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Exclusive: टीम इंडिया की इस 'तिकड़ी' के कायल हुए प्रवीन कुमार, बोले-ऐसे तेज गेंदबाज़ कभी नहीं देखे

सभी को ( पूरे इंडिया) पता है कि शुरू में भुवी की स्‍पीड बहुत अधिक नहीं थी-प्रवीन कुमार

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टीम इंडिया के लिए छह टेस्‍ट, 68 वनडे और दस टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने वाले 32 वर्षीय प्रवीन कुमार को 'मेरठ एक्‍सप्रेस' के नाम से भी जाना जाता है. हालांकि क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद वह अब एक नई भूमिका में नजर आ सकते हैं. हाल ही में न्‍यूज़ 18 के स्‍पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार ने प्रवीन से भविष्‍य की योजनाओं के अलावा टीम इंडिया को लेकर खास बातचीत की. पेश है...

टीम इंडिया के लिए जब आप खेलते थे तब भी तेज गेंदबाजी बहुत अच्‍छी थी. जबकि मौजूदा दौर में टीम के पास अब तक का बेस्‍ट पेस अटैक है. क्‍या आप भी ऐसा ही मानते हैं?

यकीनन यह भारत का आज तक का बेस्‍ट पेस अटैक है. इस वक्‍त भारत की तरफ से नई तरह की गेंदबाजी हो रही है. भुवनेश्‍वर कुमार, मोहम्‍मद शमी और जसप्रीत बुमराह शानदार गेंदबाजी कर रहे हैं. शुरुआत (नई गेंद) में भी ये अच्‍छी गेंदबाजी कर रहे हैं तो डेथ ओवरों में भी इनका दम दिखाई देता है. जबकि बीच के ओवरों में भी अच्छी गेंदबाजी हो रही है. इन लोगों के बीच अच्छा तालमेल है.

आप और भुवी मेरठ के एक ही क्‍लब से खेले हैं. उनके क्रिकेटर करियर के बारे में आपकी राय?

सभी को ( पूरे इंडिया) पता है कि शुरू में भुवी की स्‍पीड बहुत अधिक नहीं थी, लेकिन उसने सीखा बहुत जल्दी है. उसने जहीर भाई (खान) और मुझसे हमेशा बात की है. इससे मजेदार बात ये है कि सीखते हुए उसने खुद को निखारा है. तब के भुवनेश्वर में और आज के भुवनेश्वर में काफी अंतर है.

भुवनेश्‍वर कुमार, मोहम्‍मद शमी और जसप्रीत बुमराह


उत्‍तर प्रदेश की मिट्टी में ऐसी क्‍या बात है कि स्‍ट्रीट स्‍मार्ट गेंदबाज़ काफी संख्‍या में निकल रहे हैं?

हमारे यहां (उत्‍तर प्रदेश) क्‍लब क्रिकेट कम है. यहां गली मोहल्‍ले की क्रिकेट होती है, लिहाजा मैच बहुत अधिक संख्‍या में खेलने को मिलते हैं और यही वजह है कि अच्‍छे गेंदबाज़ निकलते हैं. वैसे आपको सच बताऊं तो बेशक आजकल टी20 क्रिकेट का बोलबाला हो लेकिन मैं दस साल का था तब से ही 20-20 ओवर के मैच खेलता आ रहा हूं. मैच प्रैक्टिस की बजाए मैच खेलने से ज्‍यादा परिपक्‍वता आती है. जबकि पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के युवाआों की कद काठी भी अलग होती है.

गेंदबाजी कोच के बारे में आपका प्‍लान?

अभी तो मैं आईपीएल या फिर किसी बड़े प्‍लेटफार्म पर बतौर गेंदबाजी कोच नजर नहीं आऊंगा. हां, ऐसा रणजी या फिर जूनियर लेवल पर पर संभव हो सकता है. वैसे ना सिर्फ मुझे बल्कि मेरे जानने वालों को ये भरोसा है कि मैं अच्‍छा गेंदबाजी कोच साबित हो सकता हूं. अब तक मैंने कई लड़कों को गेंदबाजी के बारे में बताया है और उनको इसको फायदा भी हुआ है. यही वजह है कि अब मैं इस दिशा में भलीभांति सोच रहा हूं.

क्‍या टीम के लिए देसी कोच ज्‍यादा फायदेमंद होता है?

बिल्‍कुल, विदेशी कोच की बातें छोटे शहर के लड़कों को समझ में नहीं आती हैं. हालांकि आईपीएल जैसी लीग में एक भारतीय कोच जरूर होता है चाहें वो सहायक कोच हो, गेंदबाजी कोच हो या फिर बल्‍लेबाजी कोच. यकीनन इससे भाषा की बाधा को पार किया जा सकता है. मेरे हिसाब से हर टीम में भारतीय कोच जरूर होना चाहिए.

आज जसप्रीत बुमराह टीम इंडिया के लिए तीनों फॉर्मेट में नंबर वन गेंदबाज़ बन गए हैं. आप उन्‍हें कैसे देखते हैं?

वो अपने आप में अलग किस्‍म का गेंदबाज़ है. उसके हाथ में शोएब अख्‍तर की तरह कर्व है और यही बात उसे खास बनाती है. जबकि वह स्लोअर भी अच्छा डालते हैं, बाउंसर भी और यार्कर भी. यह सभी चीजें उन्हें एक कम्पलीट गेंदबाज बनाती हैं. जबकि बेहतर माहौल भी आपको निखारता है.

हार्दिक पंड्या आपके लिहाज से अच्‍छे बल्‍लेबाज़ हैं या फिर गेंदबाज़?

मेरे लिहाज से हार्दिक पंड्या अच्‍छे बल्‍लेबाज़ हैं. ऑलराउंडर के तौर पर अगर आप अच्‍छे गेंदबाज़ हैं तो पांच विकेट लेने के अलावा 40-50 रन बल्‍ले से निकलने चाहिए. अगर आप अच्‍छे बल्‍लेबाज़ ऑलराउंडर हैं तो शतक लगाने के अलावा आपको दो-तीन विकेट निकालना आना चाहिए.

आप जूनियर क्रिकेटर्स को क्‍या मैसेज देना चाहेंगे?

आज फिटनेस का स्‍तर सुधरा है, लेकिन इस वजह से जूनियर क्रिकेटर की संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है. वो (जूनियर क्रिकेटर) जमकर मेहनत कर रहे हैं, अलग तरह की जिम कर रहे हैं और अच्‍छी डायट ले रहे हैं. अगर आपको तीनों फॉर्मेट में खेलना है तो अच्‍छे स्‍तर की फिटनेस कायम रखनी होगी.

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