2007 में संन्यास लेना चाहते थे सचिन, विव रिचर्ड्स के फोन के बाद बदला इरादा

वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज की सलाह के बाद सचिन छह साल तक और क्रिकेट खेले. फिर नवंबर 2013 में कहा क्रिकेट को अलविदा.

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Updated: June 3, 2019, 11:59 AM IST
2007 में संन्यास लेना चाहते थे सचिन, विव रिचर्ड्स के फोन के बाद बदला इरादा
विवियन रिचर्ड्स को अपना आदर्श मानते हैं सचिन तेंदुलकर. (फोटो-ट्विटर)
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Updated: June 3, 2019, 11:59 AM IST
क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने 16 नवंबर 2013 को  अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था. लेकिन अगर उन्हें एक फोन कॉल नहीं आता तो भारत का ये दिग्गज बल्लेबाज 2007 में ही क्रिकेट खेलना छोड़ चुका होता.  दरअसल, सचिन तेंदुलकर 2007 में ही क्रिकेट से संन्यास लेने का मन बना चुके थे, लेकिन तभी वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज विवियन रिचर्ड्स से मिली सलाह के बाद उन्होंने अपना मन बदल दिया. सचिन तेंदुलकर ने एक कार्यक्रम के दौरान अब जाकर इस बात का खुलासा किया है. इसी कार्यक्रम में विव रिचर्ड्स भी मौजूद थे.

90 प्रतिशत पक्का था तब संन्यास लेना

ये खबरें आती रहीं हैं कि बड़े भाई ‌अजित तेंदुलकर की सलाह के चलते सचिन ने 2007 में संन्यास लेने का इरादा बदल दिया था. मगर अब तक इसमें रिचर्ड्स की भूमिका के बारे में कोई बात सामने नहीं आई थी. तेंदुलकर ने अब खुलासा किया है कि 2007 का वर्ल्ड कप करियर के सबसे खराब वक्त में से था. जिस खेल ने उन्हें जिंदगी का सबसे अच्छा वक्त दिखाया था, वही तब खराब समय भी दिखा रहा था. मैंने महसूस किया कि बहुत हो गया. उस समय क्रिकेट के इर्द-गिर्द जो भी चीजें घट रही थीं, वो बिल्कुल भी अच्छी नहीं थीं.  हमें कुछ बदलाव की जरूरत थी और मैंने महसूस किया कि अगर ऐसा नहीं होता है तो मैं क्रिकेट से संन्यास ले लूंगा. मैं इसे लेकर 90 प्रतिशत आश्वस्त था. मगर तब मेरे बड़े भाई ने बताया कि 2011 का वर्ल्ड कप फाइनल मुंबई में है. क्या तुम कल्पना कर सकते हो कि वर्ल्ड कप की खूबसूरत ट्रॉफी तुम्हारे हाथों में होगी.

रिचर्ड्स की सलाह के बाद सचिन ने अगले 6 साल तक क्रिकेट खेला और वर्ल्ड कप की ट्रॉफी भी जीती. (फोटो-पीटीआई)


...और फिर आया रिचर्ड्स का फोन

सचिन ने बताया कि बड़े भाई से बात करके मैं अपने फार्महाउस पर चला गया. तभी मुझे सर विव का फोन आया. उन्होंने कहा-मैं जानता हूं कि अभी तुम्हारे अंदर काफी क्रिकेट बचा है. हमने करीब 45 मिनट बात की. यह बातचीत दिल को सुकून पहुंचाने वाली थी क्योंकि जब आपका आदर्श आपको फोन करता है तो इसके बेहद खास मायने होते हैं.  उनसे फोन पर बात करने के बाद से मैंने सन्यास का इरादा बदल दिया. और उसके बाद से मेरे प्रदर्शन में भी सुधार होता गया.

छोटा खिलाड़ी इतना ताकतवर कैसे हो सकता है...
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सचिन तेंदुलकर के साथ इसी कार्यक्रम में मौजूद विव रिचर्ड्स ने कहा कि मुझे हमेशा से सचिन में विश्वास था. विव आगे कहते हैं कि मुझे सुनील गावस्कर के साथ खेलने का मौका मिला, जिन्हें मैं भारतीय क्रिकेट का गॉडफादर मानता हूं. इसके बाद सचिन आए और अब विराट कोहली. मगर मुझे जिस एक बात ने हमेशा हैरान किया है वो ये कि आखिर छोटा सा खिलाड़ी इतना ताकतवर कैसे हो सकता है.

सचिन ने 2003 वर्ल्ड कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार को बेहद निराशाजनक करार दिया. उन्होंने कहा, हां, मुझे उसे गहरी निराशा हुई. उस टूर्नामेंट में हम इतना अच्छा खेले और फाइनल तक पहुंचे। इससे पहले हमारी बल्लेबाजी इतनी मजबूत नहीं थी। पूरे टूर्नामेंट में हम सिर्फ ऑस्ट्रेलिया से हारे थे।

इस कार्यक्रम में सुनील गावस्कर, हरभजन सिंह, आर. अश्विन, शेन वार्न, माइकल क्लार्क, यूनिस खान, मिस्बाह उल हक और नासिर हुसैन भी मौजूद थे.
First published: June 3, 2019, 11:24 AM IST
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