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सौरव गांगुली: एक लीडर जो 9 महीने में बदल देगा भारतीय क्रिकेट की तस्वीर!

भाषा
Updated: October 23, 2019, 2:43 PM IST
सौरव गांगुली: एक लीडर जो 9 महीने में बदल देगा भारतीय क्रिकेट की तस्वीर!
सौरव गांगुली ने बीसीसीआई का अध्यक्ष पद संभाला

सौरव गांगुली बीसीसीआई के 39वें अध्यक्ष बने, इस पद पर पहुंचने वाले दूसरे भारतीय कप्तान

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मुंबई. ड्रेसिंग रूम से बोर्ड रूम तक पहुंचे पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) का क्रिकेट प्रशासन के शीर्ष तक का सहज सफर उनके खेलने के दिनों की याद दिलाता है जब ऑफ साइड पर उनके कलात्मक खेल का कोई सानी नहीं होता था. खिलाड़ी के रूप में अपने शीर्ष दिनों के दौरान गांगुली जिस तरह सात खिलाड़ियों की मौजूदगी के बावजूद ऑफ साइड में आसानी से रन बनाकर विरोधी टीमों को हैरान कर देते थे, उसी तरह वह विश्व क्रिकेट के शीर्ष पदों में से एक बीसीसीआई अध्यक्ष पद के लिए सभी को पछाड़ते हुए सर्वसम्मत उम्मीदवार बनकर उभरे.

बचपन से लीडर हैं गांगुली!
दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड के शीर्ष तक 47 साल के गांगुली (Sourav Ganguly) के सफर ने एक बार फिर इस कहावत को सही साबित कर दिया कि ‘एक लीडर हमेशा लीडर’ रहता है. गांगुली के अंदर नेतृत्व क्षमता नैसर्गिक रूप से थी जिन्हें 2000 में उस समय भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया जब टीम इंडिया मैच फिक्सिंग के रूप में अपने सबसे बुरे दौर में से एक का सामना कर रही थी. गांगुली जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे और उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लेते हुए प्रतिभावान लेकिन दिशाहीन युवा खिलाड़ियों के समूह को विश्व स्तरीय टीम में बदला और साथ ही उस पीढ़ी के दिग्गजों के साथ अच्छे कामकाजी रिश्ते भी बनाए.

मुंबई में गांगुली ने बीसीसीआई अध्यक्ष पद संभाला


चाहे एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) के साथ उस समय की सबसे घातक सलामी जोड़ी बनाना हो या युवराज सिंह और वीरेंद्र सहवाग जैसे उभरते हुए खिलाड़ियों का समर्थन हो, गांगुली ने हमेशा अपने फैसलों पर भरोसा किया और इन्हें सहजता से लिया. बड़े खिलाड़ी से शीर्ष प्रशासक तक के सफर को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए हालांकि उन्हें कई चुनौतियों से पार पाना होगा जिसका सामना फिलहाल भारतीय क्रिकेट को करना पड़ रहा है. वह खिलाड़ी के रूप में ऐसा करने में सफल रहे और अब प्रशासक के रूप में भी ऐसा करने में सक्षम हैं.

गांगुली को क्रिकेट के साथ प्रशासन का अनुभव
भारत को अपनी कप्तानी में 21 टेस्ट जिताने वाले और 2003 विश्व कप के फाइनल में पहुंचाने वाले गांगुली (Sourav Ganguly) को बंगाल क्रिकेट संघ के साथ प्रशासक के रूप में काफी अनुभव है. वह पहले इस संघ के सचिव और फिर अध्यक्ष रहे. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 18 हजार से अधिक रन बनाने वाले गांगुली निश्चित तौर पर ईडन गार्डन्स के कार्यालय में बैठकर मिले अनुभव का इस्तेमाल बीसीसीआई के संचालन में करेंगे. गांगुली को बीसीसीआई की कार्यप्रणाली की भी जानकारी है क्योंकि वह बोर्ड की तकनीकी समिति और तेंदुलकर तथा वीवीएस लक्ष्मण के साथ क्रिकेट सलाहकार समिति के सदस्य रह चुके हैं.
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9 महीने में भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदल देंगे गांगुली!
प्रशासकों की समिति के 33 महीने के कार्यकाल के बाद बीसीसीआई की बागडोर संभालने वाले गांगुली (Sourav Ganguly) के पास भारतीय क्रिकेट की छवि सुधारने के लिए केवल नौ महीने का समय है जिसे 2013 आईपीएल स्पाट फिक्सिंग प्रकरण से नुकसान पहुंचा था. गांगुली की कप्तानी में स्वाभाविकता और आक्रामक दिखती थी और उनकी नेतृत्व क्षमता की एक बार फिर परीक्षा होगी जब वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद में भारत को दोबारा उसकी मजबूत स्थिति दिलाने का प्रयास करेंगे.

संभावना है कि गांगुली की अगुआई वाले प्रशासन और आईसीसी के बीच रस्साकशी देखने को मिल सकती है क्योंकि विश्व संचालन संस्था के प्रस्तावित भविष्य दौरा कार्यक्रम (एफटीपी) का बीसीसीआई के राजस्व पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है. वैश्विक संस्था का नया संचालन ढांचा तैयार करने के लिए नवगठित कार्य समूह में आईसीसी के भारत को जगह नहीं देने से स्थिति और जटिल हो गई है.

गांगुली की घरेलू चुनौतियां
इसके अलावा घरेलू मोर्चे पर भी चुनौतियां कम नहीं हैं. कप्तान के रूप में भारतीय टीम को आगे बढ़ाने के लिए गांगुली (Sourav Ganguly) को लगातार पांच साल मिले थे लेकिन इस बार उनके पास कुछ महीनों का ही समय होगा क्योंकि उन्हें अगले साल अनिवार्य ब्रेक लेना होगा. गांगुली ने खुद स्वीकार किया है कि बोर्ड में ‘आपातकाल जैसी स्थिति’ है लेकिन इस दिग्गज को पता है कि इस स्थिति से कैसे निपटना है क्योंकि खिलाड़ी के रूप में अपने सफर के दौरान भी वह ऐसी स्थिति का सामना कर चुके हैं.

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First published: October 23, 2019, 2:43 PM IST
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