुआत की और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. हम जानते हैं कि वह एक बड़े मैच खिलाड़ी हैं, चाहे वह आईपीएल हो या विश्व कप, बड़े मौकों पर वह हमेशा अच्छा प्रदर्शन करते हैं. अगर वह उस डब्ल्यूटीसी फाइनल में और इंग्लैंड की उस श्रृंखला में शुरुआत करते हैं, तो हम अगले तीन वर्षों में टेस्ट क्रिकेट में एक अलग रोहित शर्मा देखेंगे.'

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