30 साल बाद खिताब जीतने का बंगाल का सपना टूटा, सौराष्ट्र पहली बार बना रणजी चैंपियन

सौराष्ट्र ने पहली बार जीता खिताब

सौराष्ट्र (Saurashtra) की टीम चार बार फाइनल में पहुंची है लेकिन पहली बार खिताब जीतने में कामयाब रही

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    राजकोट. रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) के मौजूदा सीजन में बंगाल (Bengal) का 30 साल बाद चैंपियन बनने का सपना टूट गया. टूर्नामेंट के फाइनल में बंगाल को सौराष्ट्र ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर मात देकर पहली बार यह खिताब अपने नाम किया. बंगाल के कोच और पूर्व भारतीय खिलाड़ी अरुण लाल (Arun Lal) अपनी टीम को 13 साल बाद फाइनल में पहुंचाने में तो कामयाब रहे लेकिन वह टीम को चैंपियन नहीं बना पाए.  बंगाल (Bengal) और सौराष्ट्र (Saurashtra) के बीच रणजी ट्रॉफी फाइनल के पांचवें और अंतिम दिन का खेल कोरोना वायरस महामारी के कारण खाली स्टेडियम में खेला गया.

    बंगाल ने पहली पारी में हासिल की बढ़त
    मैच के आखिरी दिन बंगाल को पहली पारी की बढ़त पर जीत हासिल करने के लिए 72 रनों की दरकार थी जबकि उसके पास केवल चार विकेट शेष थे. हालांकि सौराष्ट्र ने बंगाल को 381 रनों पर ही ऑलआउट कर दिया और जीत तय की. आखिरी दिन  अनुष्तुप मजूमदार (Anushtup Majumdar) (58) और अर्णब बेदी (Arnab Bedi) (28) ने खेल शुरू किया. मुकाबले के चौथे दिन मजूमदार सौराष्ट्र और खिताब के बीच बड़ी दीवार बनकर खड़े हो गए थे. हालांकि कप्तान जयदेव (Jaydev Unadkat) ने आखिरी दिन मजूमदार को सेट होने का मौका नहीं दिया. उन्होंने  मजूमदार को 63 रनों के निजी स्कोर पर एलबीडबल्यू किया. इसी ओवर में जयदेव ने आकाशदीप को रनआउट किया जो अपनी लापरवाही का शिकार बने.

    मैच के आखिरी दिन बंगाल को पहली पारी की बढ़त पर जीत हासिल करने के लिए 72 रनों की दरकार थी जबकि उसके पास केवल चार विकेट शेष थे. हालांकि सौराष्ट्र ने बंगाल को 381 रनों पर ही ऑलआउट कर दिया. आखिरी दिन अनुष्तुप मजूमदार (58) और अर्णब बेदी (Arnab Bedi) (28) ने खेल शुरू किया. दिन के छठे ओवर में ही बंगाल को बड़ा झटका लगा जब सौराष्ट्र के कप्तान जयदेव उनादकट ने अनुष्तुप को एलबीडबल्यू किया. इसी ओवर में जयदेव ने आकाशदीप को रनआउट किया जो अपनी लापरवाही का शिकार बने. इसके बाद डीए जडेजा ने मुकेश कुमार (Mukesh Kumar) को केवल पांच रन के स्कोर पर आउट कर दिया. आखिरी विकेट के लिए इशान पोरेल और अर्णब ने साझेदारी की कोशिश की लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाए.

    सौराष्ट्र की टीम का सफर
    सौराष्ट्र (Saurashtra)  की टीमें 1950-51 से पहले नवानगर और वेस्टर्न इंडिया नाम की दो टीमों में विभाजित थी. हालांकि 1950 के बाद दोनों टीमें सौराष्ट्र के नाम से टूर्नामेंट में हिस्सा लेने लगी. गुजरात और विदर्भ के अलावा सौराष्ट्र गुजरात राज्य की तीसरी क्रिकेट टीम है. यह टीम अब तक चार बार फाइनल में पहुंच चुकी है. साल 2012-13 में मुंबई ने मात दी थी. वहीं इसके बाद 2015-16 में भी एक बार फिर मुंबई ने सौराष्ट्र का रणजी ट्रॉफी जीतने का सपना तोड़ दिया था. पिछले सीजन में भी सौराष्ट्र की टीम ने फाइनल का सफर तय किया था लेकिन वह एक बार फिर विदर्भ से हार गए. हालांकि इस बार उन्होंने किसी को अपने सपने के बीच नहीं आने दिया.

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