पूर्व भारतीय बल्लेबाज का खुलासा, कहा- गावस्कर के कारण खौफ में रहती थी पूरी टीम

पूर्व भारतीय बल्लेबाज का खुलासा, कहा- गावस्कर के कारण खौफ में रहती थी पूरी टीम
सुनील गावस्कर भारत के दिग्गज बल्लेबाजों में शामिल हैं

पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज किरण मोरे (Kiran More) ने सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) को लेकर कई खुलासे किए हैं

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नई दिल्ली. भारतीय दिग्गज सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) जितना अपनी बल्लेबाजी के जाने जाते हैं टीम में वह गुस्से के लिए भी उतना ही जाने जाते थे. यह खुलासा किया है कि टीम के पूर्व सेलेक्टर और विकेटकीपर बल्लेबाज किरण मोरे (Kiran More) ने. एक पॉडकास्ट के दौरान मोरे ने बताया कि गावस्कर (Sunil Gavaskar) के गुस्से का शिकार होने से पूरी टीम को डर लगता था वह इस कोशिश में रहते थे कि इस दौरान वह गावस्कर का सामना न करे.

आउट होने पर बढ़ जाता था गावस्कर का गुस्सा
मोरे (Kiran More) ने बताया कि गावस्कर को आउट होना बिलकुल पसंद नहीं था. वह अकसर आउट होने के बाद काफी गुस्से में आ जाते थे. इस कारण पूरी टीम उनसे छुपने की कोशिश में लगी रहती थी. मोरे ने गावस्कर के साथ कई घरेलू मैच खेले हैं.

इसी का एक किस्सा बताते हुए उन्हें कहा, 'मैंने गावस्कर के साथ वेस्ट जोन के लिए एक साथ काफी घरेलू क्रिकेट के मैच खेले. मुझे याद है वानखेडे का एक टेस्ट मैच मैं सुनील 40 या 30 रन बनाकर आउट हो गए थे. जब वह वापस लौट रहे थे तो ड्रेसिंग रूम में कोई नहीं था. हर कोई मैदान के किसी ना किसी कोने में भागता दिख रहा था और उनसे बचने की कोशिश कर रहा था. वह काफी गुस्से में थे. अगर वह 10-15 रन बनाकर आउट होते थे तो उन्हें उतना गुस्सा नहीं आता था लेकिन पिच पर एक घंटा बिताने के बाद जब वह आउट होते तो हमेशा कहते मैं कैसे आउट हो सकता हूं.
नेट्स पर गंभीरता नहीं दिखाते थे गावस्कर


मोरे ने बताया कि नेट्स पर गावस्कर का खेल मैदान से बिलकुल अलग होता था. उन्होंने कहा, 'मैंने नेट्स में जितने भी खिलाड़ियों को अभ्यास करते देखा उसमें गावस्कर सबसे ज्यादा खराब थे. नेट्स में वह कभी भी प्रैक्टिस जैसा कुछ करते ही नहीं थे. उन्हें नेट्स में अभ्यास करना पसंद ही नहीं था. जब मैं उनको अभ्यास करते देखता था तो मुझे डर लगता कि आखिर यह अगले दिन मैच कैसे खेलेगा. वहीं जब अगले दिन के टेस्ट मैच में उनका खेल देखते तो वह 99.9 प्रतिशत अलग होता था. उनकी बल्लेबाजी देखते कहते वाह क्या बात है.'

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मोरे के मुताबिक गावस्कर की सबसे बड़ी ताकत थी उनकी एकाग्राता. उन्होंने कहा, 'गावस्कर के अंदर जिस तरह की एकाग्रता थी उसपर यकीन करना मुश्किल था. एक बाद जब वह अपने जोन में चले जाते थे तो फिर उनका ध्यान कोई भी भंग नहीं कर सकता था. आप उनके पास खड़े होकर बात करते या फिर सामने नाचते ही क्यों न हो उनपर कोई असर नहीं पड़ता था और उनका ध्यान सिर्फ क्रिकेट पर रहता था.'
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