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टेस्ट क्रिकेट में रन बनाने वालों को लोग हमेशा याद रखेंगे: सौरव गांगुली

सौरव गांगुली ने 20 जून 1996 को इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में टेस्ट डेब्यू किया था. उन्होंने पहले टेस्ट में ही 131 रन की पारी खेली थी. (Sourav Ganguly Instagram)

सौरव गांगुली ने 20 जून 1996 को इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में टेस्ट डेब्यू किया था. उन्होंने पहले टेस्ट में ही 131 रन की पारी खेली थी. (Sourav Ganguly Instagram)

अपने 16 साल के करियर में सौरव गांगुली ने सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के बराबर अपना बनाया और ये चारों खिलाड़ी भारतीय किकेट के 'फैब फोर' बने.

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    नई दिल्ली. सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) निस्संदेह उन बेहतरीन क्रिकेटरों में से एक हैं, जिन्होंने क्रिकेट के खेल की शोभा बढ़ाई है और भारत को विश्व क्रिकेट में एक नई ऊंचाई दी है. बाएं हाथ के ये बल्लेबाज अपने खेल में माहिर थे, जबकि उनके शानदार नेतृत्व ने देश को खेल की दुनिया में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. 1996 में प्रतिष्ठित लॉर्ड्स स्टेडियम (Lords Cricket Ground) में डेब्यू करने के बाद सौरव गांगुली ने सनसनीखेज शतक के साथ अपने आने का ऐलान किया. देश का प्रतिनिधित्व करते हुए बंगाल के इस गौरव ने भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी का कार्यभार संभाला. जब भारतीय क्रिकेट मैच फिक्सिंग की वजह से डूबा हुआ था, उस वक्त गांगुली ने टीम को संभाला और नई पहचान दिलाई.

    अपने 16 साल के करियर में सौरव गांगुली ने सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के बराबर अपना बनाया और ये चारों खिलाड़ी भारतीय किकेट के 'फैब फोर' बने. अपने क्रिकेट के दिनों के बाद, वह कई प्रशासनिक भूमिकाओं में समान रूप से सफल रहे हैं. मौजूदा बीसीसीआई अध्यक्ष ने हाल ही में अपने टेस्ट डेब्यू की 25वीं वर्षगांठ मनाई और अपनी यात्रा को याद किया. 48 साल के गांगुली ने स्पोर्टस्टार को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ''बचपन में जब हमने क्रिकेट खेलना शुरू किया था, टेस्ट क्रिकेट अल्टीमेट क्रिकेट प्रारूप था और मुझे लगता है कि यह अभी भी अल्टीमेट प्रारूप है. और इसीलिए इसे टेस्ट क्रिकेट कहा जाता है.''

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    उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि अगर कोई खिलाड़ी सफल होना चाहता है और खेल पर अपनी छाप छोड़ता है, तो टेस्ट क्रिकेट सबसे बड़ा मंच है, जिसके जरिये हर कोई वह मुकाम प्राप्त कर सकता है. लोग उन खिलाड़ियों को हमेशा याद रखेंगे, जो अच्छा खेलते हैं और टेस्ट मैचों में रन बनाते हैं.'' एक भारतीय खिलाड़ी के रूप में अपनी यात्रा पर बात करते हुए गांगुली ने आगे कहा, ''पूरी यात्रा, 1996 में पदार्पण करते हुए, लॉर्ड्स में शतक बनाना. फिर कुछ सालों में भारत की कप्तानी करना, एक टीम बनाना.''

    सौरव गांगुली ने कहा, ''फिर कप्तानी किसी और को सौंपना और फिर भी यात्रा का हिस्सा बना रहना. मैच जीतना और नेशनल टीम को बढ़ते हुए देखना, पूरी दुनिया में एक ताकत बनकर उभरना...'' गांगुली ने आगे कहा कि वह अपने खेल के दिनों के बाद एक सफल प्रशासनिक भूमिका निभाने में सक्षम होने के लिए खुद को भाग्यशाली मानते हैं.
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    उन्होंने कहा, ''और फिर प्रशासनिक भूमिका में रहकर खेल को बदलने की कोशिश कर रहे हैं. मैं बहुत भाग्यशाली महसूस करता हूं कि बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में मेरे कार्यकाल के दौरान भारत ऑस्ट्रेलिया में 2-1 से जीता. यह शानदार सीरीज जीत रही. यह एक शानदार यात्रा रही है और एक खिलाड़ी के रूप में, एक क्रिकेटर के रूप में, आप इससे बेहतर कुछ भी उम्मीद नहीं कर सकते हैं.''

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