अपना शहर चुनें

States

Birthday Special : 24 साल तक 22 गज के बीच कटा जिंदगी का सफर... सचिन का संन्यास, उन्हीं की जुबानी

सचिन तेंदुलकर ने 24 साल तक भातीय क्रिकेट का किया प्रतिनिधित्तव
सचिन तेंदुलकर ने 24 साल तक भातीय क्रिकेट का किया प्रतिनिधित्तव

सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने 16 नवंबर 2013 को अपने 24 साल के क्रिकेट करियर को अलविदा कह दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 24, 2020, 9:12 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. दोस्तों बैठ जाइए, ऐसे मैं और भावुक हो जाऊंगा. पूरी जिंदगी मैंने यहीं बिताई है, यह सोचना मुश्किल है कि मेरे इस शानदार सफर का अंत हो रहा है. 24 साल तक 22 गज के बीच कटा मेरा जीवन समाप्त हो रहा है. यूं तो मैं पढ़कर बोलना पसंद नहीं करता, लेकिन आज मैंने एक लिस्ट तैयार की है कि मुझे किन लोगों का धन्यवाद करना है. बात करना मुश्‍किल हो रहा है लेकिन मैं कोशिश करूंगा.

पिता ने दी सपने पूरे करने की आजादी
सबसे पहले मेरे पिता जिनका 1999 में निधन हो गया था. उनके मार्गदर्शन के बिना मैं यहां कभी नहीं पहुंच पाता. 11 साल की उम्र में उन्होंने मुझे यह आजादी दी कि मैं अपने सपने पूरे कर सकूं. उन्होंने कहा था - अपने सपनों के पीछे भागो, राह मुश्किल होगी, लेकिन कभी हार मत मानना. आज मैं उनको बहुत मिस कर रहा हूं. उनके बाद मेरी मां. मेरे जैसे शैतान बच्चे को उन्होंने कैसे संभाला. उनके अंदर काफी संयम था. पिछले 24 बरस जब मैं इंडिया के लिए खेला उन्‍होंने मेरा ख्‍याल रखा, इस से कहीं पहले से वह मेरे लिए प्रार्थना करती आई हैं जिसने मुझे शक्ति दी.

मेरे बड़े भाई  नितिन (Nitin Tendulkar) ज्‍यादा बात नहीं करते लेकिन एक बात जो उन्‍होंने हमेशा कही है कि उन्‍हें मालूम है कि मैं अपना 100 परसेंट दूंगा. मेरा पहला बल्ला बहन सविता (Savita) ने मुझे गिफ्ट किया था. वह एक कश्मीरी विल्लो का बैट था. आज तक जब भी मैं बल्लेबाजी कर रहा होता हूं तो वो मेरे लिए व्रत रखती हैं. क्रिकेट खेलने के कारण मुझे चार साल तक अपने अंकल-आंटी के साथ रहा जिन्होंने मुझे बेटे की तरह रखा और आज भी ऐसा ही है. आज मैं उनका धन्यवाद करना चाहता हूं.
बड़े भाई अजीत और मैंने साथ में देखा था ये सपना


मेरा भाई अजीत, उनके बारे में मैं क्या कहूं. यह सपना हम दोनों ने साथ देखा और जीया है. उन्होंने मेरे लिए अपना करियर खत्म कर दिया. वो ही पहली बार मुझे मेरे पहले कोच रमाकांत आचरेकर (Ramakant Achrekar) के पास ले गए जहां से मेरी जिंदगी बदल गई. पिछली रात भी वह मेरे आउट होने के तरीके को लेकर फोन पर मुझसे बात कर रहे थे. जब मैं नहीं खेल रहा होता हूं तब भी हम खेलने की तकनीक पर बात कर रहे होते हैं. मुझे खुशी है कि बचपन से चला आ रहा यह सिलसिला आज भी कायम है. अब जब मैं क्रिकेट नहीं खेलूंगा, हम शायद टेक्‍निक के बारे में बात करें. अगर वह चर्चाएं नहीं रहीं होती तो शायद मैं कम बेहतर क्रिकेटर बन पाता.

मेरा साथ निभाने और मेरी बकवास सुनने के लिए शुक्रिया
1990 में मेरी जिंदगी में सबसे खूबसूरत लम्‍हा आया जब मेरी अंजलि (Anjali Tendulkar) से मुलाकात हुई. जब हमने घर बसाने का फैसला किया तो उसने कहा वह अपने डॉक्टर के पेशे को छोड़ देंगी और घर संभालेंगी ताकि मैं क्रिकेट खेल सकूं. मुझे पता है कि एक डॉक्टर होने के नाते उसके सामने एक बड़ा करियर था लेकिन उन्होंने वह त्याग दिया. मेरा साथ निभाने और मेरी बकवास सुनने के लिए शुक्रिया. तुम मेरी जिंदगी की सबसे बढ़िया पार्टनरशिप जो मैंने कभी की है.

बेटी सारा और बेटा अर्जुन मेरे दो अनमोल हीरे
सारा (Sara tendulkar) और अर्जुन (Arjun Tendulkar) मेरी जिंदगी के दो अनमोल हीरे हैं. वह बड़े हो गए हैं. मेरी बेटी 16 साल की है, मेरा बेटा 14 साल का है. वक्‍त पंख लगाकर उड़ गया. मैंने हमेशा विशेष अवसरों जन्‍मदिन, स्‍पोर्ट्स डे, छुट्टियों के वक्‍त उनके साथ समय बिताना चाहा लेकिन ऐसा कर नहीं पाया. मैं वादा करता हूं अगले 16 साल या उसके बाद जो भी आएंगे तुम्‍हारे लिए हैं. आपके लिए एक मजबूत परिवार का होना और उसका राह दिखाते रहना बेहद महत्‍वपूर्ण है. अंजलि से शादी की इजाजत देने के लिए मेरे सास-ससुर का शुक्रिया.

आचरेकर सर से मिलना मील का पत्थर
मेरी जिंदगी में मील का पत्‍थर तब आया जब मेरे भाई मुझे रमाकांत आचरेकर (Ramakant Achrekar) सर के पास ले गए. उन्‍हें स्‍टैंड में देखकर मैं खुशी से भर उठा था. आमतौर पर वह सारे मैच टेलीविजन पर ही देखते हैं. सर मुझे पूरा मुंबई घुमाते और सुनिश्‍चित करते कि मैं मैच प्रैक्‍टिस कर सकूं. मजाक में कह रहा हूं. कभी मुझे यह नहीं कहते थे कि तुम अच्छा खेले, क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि मैं हवा में उड़ने लगूं. सर अब आप ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि अब मैं नहीं खेलने वाला.

एमसीए औऱ बीसीसीआई का शुक्रिया
मैंने अपने करियर की शुरुआत यहीं मुंबई से की थी. मुझे न्‍यूजीलैंड से सुबह 4 बजे लौटने और फिर 9 बजे मैच के लिए हाजिर होना याद है. इसलिए नहीं कि किसी ने मुझसे वहां रहने के लिए कहा बल्‍कि मैं वहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता था. मुंबई क्रिकेट का शुक्रिया. मुझ में भरोसा जताने के लिए सभी सेलेक्‍टर्स और यहां अपनी बात रखने की आजादी देने के लिए बीसीसीआई का शुक्रिया. बीसीसीआई शानदार था, मेरे पहले मैच से ही उन्हें मेरी काबिलियत पर विश्वास था और 16 साल की उम्र में मुझे टीम में नियुक्त करना एक बड़ा कदम था. इसलिए सभी चयनकर्ताओ को मुझमे भरोसा रखने के लिए और बीसीसीआई को मुझे मैदान पर जाकर खुद को व्यक्त करने की आज़ादी देने के लिए धन्यवाद.

टीम के खिलाड़ी और कोच मेरा दूसरा परिवार
पिछले 24 सालों में मेरे दोस्तों का योगदान और समर्थन भी अद्भुत रहा. वो मेरे साथ हर वक्त थे, जब मैं दबाव में था. वो मेरे साथ रात को 3 बजे भी थे, जब-जब मुझे चोट लगी. मेरा साथ देने के लिए धन्यवाद. सभी सीनियर क्रिकेटरों को धन्यवाद जो मेरे साथ खेले. सामने स्क्रीन पर आप राहुल (Rahul Dravid), वीवीएस (VVS Laxman) और सौरव (Sourav Ganguly) को देख सकते हैं, अनिल (Anil Kumble) यहां नहीं हैं अभी. आप सभी का शुक्रिया. आप मेरा दूसरा परिवार थे. विशेष पलों को शेयर करते हुए ड्रेसिंग रूम का पार्ट न होना कठिन होगा. सभी कोचों को भी धन्यवाद. मुझे हमेशा याद रहेगा वो पल जब इस मैच के शुरू होने से पहले एमएस धोनी ने मुझे 200वें टेस्ट की कैप भेंट की. मैंने टीम को एक छोटा सा संदेश दिया था. मैं उसे दोहराना चाहूंगा. मैं महसूस करता हूं कि हम सभी कितने भाग्यशाली और गौरवान्वित हैं कि भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनकर देश की सेवा कर रहे हैं.

डॉक्टर्स को धन्यवाद नहीं कहा तो अपने फर्ज से चूक जाऊंगा
मैं अपने फर्ज से चूक जाऊंगा, अगर मैंने अपने डॉक्टर्स को धन्यवाद नहीं किया. उन्होंने मुझे हमेशा फिट रखने की कोशिश की. मैंने बहुत चोटें खाईं, लेकिन किसी भी समय वो मेरे लिए हाजिर रहे. मैं उन्हें किसी भी समय कहीं भी बुला लेता था और वह आते थे. मैंने उन्हें मुंबई से चेन्नई बुलाया, मुंबई से दिल्ली बुलाया, मेरा मतलब कहीं भी.. उन्होंने बस अगली फ्लाइट ली है और अपना सारा काम और परिवार छोड़ कर मेरे पास आ गए हैं, जिस वजह से मैं खेल पाया हूं.

मैनेजमेंट टीम का शुक्रिया
मेरे सबसे पहले मैनेजर मार्क मैस्कैरेन्हैज जो शानदार व्यक्ति थे. दुर्भागयवश 2011 में हमने उन्हें एक कार एक्सीडैंट में खो दिया. वो क्रिकेट के, मेरे क्रिकेट के और खासतौर पर भारतीय क्रिकेट के बहुत बड़े शुभचिंतक थे. मैं उन्हें बहुत मिस करता हूं. मैं अपने मौजूदा मैनेजमेंट ग्रुप को भी शुक्रिया कहूंगा, जिन्होंने मार्क के काम को जारी रखा और मैं अपने दोस्त व मौजूदा मैनेजर विनोद नायुडू को भी धन्यवाद कहना चाहता हूं जो पिछले 14 सालों से लगातार मेरे साथ हैं. शुक्रिया डब्‍ल्‍यूएसजी. साथ ही मीडिया के लिए भी जिसने हमेशा मेरा साथ दिया. सभी फोटोग्राफर्स को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने मेरे हर खास पल को कवर किया. इसका मेरे ऊपर बेहद सकारात्‍मक असर पड़ा है. मुझे लगता है कि मेरा भाषण कुछ ज्‍यादा ही लंबा हो गया. मैं यहां मौजूद सभी लोगों को थैंक करना चाहूंगा जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आये हैं और हमेशा मेरी सहायता की है, चाहे मैंने 0 रन बनाये हों या 100+ स्कोर किया हो. आपका सपोर्ट मेरे लिए बहुत प्रिय था और ये मेरे लिए बहुत मायने रखता है.

मरते दम तक कानों में गूंजेगी सचिन-सचिन की आवाज
मैं जानता हूं… मैं कई लोगों से मिल चुका हूं जो मेरे लिए व्रत रखते हैं, प्रार्थना करते हैं, मेरे लिए इतना कुछ किया है. उसके बिना मेरे लिए जिंदगी ऐसी नहीं होती. मैं आपको दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं और ये भी कहना चाहूंगा कि वक़्त बहुत तेजी से गुजर गया है, लेकिन जो यादें आपने मेरे लिए छोड़ी हैं वो हमेशा-हमेशा के लिए मेरे साथ रहेंगी. एक चीज जो मेरी आखिरी सांसों तक मेरे कान में गूंजती रहेगी वो है 'सचिन, सचिन'!
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज