IND vs END: जाने कहां खो गए भारत के लेग स्पिनर? 5 साल से नहीं खेला एक भी टेस्ट

india vs england: भारत ने 2010 के बाद 100 टेस्ट मैच खेले हैं. (फोटो-AP)

india vs england: भारत ने 2010 के बाद 100 टेस्ट मैच खेले हैं. (फोटो-AP)

India vs England: भारत ने 2010 के बाद 100 टेस्ट मैच खेले हैं. इनमें से सिर्फ 14 मैचों में लेग स्पिनर खेले हैं. इसी तरह 2010 के बाद भारत के 33 खिलाड़ियों ने टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया है. इनमें सिर्फ एक लेग स्पिनर (कर्ण शर्मा) है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 11, 2021, 8:07 PM IST
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नई दिल्ली. क्रिकेट में जब भी खतरनाक गेंदबाजी की बात आती है तो तेज गेंदबाज याद आते हैं. लेकिन बात विकेट लेने की हो तो स्पिनर आगे निकल जाते हैं. टेस्ट क्रिकेट में सबसे अधिक विकेट लेने वालों की लिस्ट में पहले तीन नंबर पर स्पिनर हैं. इनमें भी दो लेग स्पिनर हैं. भारत के लेग स्पिनर अनिल कुंबले (619 विकेट) भी इस लिस्ट में हैं. लेकिन पिछले 10-12 साल में भारत की टेस्ट टीम से लेग स्पिनर कहीं गायब से हो गए हैं. भारत जब चेन्नई में इंग्लैंड से पहला टेस्ट मैच हार गया तो पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा समेत कई क्रिकेटप्रेमियों ने लेग स्पिनर की कमी महसूस की.

आकाश चोपड़ा ने पहले टेस्ट मैच के बाद सलाह दी कि भारत को अगले मैच में लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल को प्लेइंग इलेवन में शामिल करना चाहिए, जिससे टीम के बॉलिंग अटैक में विभिन्नता आ सके. सवाल उठता है कि आखिर यह विचार टीम प्रबंधन या चयनकर्ताओं को क्यों नहीं आया? क्या वे अपने टीम अटैक में वेरायटी नहीं चाहते? अगर चाहते हैं तो आखिर टेस्ट टीम से लेग स्पिनर गायब क्यों हैं. क्रिकेटप्रेमी जानते हैं कि भारत की ओर से लेग स्पिनर अमित मिश्रा ने 2016 में टेस्ट मैच खेला था. उनके बाद से आज तक कोई भी लेग स्पिनर भारत के लिए टेस्ट मैच नहीं खेला है.

जिस देश का सबसे कामयाब गेंदबाज ही लेग स्पिनर (अनिल कुंबले) हो, वहां की टीम में इस विधा का यूं गायब होते जाना परेशान करने वाला है. ऐसा भी नहीं है कि यह कोई वर्ल्ड क्रिकेट का ट्रेंड है. हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में ही खतरनाक लेग स्पिनर यासिर शाह हैं, जो अपनी फिरकी से जब-तब अपनी टीम को जीत दिलाते रहते हैं. अफगानिस्तान के राशिद खान को भूलने की गलती कौन कर सकता है. हालांकि, कई और टीमों की हालत भारत जैसी है. इन देशों की वनडे और टीमों में तो लेग स्पिनर खूब मिलते हैं, लेकिन टेस्ट में जैसे इन्हें फेल मान लिया गया हो. याद करिए युजवेंद चहल, एडम जैम्पा, आदिल राशिद...

वर्ल्ड क्रिकेट की मौजूदा स्थिति कुछ-कुछ 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक के शुरुआत जैसी है. तब पाकिस्तान की टीम में तो अब्दुल कादिर का जादू देखने को मिलता था, लेकिन अन्य टीमों में लेग स्पिनरों को वह तवज्जो नहीं मिलती थी, जो फिंगर स्पिनरों को मिलती थी.

भारत में एक समय बेहद लोकप्रिय पत्रिका ‘क्रिकेट सम्राट’ में लंबा लेख छपा था, जिसका लब्बोलुआब था कि लेग स्पिन विधा में ऑफ स्पिन के मुकाबले विविधता तो है, लेकिन इस पर महारत हासिल करना मुश्किल है और इस कारण लेग स्पिनरों का भविष्य सुनहरा नहीं दिखता. हालांकि, इस लेख के कुछ साल बाद दुनिया में स्पिन के तीन जादूगरों की तूती बोलने लगी और इनमें लेग स्पिनर शेन वॉर्न और अनिल कुंबले शामिल थे.

इस समय भी पाकिस्तान के यासिर शाह को छोड़ दें तो कोई और लेग स्पिनर किसी टेस्ट टीम में दमदारी के साथ नजर नहीं आता. हालांकि, वनडे और टी20 टीम में इनकी बड़ी इज्ज्त है. ऑस्ट्रेलिया के एडम जैम्पा को ही लीजिए. उन्हें भारत के खिलाफ अक्सर तब गेंदबाजी के लिए बुलाया जाता है, जब विराट कोहली बल्लेबाजी के लिए आते हैं. जैसे कोहली लेग स्पिनरों के आसान शिकार हों. इंग्लैंड के आदिल राशिद का भी यही किस्सा है. आईपीएल जैसी टी20 लीग में तो लेग स्पिनर के बिना किसी टीम की कल्पना ही नहीं की जा सकती. आईपीएल की लगभग हर टीम में या तो लेग स्पिनर या फिर चाइनामैन गेंदबाज हैं.

आईपीएल में इस समय 8-10 भारतीय लेग स्पिनर हैं, जिन्हें उनकी टीमों ने रीटेन किया है. इनमें युजवेंद्र चहल, राहुल चाहर, रवि बिश्‍नोई, अमित मिश्रा, श्रेयस गोपाल, राहुल तेवतिया, मयंक मार्कंडेय, कर्ण शर्मा, मुरुगन अश्विन शामिल हैं. ये सभी अपनी-अपनी टीमों के मैचविनर हैं. हालांकि, इनमें से दो-तीन को छोड़ दें तो ज्यादातर लेग स्पिनर अपने राज्यों की प्रथमश्रेणी टीमों में वह अहमियत हासिल नहीं कर पाते, जो टी20 टीम में पाते हैं.




इसकी जायज वजह भी है. जब से दुनिया में टी20 क्रिकेट ने अपने पैर पसारे हैं. तब से लेग स्पिनर अपनी-अपनी टीमों के प्रमुख हथियार बन गए हैं. वे रन बचाने के लिए नहीं जाते, बल्कि विकेट लेने की कोशिश करते हैं. भले ही इस प्रयास में उन्हें कुछ बाउंड्री लग जाएं. इस कोशिश ने उनकी गेंदबाजी शैली को उलट दिया है. अनिल कुंबले ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी कोशिश होती थी कि जो बल्लेबाज ओवर का पहला गेंद खेल रहा है, वही पूरा ओवर खेले. इसके लिए वे ओवर की तकरीबन हर गेंद एक सी फेंकते थे. वे ओवर में ज्यादा से ज्यादा एक प्रयोग करते थे. अब टी20 के जमाने में गेंदबाज तेजी से प्रयोग करते हैं. इस कारण जब टेस्ट मैचों की बात आती है तो वह उतने प्रभावी नहीं रह पाते. खासकर लेग स्पिनर, क्योंकि गेंदबाजी की इस विधा में संभवत: सबसे ज्यादा धैर्य और नियंत्रण की जरूरत होती है.

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आईपीएल में लेग स्पिनरों की भरमार से एक बात तो तय है कि भारत में यह विधा बहुत दमदारी से मौजूद है और फलफूल रही है. अब यह बीसीसीआई के नीति नियंताओं को देखना है कि इन प्रतिभाओं को कैसे पहले रणजी टीमों में इस्तेमाल करें और जब वे परिपक्व हो जाएं तो उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में मौका दें.

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और अंत में: भारत ने 2010 के बाद 100 टेस्ट मैच खेले हैं. इनमें से सिर्फ 14 मैचों में लेग स्पिनर खेले हैं. इन 14 मैचों में 12 अमित मिश्रा ने खेले. पीयूष चावला व कर्ण शर्मा को एक-एक टेस्ट मैच में मौका मिला. इसी तरह 2010 के बाद भारत के 33 खिलाड़ियों ने टेस्ट मैचों में डेब्यू किया है और इनमें सिर्फ एक लेग स्पिनर है. एक और खास बात. भारत के लिए आखिरी बार लेग स्पिनर 2016 में उसी चेन्नई के मैदान पर उतरा था, जहां भारत तीन दिन पहले मैच हारा है और जहां 13 फरवरी से अगला टेस्ट खेलेगा.
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