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Cricket Diary: सचिन तेंदुलकर की वो पारी, जिसे देख भारतीयों की छाती आज भी गर्व से फूल जाती है

सचिन तेंदुलकर ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहली बार 1991-92 में गए थे.

बात 1992 की है. उस साल भारत और ऑस्ट्रेलिया (India vs Australia) ने पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली. सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) का वह पहला ऑस्ट्रेलिया दौरा था. उन्होंने सीरीज के पांचवें टेस्ट में पर्थ की बाउंसी पिच पर क्रेग मैक्डरमट, मर्व ह्यूज, पॉल राइफल और माइक व्हिटनी के पेस अटैक को खिलौने की तरह खेला था.

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    नई दिल्ली. ऐसा कितनी बार होता है कि जब कोई टीम 300 रन के बड़े अंतर से हार जाए और 30 साल बाद जब उस मैच का जिक्र हो तो जीतने वाले की नहीं, हारने वाले की तारीफ हो. क्रिकेट इतिहास में 3 फरवरी की तारीख ऐसे ही एक मैच की याद लेकर आती है, जिसमें भारत बुरी तरह हार गया था. आज जब हम उस मैच को याद कर रहे हैं, तो वह भारत की हार के लिए नहीं, बल्कि सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) की उस पारी के लिए, जिसे उनकी महानता की पहली सीढ़ी कहा जा सकता है.

    बात 1992 की है. उस साल आईसीसी वर्ल्ड कप से पहले भारत और ऑस्ट्रेलिया (India vs Australia 1992) ने पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली. सीरीज का पांचवां टेस्ट एक फरवरी से पर्थ (Perth Test) में खेला गया. भारत सीरीज में 0-3 से पिछड़ चुका था. मोहम्मद अजहरुद्दीन की उस टीम को देखकर कभी नहीं लगा कि वह टेस्ट जीत सकती है. ट्रॉफी तो हम गंवा ही चुके थे और अब लड़ाई सम्मान की हो गई थी.

    ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज के हर मैच की तरह पांचवें टेस्ट में भी दमदार शुरुआत की. उसने डेविड बून (107) के शतक की मदद से पहली पारी में 346 रन ठोक दिए. भारत की शुरुआत खराब रही. दूसरे दिन का खेल रुकने पर उसका स्कोर 5 विकेट पर 135 रन था. पर्थ की पिच तब दुनिया की सबसे खतरनाक और बाउंसी होती थी. गेंद सीटी बजाती हुई बल्लेबाजों के कान के पास से गुजरती. शायद ऐसी ही आवाज को ‘चिन म्यूजिक’ कहा जाता था. लग रहा था कि भारतीय पारी तीसरे दिन सुबह सिमट जाएगी ओर टीम शायद ही 200 रन का आंकड़ा छू सके.

    लेकिन 19 साल के सचिन तेंदुलकर ने कुछ और ही सोच रखा था. सचिन तेंदुलकर दुनिया की सबसे बाउंसी पिच पर क्रेग मैक्डरमट, मर्व ह्यूज, पॉल राइफल और माइक व्हिटनी की आग बरसाती गेंदों को ऐसे खेल रहे थे, जैसे कोई छोटा बच्चा मस्ती में शरातत कर रहा हो. सचिन ने 161 गेंद पर 114 रन बनाए. उनकी पारी में 16 चौके शामिल थे, जो इस बात का सबूत थे कि उन्होंने मनचाहे अंदाज में गेंद को बाउंड्री के पार भेजा था. सीने और सिर की और आती गेंदों पर सचिन के कट और पुल शॉट देखकर दुनिया हैरान थी. इसी मैच में बाद में डीन जोंस और टॉम मूडी ने भी शतक बनाए. भारत यह मैच 300 रन से हार गया. लेकिन आज चाहे भारतीय क्रिकेटप्रेमी हों या ऑस्ट्रेलियाई, हर किसी को पर्थ टेस्ट याद करने पर सबसे पहले सचिन की पारी ही याद आती है.

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    वह सचिन तेंदुलकर के इंटरनेशनल करियर का महज तीसरा शतक था. सचिन ने उसके बाद 97 शतक और लगाए. लेकिन आज भी जब सचिन की महान पारियों का जिक्र होता है तो उस 114 रन को जरूर याद किया जाता है. सचिन ने उस दिन बता दिया था कि पिच चाहे बल्लेबाजों के लिए कब्रगाह हो या गेंदबाजों के लिए ऐशगाह, जब वे क्रीज पर होते हैं तो सिर्फ उनका राज ही चलता है. सचिन ने अगले 20 साल तक मैदान पर राज किया और आज भी क्रिकेटप्रेमियों के दिलों में राज कर रहे हैं.