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IPL 2021: मैच फिनिशर का न होना SRH की सबसे बड़ी कमजोरी, प्लेइंग-11 में 4 विदेशियों को लेकर भी फंसेगा पेंच

इंग्लैंड के बल्लेबाज जॉनी बेयरस्टो(Johny Bairstow) इस सीजन में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए कप्तान डेविड वॉर्नर (David Warner) के साथ पारी की शुरुआत कर सकते हैं. (Sunrisers Hyderabad Twitter)

इस आईपीएल में मुंबई इंडियंस(Mumbai Indians) के बाद सनराइजर्स हैदराबाद (Surisers Hyderabad) सबसे संतुलित टीम नजर आ रही है. टीम के पास अच्छे गेंदबाजों के साथ बल्लेबाज हैं. लेकिन मैच फिनिशर का न होना उसके खिताब जीतने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है. अगर टीम इस परेशानी से निकल गई तो दूसरी बार खिताब जीत सकती है.

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    नई दिल्ली. इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2021) के इस सीजन में मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) के बाद अगर कोई टीम संतुलित नजर आ रही है, तो वो सनराइजर्स हैदराबाद है. इस टीम के पास अच्छे गेंदबाज और बल्लेबाज हैं. पिछले पांच सीजन टीम के प्रदर्शन से ये साबित भी हुआ है. 2016 में डेविड वॉर्नर (David Warner) की कप्तानी में पहला और इकलौता आईपीएल जीतने के बाद से ही टीम हर साल प्लेऑफ खेली है. इस दौरान 2018 में भी टीम फाइनल खेली थी. लेकिन तब उसे महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) की कप्तानी वाली चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) ने 8 विकेट से शिकस्त दी थी. इन सालों में टीम की जो सबसे बड़ी कमजोरी उभरकर सामने आई है. वो मैच फिनिशर का न होना है. यही कमी शायद टीम और आईपीएल के खिताब में आड़े आ रही है.

    1. इस सीजन में भी टीम को मैच फिनिशर के न होने का नुकसान उठाना पड़ सकता है. इस टीम के पास दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) और मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) जैसा संतुलन तो है. लेकिन उनकी तरह हार्दिक पंड्या, कायरान पोलार्ड, ऋषभ पंत और शिमरॉन हेटमायर जैसे फिनिशर नहीं हैं. तेज शुरुआत दिलाने के लिए हैदराबाद के पास वॉर्नर, बेयरस्टो जैसे ओपनर हैं. लेकिन आखिरी के ओवर में फायदा उठाने वाले बल्लेबाज नहीं हैं. फिनिशर की कमी की टीम सबसे कमजोर कड़ी है. इसी वजह से कई बार अच्छी शुरुआत के बावजूद टीम बड़ा लक्ष्य नहीं खड़ कर पाती है या टारगेट का पीछा करने में चूक जाती है. इस सीज़न में टीम मैच फिनिशर की कमी को पूरा करने के लिए ही केदार जाधव को 2 करोड़ की बेस प्राइस में खरीदा था. उन्हें धोनी की सीएसके ने नीलामी से पहले रिलीज किया था.


    उनके आने के बाद टीम का मध्यक्रम थोड़ी मजबूत हो सकता है. क्योंकि वो तेजी से रन बनाने के साथ ऑफ स्पिन गेंदबाजी भी करते हैं. जो टीम कॉम्बिनेशन बनाने में मददगार हो सकता है. हालांकि, सीएसके के लिए उनका पिछला सीजन अच्छा नहीं रहा था. उन्होंने 8 मैच में सिर्फ 62 रन बनाए थे. इसी वजह से टीम का प्रदर्शन भी खराब रहा और आईपीएल में पहली बार चेन्नई प्लेऑफ तक नहीं पहुंचीं. मध्य क्रम में केदार, मनीष पांडे और विजय शंकर के साथ मैच फिनिशर की भूमिका निभा सकते हैं. लेकिन अभ्यास की कमी उनकी राह में रोड़ा साबित हो सकती है.

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    प्लेइंग-11 तय करने में भी हैदराबाद को करनी होगी मशक्कत
    सनराइजर्स हैदराबाद को मैच फिनिशर न होने के अलावा भी एक और परेशानी से जूझना पड़ सकता है. वो है प्लेइंग-11 तय करना और उसमें भी चार विदेशी खिलाड़ियों का कॉम्बिनेशन बनाना. कप्तान होने के नाते ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर प्लेइंग-11 का हिस्सा होंगे. वो ओपनिंग करेंगे. उनके अलावा दूसरे विदेशी खिलाड़ी के रूप में अफगानिस्तान के लेग स्पिनर राशिद खान का खेलना भी तय है. अब बाकी बचे दो स्लॉट के लिए मारामारी है. अगर वॉर्नर के ओपनिंग जोड़ीदार के रूप में इंग्लैंड के जॉनी बेयरस्टो खेलते हैं तो फिर प्लेइंग-11 में एक विदेशी खिलाड़ी की जगह बचेगी. क्योंकि, वॉर्नर और राशिद तो टीम में रहेंगे. हालांकि, वॉर्नर के साथ ओपनिंग के लिए विकेटकीपर रिद्धिमान साहा भी उतर सकते हैं. उन्होंने पिछले सीजन में ओपनिंग करते हुए अच्छी बल्लेबाजी की थी. लेकिन वो सिर्फ 4 मैच ही खेले थे.

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    चार विदेशी खिलाड़ी चुनना सबसे बड़ी परेशानी
    चौथे खिलाड़ी को लेकर सनराइजर्स का टीम मैनेजमेंट कश्मकश की स्थिति में होगा. क्योंकि अगर न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियम्सन को चौथे विदेशी के रूप में प्लेइंग-11 का हिस्सा बनाया जाता है, तो उस सूरत में वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज जेसन होल्डर को बाहर रखना पड़ेगा. होल्डर सिर्फ तेज गेंदबाजी ही नहीं करते, बल्कि लंबे शॉट्स लगाना भी उनकी बड़ी ताकत है. उन्होंने पिछले आईपीएल में 7 मैच में 14 विकेट लेने के साथ 66 रन भी बनाए थे. हालांकि, होल्डर की भरपाई के लिए टीम के पास टी नटराजन, सिद्धार्थ कौल जैसे भारतीय तेज गेंदबाज हैं. वहीं, अगर ऑलराउंडर की बात करें तो विजय शंकर भी इस रोल में फिट हो सकते हैं.

    पिछले आईपीएल में भी सनराइजर्स ने प्लेइंग-11 में बार-बार बदलाव किए
    पिछले सीजन में भी सनराइजर्स हैदराबाद को प्लेइंग-11 तय करने में काफी दिक्कत हुई थी. एलिमिनेटर के अलावा दूसरे क्वालिफायर में टीम अलग-अलग प्लेइंग-11 के साथ उतरी थी. यही स्थिति ग्रुप मैच में भी थी. खासतौर पर ओपनिंग और मिडिल ऑर्डर में बार-बार बदलाव हुए थे. इस बार भी टीम के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है. अगर इससे पार पाने में सनराइजर्स सफल हो जाती है, तो फिर उसे आईपीएल जीतने से कोई नहीं रोक सकता.