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शार्दुल ठाकुर बोले- तेज गेंदबाजों का सामना करना आसान, लोकल ट्रेन में सीट मिलनी मुश्किल!

शार्दुल ठाकुर बोले- तेज गेंदबाजों का सामना करना आसान, लोकल ट्रेन में सीट मिलनी मुश्किल!

फरवरी में लगने वाला है क्रिकेट का तड़का, जानिए पूरा शेड्यूल (साभार-एपी)

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शार्दुल ठाकुर (Shardul Thakur) ने ब्रिसबेन टेस्ट में गेंद और बल्ले से जबर्दस्त प्रदर्शन किया था. शार्दुल ने मैच में 7 विकेट लिये और पहली पारी में शानदार अर्धशतक भी लगाया.

    नई दिल्ली. शार्दुल ठाकुर (Shardul Thakur) ने साल 2018 में हैदराबाद में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था लेकिन चोट के चलते वो महज 10 गेंद फेंकते ही चोटिल हो गए और उसके बाद उनका टेस्ट टीम से ही पत्ता कट गया. लेकिन इसके दो साल बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे के आखिरी टेस्ट मैच में शार्दुल ठाकुर को एक बार फिर मौका मिला. भारत के अहम गेंदबाज चोटिल थे और टीम इंडिया ने शार्दुल को मौका दिया. ब्रिसबेन के गाबा मैदान पर शार्दुल ने उस मौके का पूरा फायदा उठाया. शार्दुल ने गेंद और बल्ले से धमाल मचाते हुए भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की. शार्दुल ने पहली पारी में 67 रन बनाए. ये रन उस वक्त निकले जब टीम इंडिया 186 रन पर 6 विकेट गंवाकर संघर्ष कर रही थी. शार्दुल ने पहली पारी में 3 और दूसरी पारी में 4 विकेट भी झटके. शार्दुल ठाकुर से जब एक इंटरव्यू में ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजी के खिलाफ बल्लेबाजी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा- तेज गेंदबाजों के खिलाफ बल्लेबाजी से ज्यादा मुश्किल लोकल ट्रेन में सीट पाना है, वहां ज्यादा अच्छी टाइमिंग की जरूरत होती है.

    शार्दुल ठाकुर ने ये बात मजाक में कही लेकिन उनकी बल्लेबाजी से तो कुछ ऐसा ही लगा था. शार्दुल ठाकुर ने मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और पैट कमिंस जैसे गेंदबाजों पर जबर्दस्त शॉट खेले. शार्दुल ने अपना खाता ही पैट कमिंस की बाउंसर पर छक्का लगाकर खोला था. शार्दुल ठाकुर ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ खास बातचीत में कहा कि उनके लिए इंतजार करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हुआ. हालांकि वो मौके पर चौका लगाने से बेहद खुश हैं.

    किसान का बेटा हूं, इसलिए मेहनत की आदत है-शार्दुल
    शार्दुल ठाकुर ने इंटरव्यू में कहा, 'मैं हमेशा यही सोचता रहा कि अगला मौका कब आएगा. मेरे पास दो ही विकल्प थे, या तो मैं ये कहूं कि अगला मौका कब आएगा और या फिर मेहनत करता रहूं और इंतजार करूं. मेरे लिए मेहनत करना एकमात्र विकल्प है. मेरे पिता एक किसान हैं और हमें जिंदगी भर लगातार प्रयास करना ही सिखाया गया है. अगर एक साल खेती खराब हो जाएगा तो इसका मतलब ये नहीं कि मैं खेती करना छोड़ दूंगा. ऐसा ही क्रिकेट में है, मैं दोबारा कोशिश करूंगा.'

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    शार्दुल ठाकुर ने आगे कहा, 'मुझे भी मौका नहीं मिलने से निराशा होती है, आप बताइए कौन बाहर बैठना चाहता है लेकिन अंत में सिर्फ 11 खिलाड़ी ही खेल सकते हैं. मैं दो सीरीज तक बाहर बैठा रहा, मैं भी इंसान हूं, मुझे भी निराशा होती है. मैं बस खिलाड़ियों के लिए पानी और उनका जोश बढ़ाकर खुद को व्यस्त रखता था. मैंने रवि शास्त्री से एक दिन बात की. मुझे कभी-कभी एक सीरीज में एक ही मौका मिलता है और जब भी मैं खेलता हूं मुझे दबाव महसूस होता है, मैं क्या करूं? इसपर रवि शास्त्री ने कहा कि अगर आप इस मौके को दबाव की तरह देखते हो तो आपके ऊपर दबाव ही होगा लेकिन अगर आप जीतना चाहते हो तो दबाव के बावजूद भी आपके ऊपर कोई दबाव नहीं होगा.' रवि शास्त्री की ये बात शार्दुल के लिए शायद काम कर गई इसलिए ब्रिसबेन की जीत में उन्होंने इतना गजब प्रदर्शन किया.undefined

    Tags: Cricket news, India vs Australia, Shardul thakur

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