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शेफाली वर्मा की ताकत को लेकर बड़ा खुलासा, दिन में पचास बार लगाती है एक शॉट

शेफाली वर्मा ने 10  साल की उम्र में बल्ला हाथ में थामा था. (फाइल फाेटो)
शेफाली वर्मा ने 10 साल की उम्र में बल्ला हाथ में थामा था. (फाइल फाेटो)

16 साल की शेफाली वर्मा (Shafali Verma) ने आईसीसी महिला टी20 टूर्नामेंट के इस सीजन में गेंदबाजों के मन में अपना खौफ बैठा दिया है.

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नई दिल्ली. भारत की युवा बल्लेबाज शेफाली वर्मा (Shafali Verma) का एक शॉट आज उनकी पहचान बन चुका है. गेंदबाज के सिर के ऊपर से शॉट मारने के लिए जैसे ही वह थोड़ा नीचे होती है, तो गेंदबाज के मन में भी खौफ बैठ जाता है. मगर शेफाली गेंदबाजों पर बिल्कुल भी रहम नहीं खाती और गेंदबाज के सिर के ऊपर से मजबूत शॉट जड़ती हैं. बिल्कुल वीरेंद्र सहवाग के स्टाइल में. वर्ल्ड कप में उन्होंने शानदार पारियां खेली, जिसके दम पर वह कुछ ही समय में दुनिया की नंबर एक टी20 बल्लेबाज बन गई हैं. देखने में शेफाली के लिए यह शॉट अब आसान सा नजर आता है, मगर उनकी सफलता की सीढ़ी बने इस शॉट को उन्होंने अपने लिए आसान बनाने के लिए काफी पसीना भी बहाया है. एक दिन में वह कम से कम 50 बार इस शॉट का अभ्यास करती हैं.

महिला टी20 वर्ल्ड कप (Women's World Cup) में शेफाली के इस ताबड़तोड़ प्रदर्शन के दम पर टीम इंडिया ने पहली बार फाइनल में प्रवेश कर लिया है. टूर्नामेंट में 16 साल की इस बल्लेबाज ने 161 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए. जो इस टूर्नामेंट में किसी फ्रंट लाइन बल्लेबाज का सर्वश्रेष्ठ है. इसी के साथ टूर्नामेंट में शेफाली के सर्वाधिक नौ छक्के भी लगाए हैं.

गेंदबाजों के ऊपर से मारना है शेफाली का पसंदीदा शॉट
इस युवा बल्लेबाज का पसंदीदा शॉट गेंदबाज के सिर के ऊपर से शॉट मारना है, जो उन्होंने रोहतक कि क्रिकेट एकेडमी में कोच अश्विनी कुमार की निगरानी में सीखा था. कोच अश्विनी ने बताया ‌कि शेफाली को इस शॉट सहित हर तरह के शॉट के लिए तैयाार किया गया. कोच ने कहा कि उन्होंने शेफाली के खेलने के अंदाज को सिर्फ निखारने का ही काम किया है.
डर की वजह से लड़कों के साथ करना पड़ा अभ्यास


शेफाली ने 12 साल की उम्र में एकेडमी में दाखिला लिया था और महीने भर के अंदर ही वह गेंद को काफी मजबूती से हिट करने लगी. जिसे देखकर कोच ने उनके ग्रुप की बाकियों लड़कियों  की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शेफाली को सीनियर ग्रुप में डाल दिया गया और लड़कों के साथ इस बल्लेबाज ने अभ्यास करना शुरू किया.

इस एकेडमी से कुछ फर्स्ट क्लास क्रिकेटर भी निकले और उनमें से कुछ ने शेफाली के खिलाफ गेंदबाजी भी की. जिसमें से एक आशीष हुड्डा भी हैं, जिन्होंने बहुत जल्‍द ही शेफाली की  काबिलियत को पहचान लिया था.  हुड्डा ने कहा कि रणजी ट्राॅफी (Ranji Trophy) स्तर का खिलाड़ी होने के नाते आप तेज गेंद नहीं फेंकना चाहते और एकेडमी के बच्चों को चोटिल नहीं करना चाहते. इसीलिए उन्होंने छोटे रन अप के साथ गेंद डाली और वह शेफाली की हिटिंग को देखकर हैरान रह गए. इस‌के बाद उन्होंने पूरे रन अप के साथ गेंद फेंकी, मगर शेफाली ने उस पर भी कुछ शॉट लगा दिए. हुड्डा उसी दिन समझ गए थे कि शेफाली खास है और एक  दिन वह भारत के लिए खेलेगी.

गत विजेता ऑस्ट्रेलिया के साथ रविवार को होने वाले आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप फाइनल से पहले शेफाली को सलाह देने के बारे में कोच अश्विनी कुमार ने कहा कि वह शेफाली के दिमाग में हलचल नहीं मचाना चाहते. उन्होंने सिर्फ शेफाली को बधाई दी और कहा कि कप्तान और  कोच जो भी कहें, वैसा ही करें.

 

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