सनथ जयसूर्या: एक ऐसा गेंदबाज, जो रातों-रात बन गया ओपनर और फिर वनडे क्रिकेट में हुआ 'धमाका'

टरनेशनल करियर में 42 शतक सहित कुल 21 हजार 32 रन बनाने वाले सनथ जयसूर्या इस दौरान 616 बार आउट हुए.

टरनेशनल करियर में 42 शतक सहित कुल 21 हजार 32 रन बनाने वाले सनथ जयसूर्या इस दौरान 616 बार आउट हुए.

श्रीलंका के पूर्व कप्तान और विस्फोटक ओपनर सनथ जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) जब श्रीलंकाई टीम में आए थे तो उन्हें मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी के लिए उतारा जाता था लेकिन फिर एक कदम ने उनकी जिंदगी बदल दी.

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नई दिल्ली. 'मैंने डॉन ब्रैंडमैन को बल्लेबाजी करते नहीं देखा लेकिन सनथ जयसूर्या को देखा है, अपने पूरे करियर में मैंने इससे अच्छा बल्लेबाज नहीं देखा है.' ये अल्फाज उस महान क्रिकेटर के मुंह से निकले हैं जिसने खुद इंटरनेशनल क्रिकेट में 100 शतक ठोके हैं. हम बात कर रहे हैं सचिन तेंदुलकर की जिन्होंने ये बयान श्रीलंका के पूर्व ओपनर सनथ जयसूर्या के लिए दिया था. सिर्फ सचिन ही नहीं ऑस्ट्रेलिया के महानतम गेंदबाजों में से एक ग्लेन मैक्ग्रा भी इस बल्लेबाज को सबसे खतरनाक बल्लेबाज बताते रहे हैं.

श्रीलंका के दिग्गज खिलाड़ी सनथ जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) ने 110 टेस्ट में 6973 रन बनाए, जिसमें 14 शतक शामिल थे वनडे में उनके बल्ले से 13430 रन निकले, जिसमें उन्होंने 28 शतक ठोके. ये आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि सनथ जयसूर्या किस कद के बल्लेबाज थे. वैसे आपको ये जानकर बेहद हैरानी होगी कि सनथ जयसूर्या को बतौर बल्लेबाज टीम में शामिल जरूर किया गया था लेकिन उनके जैसे प्रतिभाशाली बल्लेबाज को 7वें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतारा जाता था. उन्हें एक कामचलाऊ बल्लेबाज और गेंदबाज के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था. लेकिन फिर आया साल 1996, जब रातों-रात जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) ही नहीं पूरे वर्ल्ड क्रिकेट की किस्मत बदल गई. आइए आपको बताते हैं जयसूर्या के करियर का वो टर्निंग प्वाइंट जिसने उन्हें गेंदबाज से महान ओपनर बना दिया.

श्रीलंकाई टीम में जयसूर्या की एंट्री

सनथ जयसूर्या ने सबसे पहले 1988 में खेले गए अंडर 19 वर्ल्ड कप में श्रीलंकाई टीम का प्रतिनिधित्व किया और उसके बाद उन्हें पाकिस्तान दौरे के लिए श्रीलंका की बी टीम में चुना गया. पाकिस्तान जाकर उन्होंने दो धमाकेदार दोहरे शतक ठोक दिये और जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) को श्रीलंकाई टीम में खेलने का मौका मिला. जयसूर्या ने 1989 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डेब्यू किया. वो पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और महज 3 रन बनाकर आउट हो गए. जयसूर्या का करियर की शुरुआत बेहद खराब रही और ये सिलसिला 4 सालों तक चले. जयसूर्या ने 33 पारियों तक एक भी अर्धशतक नहीं लगाया. 28 अक्टूबर 1993 तक उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर महज 34 रन था. इसके बाद शारजाह में खेली जा रही चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान के खिलाफ उन्हें नंबर 3 पर बल्लेबाजी के लिए उतारा गया और इस बल्लेबाज ने अपने करियर का पहला अर्धशतक ठोक दिया. जयसूर्या ने 58 रन बनाए और अगले मैच में भी उन्होंने अर्धशतकीय पारी खेली. इसके बाद फिर 14 पारियों तक वो अर्धशतक नहीं लगा सके.
कैसे ओपनर बने

साल 1994 में श्रीलंकाई टीम ने जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) को बतौर ओपनर बल्लेबाजी के लिए उतारा. पाकिस्तान की टीम श्रीलंका दौरे पर आई थी और तीन वनडे मैचों की सीरीज के तीनों ही मैचों में जयसूर्या ने अर्धशतक ठोक दिये. अभी भी जयसूर्या श्रीलंका की टीम के स्थायी नहीं थे, उनका बल्लेबाजी क्रम बदलता रहता था. इसके बाद 1994 में 8 दिसंबर को जयसूर्या ने अपने बल्ले से पहला बड़ा धमाका किया. उन्होंने साउथ अफ्रीकी सरजमीं पर न्यूजीलैंड के खिलाफ बतौर ओपनर 140 रन बना डाले. जयसूर्या ने डेब्यू के 5 साल के बाद अपने करियर का पहला वनडे शतक लगाया.

1996 वर्ल्ड कप में जयसूर्या का करियर बदला



साल 1996 वर्ल्ड कप भारत-पाकिस्तान और श्रीलंकाई टीमें मिलकर आयोजित कर रही थीं. पाकिस्तान और भारत को जीत का दावेदार माना जा रहा था. श्रीलंकाई टीम उस वक्त बेहद कमजोर थी, उसका जीत प्रतिशत महज 29 फीसदी था. अब श्रीलंकाई खेमे ने वर्ल्ड कप को लेकर रणनीति बनानी शुरू हुई. 1996 में श्रीलंका के कोच डेव व्हॉटमोर थे और पूरी श्रीलंकाई टीम इस बात की चर्चा कर रही थी कि कैसे ज्यादा से ज्यादा रन बनाए जाएं. उस दौर में अमूमन टीमें पहले 40 ओवरों में आराम से खेलती थीं और आखिरी 10 ओवर में ताबड़तोड़ रन बनाती थी लेकिन व्हाटमोर और कप्तान रणतुंगा ने पहले 15 ओवर में तेजी से रन बनाने की रणनीति बनाई और उसकी जिम्मेदारी दी गई जयसूर्या और रोमेश कालूवितरणा को. सनथ जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) ने एक इंटरव्यू में बताया था, 'टीम मैनेजमेंट ने पाया कि मैं नंबर 7 के लायक नहीं हूं क्योंकि वहां मेरा सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. फिर उन्हें लगा कि अगर मुझे ओपनिंग पर उतारा जाए और मैं तेजी से रन बनाऊं तो आने वाले बल्लेबाजों पर ज्यादा दबाव नहीं रहेगा.'

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बदल गया वनडे क्रिकेट

श्रीलंकाई टीम ने वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में सनथ जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) को बतौर ओपनर खिलाने का जुआ खेला और यकीन मानिए उसके बाद पूरी दुनिया दंग रह गई. जयसूर्या ने 1996 वर्ल्ड कप में श्रीलंकाई टीम को हर मैच में तूफानी शुरुआत दिलाई. पहले 15 ओवर में जयसूर्या और कालूवितरणा मिलकर बल्लेबाजों पर टूट पड़ते थे और विरोधी टीमें बैकफुट पर आ जाती थी. नतीजा ये हुआ कि श्रीलंकाई टीम वर्ल्ड कप 1996 में एक भी मैच नहीं हारी और आखिर में उसने खिताब भी जीता. जयसूर्या ने साल 1996 वर्ल्ड कप में 221 रन बनाए. उन्होंने 6 विकेट भी लिए साथ ही उन्होंने 7 कैच भी लपके और उन्हें टूर्नामेंट का सबसे कीमती खिलाड़ी चुना गया. जिस श्रीलंकाई टीम को 1996 वर्ल्ड कप का दावेदार भी नहीं माना जा रहा था उसने जयसूर्या को ओपनर बनाकर पूरा खेल ही पलट दिया. यही नहीं जयसूर्या की पावरप्ले में क्रांतिकारी बल्लेबाजी ने पूरे वर्ल्ड क्रिकेट की सोच बदल दी. इसके बाद सभी टीमें पहले 15 ओवर में आक्रमण की रणनीति अपनाने लगी.

जयसूर्या (Sanath Jayasuriya ने ओपनर बनने के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. जयसूर्या ने बतौर ओपनर वनडे क्रिकेट में 383 मैच खेले जिसमें उन्होंने 12 हजार से भी ज्यादा रन बनाए. उन्होंने अपने सभी 28 शतक इसी पोजिशन पर लगाए. वहीं नंबर 7 पर उनका बल्लेबाजी औसत महज 16 का रहा, नंबर 6 पर वो 13 की औसत से रन बना सके. नंबर 5 पर तो उनका औसत 4.71 रहा. यहां तक कि नंबर 4 पर भी वो 14.66 के औसत से रन बना सके. इन आंकड़ों से साफ है कि जयसूर्या ओपनिंग के लिए ही बने थे और अपने करियर में उन्होंने इसे साबित भी किया.

विवाद: ग्लेन मैक्ग्रा ने इस बल्लेबाज को दी गला काटने की धमकी, मैदान पर...
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