जिस राजिंदर गोयल से घबराते थे गावस्कर, वो एक कसक के साथ दुनिया छोड़ गए

जिस राजिंदर गोयल से घबराते थे गावस्कर, वो एक कसक के साथ दुनिया छोड़ गए
राजिंदर गोयल के नाम रणजी ट्रॉफी में सबसे अधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड है.

77 साल के राजिंदर गोयल (Rajinder Goel) की रविवार को मौत हो गई. उनके नाम रणजी ट्रॉफी में सबसे अधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड है. सुनील गावस्कर ने उन्हें अपनी किताब में जगह दी है. हालांकि, गोयल को नेशनल टीम में कभी जगह नहीं मिली.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 22, 2020, 10:22 AM IST
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नई दिल्ली. सुनील गावस्कर. यह सिर्फ एक नाम नहीं, श्रेष्ठता का पैमाना है. बेहतरीन क्रिकेटर, खासकर बल्लेबाज होने का. 1970-80 के दशक में अगर किसी बल्लेबाज को आउट करना सबसे मुश्किल था, तो वे सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) ही थे. लेकिन उसी दौर में एक गेंदबाज ऐसा भी था, जिसके सामने गावस्कर असहज हो जाते थे. वे उस गेंदबाज को पूरे यकीन के साथ नहीं खेल पाते थे. नाम था राजिंदर गोयल (Rajinder Goel). विडंबना देखिए, इस बाएं हाथ के स्पिनर को नेशनल टीम में कभी जगह नहीं मिली. 77 साल के राजिंदर गोयल की रविवार (21 जून) को मौत हो गई.

निदा फाजली का एक शेर है, ‘कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता...’ राजिंदर गोयल पर यह बात बखूबी फिट बैठती है. घरेलू क्रिकेट के इस महारथी ने रणजी ट्रॉफी टूर्नामेंट (Ranji Trophy) में सबसे अधिक 640 विकेट लिए. वे 44 साल तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते रहे. सुनील गावस्कर ने अपनी किताब ‘आइडल्स’ में जिन खिलाड़ियों को जगह दी थी, उसमें राजिंदर गोयल भी शामिल थे.

पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने अपनी किताब में लिखा है, ‘मैंने अपने घरेलू क्रिकेट करियर में जिन गेंदबाजों का सामना किया, उनमें गोयल (राजिंदर) का नाम सबसे ऊपर आता है. मैं गोयल को फेस करते वक्त कभी सहज नहीं रहा.’ इसे वक्त का तकाजा ही कहा जा सकता है कि ऐसे राजिंदर गोयल को भारत की राष्ट्रीय टीम में कभी जगह नहीं मिली.



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बीसीसीआई ने कुछ साल पहले भारतीय क्रिकेट में योगदान के लिए गोयल को सीके नायडु लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा था. वक्त का खेल देखिए कि गोयल यह अवार्ड भी उसी शख्स ने गया, जिनके उम्दा प्रदर्शन के कारण ही उन्हें भारतीय टीम में कभी जगह नहीं मिली. वो शख्स कोई और नहीं, भारत के कप्तान रहे बिशन सिंह बेदी (Bishan Singh Bedi) थे. बेदी उस दौर में भारत ही नहीं, दुनिया के खतरनाक स्पिनर माने जाते थे. बेदी अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर टीम में जड़ें जमा चुके थे. ऐसे में उनकी जगह बाएं हाथ के किसी और स्पिनर को टीम में जगह मिलनी मुश्किल थी और मिली भी नहीं. शायद इसी कारण राजिंदर गोयल ने एक बार कहा था कि वे गलत समय में पैदा हो गए.

राजिंदर गोयल को 1974-75 में वेस्टइंडीज के खिलाफ बेंगलुरु टेस्ट में खेलने के लिए बुलाया गया था. तब वे शानदार फॉर्म में थे और बिशन सिंह बेदी को अनुशासनात्मक कारणों से टीम से बाहर कर दिया गया था. गोयल की किस्मत यहां भी दगा दे गई. मैच से एक दिन पहले शाम को जब टीम का ऐलान किया गया तो प्लेइंग इलेवन में उनका नाम नहीं था. राजिंदर गोयल एक कसक के साथ फिर बाहर रह गए. शायद यह कसक ताउम्र उनके साथ रही हो. अदविदा राजिंदर गोयल.
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