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एमएस धोनी का किरदार तो निभाया लेकिन उन्हें समझ नहीं सके सुशांत सिंह राजपूत!

काश धोनी से लड़ना सीख लेते सुशांत!

काश धोनी से लड़ना सीख लेते सुशांत!

रुपहले पर्दे पर धोनी (MS Dhoni) का किरदार निभाने वाले सुशांत राजपूत ने डिप्रेशन के चलते खुदकुशी कर ली थी, फिल्मी सितारों से लेकर दिग्गज खिलाड़ी भी उनके इस कदम से हैरान रह गए

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नई दिल्ली. एमएस धोनी...द अनटोल्ड स्टोरी. भारत के सबसे महान कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) पर बनी ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खूब चली थी. इस फिल्म में धोनी की वो कहानी थी जिससे दुनिया वाकिफ नहीं थी. बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने धोनी का किरदार निभाया और उसे रुपहले पर्दे पर कुछ इस तरह पेश किया कि एक पल को उनमें और धोनी में अंतर करना मुश्किल हो गया. इस फिल्म के लिए सुशांत सिंह राजपूत ने बहुत मेहनत की.

धोनी के हाव-भाव सीखे. उनकी बल्लेबाजी का स्टाइल सीखा. मैदान में एंट्री हो या, क्रीज पर खड़े होने का स्टाइल. यहां तक कि उनके बोलने का अंदाज भी सुशांत सिंह राजपूत ने सीखा. सुशांत सिंह राजपूत ने धोनी का किरदार नहीं निभाया बल्कि उस किरदार को जीया. लेकिन सही मायनों में देखें तो धोनी को ठीक से समझ नहीं सके. धोनी सिर्फ एक बेहतरीन क्रिकेटर नहीं, एक गजब के कप्तान नहीं बल्कि वो इससे कई आगे हैं. धोनी एक ऐसा हौंसला हैं जो मुश्किलों से नहीं घबराता. धोनी एक ऐसा विश्वास हैं, जिसे दुनिया का कोई भी इंसान नहीं तोड़ सकता. अगर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) धोनी को ठीक से समझते तो शायद वो कभी 14 जून को मुंबई में अपने घर पर खुदकुशी ना करते.

सुशांत की मौत के बाद सोशल मीडिया पर नेपोटिज्म की आग फैली. आरोप लगे कि उन्हें बॉलीवुड की बड़ी शख्सियतों ने अपना नहीं समझा, उन्हें अलग-थलग रखा गया. लेकिन ऐसी मुसीबतों का सामना तो धोनी ने भी अपने करियर में खूब किया. आइए आपको बताते हैं कि कैसे आग के दरिया में डूबकर धोनी भारत के इतने बड़े खिलाड़ी बने.

गरीब परिवार, पढ़ाई में भी अच्छे नहीं
धोनी (MS Dhoni) की जिंदगी का पहला पड़ाव ही मुश्किलों से भरा था. धोनी के पिता काम की तलाश में जब रांची आए तो वो एक दिहाड़ी मजदूर थे. इसके बाद उन्हें MECON में पंप ऑपरेटर का काम मिला. धोनी के घर में हमेशा आर्थिक तंगी रहती थी. पिता चाहते थे कि धोनी पढ़-लिखकर एक बड़ा अफसर बने लेकिन वो पढ़ाई-लिखाई में अच्छे नहीं थे. उनका ध्यान क्रिकेट में रहता था.

अंडर 19 वर्ल्ड कप में नहीं हुआ सेलेक्शन
साल 2000 में अंडर 19 वर्ल्ड कप टीम के लिए सेलेक्शन से पहले सीके नायडू ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी था. धोनी इस टूर्नामेंट में कुछ खास नहीं कर सके और वो औसत के मामले में 23वें नंबर पर रहे. इस वजह से उनका सेलेक्शन नहीं हो सका और हरियाणा के अजय रात्रा को अंडर 19 टीम में जगह मिल गई. अजय रात्रा की बल्लेबाजी औसत धोनी से भी खराब थी लेकिन उनकी विकेटकीपिंग धोनी से अच्छी मानी गई और नतीजा धोनी को नाकामी मिली. धोनी नाकाम जरूर हुए लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.



डेब्यू में 0 पर आउट
23 दिसंबर 2004, धोनी को भारत की ओर से पहला मैच खेलने का मौका मिला. मुकाबला चटगांव में बांग्लादेश के विरुद्ध था. ऐसे में सभी को उम्मीदें थी कि धोनी अपना जलवा दिखाएंगे. धोनी 7वें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और पहली ही गेंद पर रन आउट हो गए. आप सोचिए कोई खिलाड़ी अगर अपने पहली मैच में 0 पर आउट हो जाए तो उसके जहन में क्या चल रहा होगा. जाहिर सी बात है कि खिलाड़ी टेंशन में आ जाएगा. यही नहीं धोनी अगले तीन मैचों में भी कुल 22 रन ही बना सके. पहले चार मैचों की नाकामी के बावजूद धोनी घबराए नहीं बल्कि वो और मजबूत हुए. पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में धोनी ने विशाखापट्टनम के मैदान पर 148 रनों की पारी खेली और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

मीडिया में धोनी गलत वजहों से छाए
एमएस धोनी (MS Dhoni) जब तीनों फॉर्मेट के कप्तान बने तो उस वक्त टीम इंडिया में आधा दर्जन से ज्यादा सीनियर खिलाड़ी खेल रहे थे. लेकिन फिर मीडिया में ऐसा विवाद सामने आया कि सभी हैरान रह गए. खबरें आई कि धोनी सीनियर खिलाड़ियों को टीम से बाहर निकालना चाहते हैं. वीरेंद्र सहवाग और धोनी के बीच तल्खियों की खबर तो अखबारों की सुर्खियां बनी. लेकिन धोनी पर मीडिया का कोई प्रेशर नहीं दिखा, वो अपने अंदाज में ही काम करते दिखे. धोनी ने वर्ल्ड कप जीता और साल 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी भी जीती.

आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग केस
साल 2013 में इंडियन प्रीमियर लीग में स्पॉट फिक्सिंग विवाद ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया. टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी एस श्रीसंत भी उसमें फंसे और उन्हें बैन कर दिया गया. चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स टीम पर दो सालों का बैन लग गया. चेन्नई सुपरकिंग्स टीम के कप्तान धोनी थे और उन पर भी मीडिया में सवाल खड़े किये गये. लेकिन धोनी इन सब चीजों से दबाव में नहीं आए, वो हमेशा की तरह अपना काम करते रहे.

लगातार 4 टेस्ट सीरीज हारे धोनी
महेंद्र सिंह धोनी ने भले ही भारत को टी20 वर्ल्ड कप जिताया, वनडे वर्ल्ड कप जिताया और टेस्ट में नंबर 1 बनाया लेकिन साल 2013-14 सीजन में वो विदेश में लगातार चार सीरीज हार गए. भारत ने साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में सीरीज गंवाई. एमएस धोनी को मीडिया ने खूब घेरा. धोनी ने टेस्ट कप्तानी भी छोड़ी और साथ ही टेस्ट क्रिकेट से संन्यास भी ले लिया. धोनी ने ये फैसला मीडिया के दबाव में नहीं किया बल्कि उन्होंने देखा कि विराट कोहली के तौर पर भारत का नया कप्तान तैयार हो गया है, इसलिए उन्होंने एक फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ दी.

साल 2016 में संन्यास की मांग हुई
साल 2016 में भारतीय टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल हार गई, जिसके बाद एक विदेशी पत्रकार ने धोनी से पूछा कि क्या अब आप संन्यास के बारे में सोचेंगे. इसके बाद धोनी ने उस पत्रकार को अपने पास बुलाकर अपनी फिटनेस पर सवाल पूछे और जवाब में उस पत्रकार ने धोनी को बेहतरीन खिलाड़ी ही बताया. धोनी संन्यास के सवालों से कभी घबराए नहीं, वो हमेशा उनका जवाब देने के लिए तैयार रहे. अब 2019 वर्ल्ड कप के बाद से धोनी मैदान में नहीं उतरे हैं. आज भी यही सवाल पूछा जा रहा है कि क्या धोनी संन्यास लेने वाले हैं. कई क्रिकेट एक्सपर्ट्स ने उन्हें बीता हुआ कल तक बता दिया है. लेकिन यकीन मानिए धोनी आज भी पहले की तरह की कूल हैं. उन्हें फर्क नहीं पड़ता कौन उनके बारे में क्या सोच रहा है. धोनी आज भी एक प्रक्रिया को फॉलो करते हैं, वो नतीजों की चिंता नहीं करते. वो कभी दबाव में नहीं आते. यही धोनी की असली ताकत है. काश ये सब चीजें सुशांत सिंह राजपूत समझ पाते और जिंदगी में बन रहे दबावों का धोनी स्टाइल में सामना करते.

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