सौरव गांगुली ने याद किए 'नर्वसनेस' के पुराने दिन, आज की पीढ़ी के क्रिकेटरों को बताया निडर

गांगुली ने मौजूदा पीढ़ी के साहसी खेल की भी प्रशंसा की. (Sourav Ganguly Twitter)

गांगुली ने मौजूदा पीढ़ी के साहसी खेल की भी प्रशंसा की. (Sourav Ganguly Twitter)

सौरव गांगुली का मानना है कि जीवन के विभिन्न पहलुओं से मिला अनुभव ऋषभ पंत और हार्दिक पांड्या जैसे मौजूदा दौर के क्रिकेटरों को निडर बना रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 14, 2021, 2:20 PM IST
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नई दिल्ली. टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई के वर्तमान अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) को भारतीय क्रिकेट का ऑल टाइम ग्रेट कप्तान माना जाता है. गांगुली ने फिक्सिंग कांड के बाद भारतीय टीम की कमान संभाली और इस टीम में आक्रामकता और जीतने का जज्बा पैदा किया. गांगुली ही वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह और युवराज सिंह जैसे क्रिकेटरों को सामने लाने का कारण रहे. पूर्व भारतीय कप्तान ने हाल ही में अपने खेल के दिनों को याद किया कि वे टीम में रहते क्या मिस करते थे. गांगुली ने किसी भी टेस्ट से पहले 7 ओ क्लॉक नर्वसनेस का जिक्र करते हुए कहा कि लाखों फैन्स की उम्मीदों पर खरा उतरना आसान नहीं था.

उन्होंने कहा, ''सुबह उठते ही नर्वसनेस शुरु हो जाती थी, मैं तैयार होता, ट्रेक बॉटम पहनता और टेस्ट के लिए शूज पहनता. मेरे ऊपर अच्छा परफॉर्म करने का दबाव होता. मैं जानता था कि असफल होना मैं सहन नहीं कर सकता. यदि मैं अच्छा परफॉर्म करता तो मैं शाम साढ़े चार बजे तक पूरे देश के लोगों के सामने मैं हीरो बन जाता.'' गांगुली ने यू ट्यूब लाइव शो 'यू द फ्यूचर' पर यह बातें कहीं.

सौरव गांगुली ने कहा, ''मैं वे चुनौतियां और दबाव मिस करकता हूं. हर सुबह मुझे लोगों की उम्मीदों की याद आती है. मुझे लगता है हर व्यक्ति को निजी रूप से यह सीखना चाहिए.'' इसके साथ ही गांगुली ने मौजूदा पीढ़ी के साहसी खेल की भी प्रशंसा की. सौरव गांगुली का मानना है कि जीवन के विभिन्न पहलुओं से मिला अनुभव ऋषभ पंत और हार्दिक पांड्या जैसे मौजूदा दौर के क्रिकेटरों को निडर बना रहा है.

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उन्होंने कहा कि ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आने से पहले ही ‘पूरी तरह तैयार’ दिखे और ऐसा अनुभव के साथ होता है. गांगुली ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि मौजूदा दौर के खिलाड़ियों को अधिक मौके मिल रहे हैं. यह उन्हें निडर बनने में मदद करता है, क्योंकि इससे उन्हें एहसास होता है कि चीजें उनके पास उपलब्ध हैं. अगर वे प्रयास करते हैं और सफल होने के लिए जुझारूपन दिखाते हैं तो वे सफल होंगे. इसलिए वे बेखौफ हैं.’’

गांगुली ने इसके बाद ऋषभ पंत और हार्दिक पंड्या जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देकर समझाया. उन्होंने कहा, ‘‘आप इस वर्तमान भारतीय क्रिकेट टीम को ही देखिये. ऋषभ पंत, हार्दिक पांड्या और कुछ युवा तेज गेंदबाज जो इस स्तर पर आए हैं, वे अंतरराष्ट्रीय मैच में उतरने के साथ ही उसकी चुनौती के लिए तैयार रहते हैं.’’

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बाएं हाथ के इस पूर्व बल्लेबाज ने कहा, ‘‘वे सिर्फ प्रतिभा के मामले में ही नहीं बल्कि मानसिक तौर पर भी तैयार रहते हैं जो काफी जरूरी है.’’देश के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में से एक रहे गांगुली ने कहा कि खिलाड़ी के लिए कई बार ‘नर्वस (परिस्थितियों से परेशान होना)’ होना अच्छा है, क्योंकि इससे वह बेहतर क्रिकेटर बनकर उभरता है. उन्होंने कहा, ‘‘ नर्वसनेस अच्छा है, यह वास्तव में आपको बेहतर बनने और बेहतर खेलने में मदद करता है. इसलिए खेल से पहले नर्वसनेस को स्वीकार करें और उसका सकारात्मक उपयोग कर अपने प्रदर्शन में सुधार करने पर ध्यान दे.’’

(भाषा के इनपुट के साथ)
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