सचिन तेंदुलकर को 27 साल पहले संयोग से मिला था वनडे में ओपनिंग का मौका और ऐसे बने क्रिकेट के भगवान

1994 की इस सीरीज में टीम इंडिया पीली रंग की जर्सी में मैदान पर थी. फाइल फोटो: youtube

1994 की इस सीरीज में टीम इंडिया पीली रंग की जर्सी में मैदान पर थी. फाइल फोटो: youtube

Sachin Tendulkar first time open: 27 मार्च 1994 का दिन क्रिकेट और सचिन तेंदुलकर के लिए काफी खास है. वनडे क्रिकेट को टीम इंडिया के एक फैसले ने बदल कर रख दिया था. वनडे के जिन रिकॉर्ड के सामने लोगों के सिर झुक जाते थे, उन्हें सचिन ने ओपनिंग करते हुए एक झटके में अपने नाम कर लिया. कुछ तो ऐसे हैं, जिन्हें शायद ही कोई दूसरा प्लेयर अपने नाम कर पाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 27, 2021, 1:01 PM IST
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नई दिल्ली : क्रिकेट की दुनिया में 1989 का साल अगर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के करियर के आगाज के लिहाज से याद करने वाला रहा, तो 27 मार्च 1994 ऐसा साल और दिन रहा, जिसने वर्ल्ड क्रिकेट की सूरत को बदल कर रख दिया. कहना होगा कि वनडे क्रिकेट को एक ऐसा सितारा मिला, जिसकी चमक पर वक्त भी अपना असर नहीं छोड पाया. इसी दिन संयोग से सचिन तेंदुलकर को वनडे क्रिकेट में ओपनिंग का मौका मिला. वह वर्ल्ड क्रिकेट में 1989 में आगाज कर चुके थे, लेकिन उनके खाते में वनडे में कोई शतक नहीं था. ऐसी कोई पारी नहीं थी, जिससे ये अहसास हो जाता कि ये बल्लेबाज इस फार्मेट का भगवान बनेगा. हालांकि पारी को आगाज करने की पीछे की भी अपनी कहानी है.

27 मार्च 1994 तक सचिन टीम इंडिया के लिए वनडे क्रिकेट में भी मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते थे. उस समय टीम के लिए ओपनिंग करने की जिम्मेदारी अजय जडेजा, संजय मांजरेकर और नवजोत सिंह सिद्धू जैसे बल्लेबाजों की थी. टीम इंडिया 1994 में न्यूजीलैंड के दौरे पर थी. 19 से 23 मार्च तक खेला गया एक मात्र टेस्ट ड्रॉ रहा. पहला मैच 25 मार्च को नेपियर में खेला गया. मैच को कीवी टीम ने 28 रनों से जीत लिया. निगाहें अब दूसरे मैच पर थीं. दूसरा मैच 27 मार्च को ऑकलैंड में खेला गया. लेकिन समस्या तब हो गई जब मैच से ठीक पहले सलामी बल्लेबाज नवजोत सिंह सिद्धू अनफिट घोषित हो गए. टीम के सामने सबसे बडी समस्या टीम ओपन करने की हो गई.

ऐसे में कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने एक अप्रत्याशित फैसला करते हुए पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी अजय जडेजा के साथ सचिन तेंदुलकर को दी. न्यूजीलैंड ने इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 142 रनों पर सिमट गई. क्रिस हैरिस के अलावा कोई भी बल्लेबाज टिक नहीं पाया. राजेश चौहान ने 3 विकेट लिए. कपिल देव, श्रीनाथ और सलिल अंकोला ने दो-दो विकेट लिए.


पारी की शुरुआत करने आए अजय जडेजा और सचिन तेंदुलकर. अजय जडेजा तो जल्दी आउट हो गए. लेकिन सचिन को इसी मौके की तलाश थी. उन्होंने 49 बॉल में 82 रनों की पारी खेलकर टीम इंडिया को शानदार जीत दिलाई. सचिन ने इस पारी में 15 चौके और 2 छक्के लगाए. तीसरे मैच में सचिन फिर ओपनिंग के लिए उतरे और 63 रनों की शानदार पारी खेली. टीम इंडिया ने मैच 12 रन से जीता. हालांकि चौथे मैच में तेंदुलकर ने 26 बॉल में 40 रनों की पारी खेली. लेकिन टीम इंडिया मैच हार गई. सीरीज 2-2 से बराबर रही.
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कहना होगा यहीं से विश्व क्रिकेट का इतिहास हमेशा के लिए बदल गया. दुनिया ने ऊपरी क्रम में सचिन का वह रूप देखा, जिसका इंतजार वर्ल्ड क्रिकेट हमेशा से कर रहा था. सचिन ने बल्लेबाजी का एक नया इतिहास रच दिया. 1994 में उन्होंने पहला वनडे शतक लगाया और 4 साल में ही 1998 में आकर उन्होंने वनडे में सबसे ज्यादा शतकों के डेसमंड हेंस के रिकॉर्ड को तोड़ दिया. वनडे क्रिकेट में सचिन ने 48.29 की औसत से 344 मैचों में 15310 रन बनाए. अपनी कुल 49 वनडे शतकों में से उन्होंने 45 शतक सिर्फ सलामी बल्लेबाज के तौर पर लगाए.

'ओपनिंग के लिए उन्‍हें गिड़गिड़ाना पड़ा'



ओपनिंग की एक कहानी सचिन ने भी सुनाई थी. उन्होंने एक चैट शो में सचिन ने ओपनिंग में शुरुआत करने के बारे में मजेदार किस्‍सा सुनाया. उन्‍होंने बताया कि किस तरह ओपनिंग के लिए उन्‍हें गिड़गिड़ाना पड़ा. सचिन ने कहा, '1994 में जब मैंने भारत के लिए बल्‍लेबाजी शुरू की थी तब सभी टीमों की रणनीति विकेट बचाना थी. मैंने अलग हटकर सोचने का प्रयास किया. मैंने सोचा कि मैं ऊपर जाकर विपक्षी गेंदबाजों पर हमला करूं. लेकिन मुझे इस मौके लिए गिड़गिड़ाना पड़ा. मैंने कहा यदि मैं नाकाम हो गया दोबारा आपके पास नहीं आऊंगा.'
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