जसप्रीत बुमराह-मोहम्मद शमी की राह पर है शार्दुल ठाकुर और भुवनेश्‍वर कुमार की जोड़ी

भुवनेश्‍वर कुमार और शार्दुल ठाकुर ने इंग्‍लैंड के खिलाफ सीरीज में कमाल का प्रदर्शन किया था (फोटो AP)

भुवनेश्‍वर कुमार और शार्दुल ठाकुर ने इंग्‍लैंड के खिलाफ सीरीज में कमाल का प्रदर्शन किया था (फोटो AP)

अगर जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी इस सीरीज़ में खेल रहे होते तो शायद शार्दुल ठाकुर और भुवनेश्वर कुमार के लिए हर मैच में खेलना मुमकिन नहीं था. भारत के इन दोनों गेंदबाज़ों की उम्र लगभग एक जैसी है, लेकिन ये दोनों समकालीन खिलाड़ियों की खूबियां और क्रिकेट की राह बिलकुल जुदा रही है.

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  • Last Updated: March 22, 2021, 11:57 AM IST
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नई दिल्‍ली. ये बेहद दिलचस्प इत्तेफाक है कि इंग्लैंड के खिलाफ टीम इंडिया की जीत में उन दो गेंदबाज़ों की भूमिका सबसे अहम रही जो शायद कुछ महीने पहले तक इस सीरीज़ में खेलने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे. अगर जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी इस सीरीज़ में खेल रहे होते तो शायद शार्दुल ठाकुर और भुवनेश्वर कुमार के लिए हर मैच में खेलना मुमकिन नहीं था. भारत के इन दोनों गेंदबाज़ों की उम्र लगभग एक जैसी है, लेकिन ये दोनों समकालीन खिलाड़ियों की खूबियां और क्रिकेट की राह बिलकुल जुदा रही है.

अगर शार्दुल सबसे ज्‍यादा रणजी ट्रॉफी जीतने वाली मुंबई की टीम से ताल्लुक रखते हैं तो उत्तर प्रदेश ने सिर्फ एक मौके पर रणजी ट्रॉफी जीती है जब भुवी उस टीम का हिस्सा नहीं थे, लेकिन दोनों प्रतिभाशाली गेंदबाजों को करीब 5 साल तक घरेलू क्रिकेट में पसीना बहाना पड़ा, तब जाकर उन्हें राष्ट्रीय टीम में मौका मिला. दोनों खिलाड़ियों ने अपने पहले वनडे मैच में बेहतरीन खेल दिखाया. लेकिन पिछले 5 सालों में दोनों खिलाड़ियों का करियर अलग अलग तरह के उतार-चढ़ाव से गुजरा, जहां एकमात्र समान बात रही है दोनों का फिटनेस के फ्रंट पर जूझना.

कामयाबी के अलग- अलग मायने

इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज ने दोनों को भारत का अलग अलग तरीके से बेस्ट बॉलर बना डाला. अगर ठाकुर ने 5 मैचों में सबसे ज्‍यादा विकेट (8) लिए तो भुवनेश्वर ने सबसे किफायती (सिर्फ 6.38 की इकोनॉमी ) गेंदबाज़ी की, लेकिन जो सबसे अच्छी बात दोनों ने मिलकर साबित की है तो वो है कि अगर टी20 में कामयाब टीम बनना है तो आपकी गेंदबाजी के तरकश में हर तरह के तीर होने चाहिए. टी 20 में अक्सर ये बात कही जाती है कि अगर आप विकेट ले पाएं या ना पाएं कोशिश ये जरुर करें कि आपकी गेंद पर चौका या छक्का ना पड़े. ज्‍यादा से ज़्यादा डॉट बॉल डालें, मतलब आपकी गेंदों पर रन न बनें. अनुभवी भुवी ने मैच दर मैच यही किया. भले ही उन्हें सिर्फ 4 विकेट सीरीज में मिले. वहीं गेंदबाज़ों को अक्सर ये भी कहा जाता है कि रन रोकने का सबसे बेहतरीन तरीका है विकेट लेते रहना. अगर आप लगातार विकेट लेंगे तो रन विपक्षी टीम के उतनी तेजी से नहीं बनेंगे. ठाकुर ने भले ही करीब 10 रन की इकोनॉमी से रन खर्च किए, लेकिन उसकी भरपाई उन्होंने निर्याणक लम्हों में बड़े विकेट लेकर पूरी कर दी.
जोड़ी हो तो ऐसी

यानी जोड़ी हो तो ऐसी. एक-दूसरे की भूमिका का पूरी तरह से सम्मान करते हुए टीम हित को सर्वोपरि रखना. बल्लेबाज़ी के दौरान ये बात अक्सर दिख जाती है कि एक बल्लेबाज टिककर खेलने का प्रयास करता है और दूसरा तेज़ी से रन बनाता है. लेकिन गेंदबाजी आक्रमण के दौरान जिस तरह का तालमेल ठाकुर और भुवी की जोड़ी ने दिखाया उसे जानकार अक्सर नजरअंदाज कर जाते हैं.

विविधता की धनी इस जोड़ी की चुनौतियां भी एक जैसी



ठाकुर ने अब तक अपने करियर में सिर्फ 36 इंटरनेशनल मैच खेले हैं जबकि भवी ने उनसे करीब पांच गुणा 183 मैचों में शिरकत की है. लेकिन क्रिकेट ने दोनों को एक लगभग एक जगह पर लाकर खड़ा किया है. अगर भुवनेश्वर के पास चुनौती इस बात कि है कि वो दोबारा से टेस्ट मैच की चौकड़ी में खुद को स्थापित करें तो ठाकुर की हसरत है कि वो ऑस्ट्रेलिया दौरे में यादगार टेस्ट के सिलसिले को आगे बरकरार रखें. सफेद गेंद की क्रिकेट में भी दोनों गेंदबाजों के पास इतनी विविधता है कि वो हर कप्तान की पसंद हो सकते हैं. टी20 में खासतौर पर डेथ ओवर्स के दौरान अगर ठाकुर आपको नाजुक से नाजुक लम्हों में कीमती विकेट दिला सकतें हैं तो भुवी धाकड़ से धाकड़ बल्लेबाजों की बोलती बंद कर सकते हैं, लेकिन दोनों इस बात से वाकिफ है कि अगर टी20 वर्ल्ड कप में खेलना है तो वो सिर्फ इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में बेहतरीन प्रदर्शन के बूते निश्चिंत होकर बैठ नहीं सकते हैं.

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धोनी-वार्नर के तुरुप के इक्के

अगले दो महीने आईपीएल के दौरान ये दोनों खिलाड़ी अपने अपने कप्तानों के लिए सबसे भरोसेमंद गेंदबाज होंगे. अगर ठाकुर की काबिलियत पर धोनी को बहुत भरोसा है तो डेविड वार्नर के लिए भुवी भी तुरुप के इक्के हैं. ठाकुर और भुवनेश्वर के लिए आईपीएल में शायद अपनी अपनी टीमों के लिए भूमिका बदल जाएगी और वो अलग गेंदबाज़ के तौर पर भी नज़र आएं, लेकिन फिर से कुछ महीने बाद ये टीम इंडिया के लिए खेलेंगे तो इस जोड़ी से वही उम्मीद की जाएगी, जो उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ किया. इस जोड़ी पर तो बुमराह और शमी की जोड़ी को भी फख्र महसूस होगा.
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