ICC World Cup : एक जीरो ने पलटी रोहित की किस्मत, बनाया सबसे विस्फोटक बल्लेबाज

पाकिस्तान के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में जीरो पर आउट होने के बाद रोहित शर्मा ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करनी शुरू कर दी थी. उनके करियर का यह ग्राफ साबित करता है कि जीरो कहानी का अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है.

News18Hindi
Updated: July 3, 2019, 12:13 PM IST
ICC World Cup : एक जीरो ने पलटी रोहित की किस्मत, बनाया सबसे विस्फोटक बल्लेबाज
रोहित मौजूदा वर्ल्ड कप में चार शतक लगा चुके हैं.
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Updated: July 3, 2019, 12:13 PM IST
विश्व क्रिकेट में आज भारतीय ओपनर रोहित शर्मा दुनिया के सबसे घातक बल्लेबाज बन गए हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनका यह सफर जीरो से ही शुरू हुआ था. जीरो की क्या वेल्यू है, इसे मनोज कुमार ने फिल्म पूरब और पश्चिम में तसल्ली से बताया था. फिर भी समझ न आए तो रोहित शर्मा के करियर से समझ सकते हैं.

चौंकिए नहीं. दरअसल, मनोज कुमार और रोहित शर्मा ने जीरो की जो थ्योरी समझाई, थोड़ी बहुत एक-दूसरे से अलग जरूर है, लेकिन जीरो की वेल्यू बताने के लिए काफी है. फिल्म में जीरो से गिनती की शुरुआत बताई गई, तो रोहित की थ्योरी में जीरो के बाद गिनती ही खत्म...मतलब 2017 में पाकिस्तान के खिलाफ शून्य पर आउट होने के बाद तो रोहित भी भूल गए होंगे कि उनका नाम 'रो-हिट' कैसे पड़ा. उन्होंने कितने गेंदबाजों की नींद उड़ा दी और कितने चौके-छक्के जड़ दिए...मतलब कोई गिनती ही नहीं.



2007 में क्रिकेट में कदम रखने वाले रोहित 2012 तक टीम में अपने पैर जमा नहीं पा रहे थे. डेब्यू से लेकर दिसंबर 2012 तक उन्होंने कुल 82 पारियां खेली, जिसमें 29.97 की औसत से 1978 रन बनाए. इसमें दो शतक और 12 अर्धशतक शामिल हैं.

जनवरी 2013 से लेकर विश्व कप 2015 त​क रोहित ने खुद में थोड़ा बहुत सुधार किया और 48 मैचों में 53.38 की औसत से 2 ह​जार 242 रन बनाए. जिसमें पांच शतक और 13 अर्धशतक शामिल हैं. रोहित का करियर धीरे-धीरे पटरी पर आने लगा था और टीम में उनकी जगह भी लगभग पक्की हो चुकी थी.

अप्रैल 2015 से लेकर चैंपियंस ट्रॉफी 2017 तक टीम में उनका कद और बढ़ा और इसका असर उनके खेल पर भी दिखा. इस दौरान उन्होंने 23 मैचों में 57.86 की औसत से 1215 रन बनाए. जिसमें चार शतक और 6 अर्धशतक शामिल हैं.

लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी खत्म होने के बाद क्रिकेट की दुनिया कभी पुराने और निरंतर प्रदर्शन न करने वाले रोहित शर्मा को नहीं देख पाई. अब भारत को एक नया सलामी बल्लेबाज मिल गया था. नाम था 'रो-हिट.'
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रोहित से रोहिट बनने का सफर उनका चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल से शुरू हुआ. टूर्नामेंट तो खत्म हो रहा था, लेकिन उनका सफर शुरू हो रहा था. पाकिस्तान ने भारत को मात देकर खिताब अपने नाम कर लिया. 18 जून 2017 को भारत को मिली यह हार कभी न भूलने वाली थी और इस हार के कारण जिस खिलाड़ी को सबसे ज्यादा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, वो थे रोहित शर्मा. फाइनल में भारत को पहला झटका ही शून्य पर मिल गया. सलामी बल्लेबाज रोहित तीन गेंदों का सामना करके बिना खाता ही पवेलियन लौट गए. डकवर्थ लुईस नियम के आधार पर भारत 180 रन से मुकाबला हार गया. विराट कोहली, एमएस धोनी कोई नहीं चल पाया. लेकिन रोहित तो खाता नहीं खोल पाए थे. हार का ठीकरा फूटा रोहित पर. क्योंकि भारत को मजबूत शुरुआत दिलाने में वो असफल हो गए थे.

चैंपियंस ट्रॉफी के बाद भारत को मिला 'रो-हिट'

फाइनल की यादों को भूलकर टीम आगे बढ़ी और वेस्टइंडीज पहुंची. पांच मैचों की वनडे सीरीज में रोहित शर्मा टीम का हिस्सा नहीं थे. वेस्टइंडीज सीरीज के बाद भारतीय टीम अगस्त में श्रीलंका दौर पर गई. जहां पहल वनडे में रोहित सिर्फ चार रन ही बना पाए, लेकिन दूसरे वनडे में 54 रन, तीसरे में नाबाद 124 रन और चौथे में 104 रन की पारी खेली. यहीं से रोहित पहले ​की तुलना में और अधिक आक्रामक खिलाड़ी बन गए. चैंपियंस ट्रॉफी के बाद का अगर ग्राफ देखें तो 51 मैच में रोहित के बल्ले से 67.30 की औसत से 2894 रन बनाए. जिसमें 13 शतक और 11 अर्धशतक शामिल है. बाकी यह विश्व कप तो बन ही रहा है 'रो-हिट' के शतकों का गवाह.
First published: July 3, 2019, 12:13 PM IST
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