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भारत-वेस्टइंडीज सीरीज से क्रिकेट में क्रांतिकारी बदलाव, मैदानी अंपायरों से छीना ये हक

भाषा
Updated: December 5, 2019, 6:06 PM IST
भारत-वेस्टइंडीज सीरीज से क्रिकेट में क्रांतिकारी बदलाव, मैदानी अंपायरों से छीना ये हक
अब नोबॉल देने का अधिकार मैदानी अंपायर के पास नहीं होगा. (AP Photo)

India vs West Indies श्रृंखला शुक्रवार से हैदराबाद में टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच से शुरू होगी जिसमें तीन टी20 के अलावा इतने ही वनडे खेले जाएंगे.

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दुबई: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने गुरुवार को घोषणा की कि भारत बनाम वेस्टइंडीज (India vs West Indies) के बीच टी20 और वनडे अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में ‘फ्रंट फुट नोबॉल’ (Front Foot No Ball) पर फैसला मैदानी अंपायर नहीं बल्कि तीसरा अंपायर (Third Umpire) करेगा. श्रृंखला शुक्रवार से हैदराबाद में टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच से शुरू होगी जिसमें तीन टी20 के अलावा इतने ही वनडे खेले जाएंगे. इसके दौरान ही ‘फ्रंट फुट नोबॉल’ पर फैसला करने की तकनीक को ट्रायल पर रखा जाएगा.

'तीसरे अंपायर की सलाह बिना ‘फ्रंट फुट नोबॉल’ पर फैसला नहीं'
आईसीसी ने बयान में कहा, ‘पूरे ट्रायल के दौरान प्रत्येक फेंकी गई गेंद की निगरानी की जिम्मेदारी तीसरे अंपायर पर होगी और उन्हें ही पता करना होगा कि कहीं गेंदबाज का पांव रेखा से आगे तो नहीं पड़ा. अगर गेंदबाज का पांव रेखा से आगे होता है तो तीसरा अंपायर इसकी सूचना मैदानी अंपायर को देगा जो बाद में नोबॉल का इशारा करेगा. नतीजतन मैदानी अंपायर तीसरे अंपायर की सलाह के बिना ‘फ्रंट फुट नोबॉल’ पर फैसला नहीं करेगा.’

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मैदानी अंपायरों से नोबॉल को लेकर काफी गड़बड़ी हो रही है.


मैच के बाकी फैसले मैदानी अंपायर ही लेगा
आईसीसी ने कहा कि करीबी फैसलों में संदेह का लाभ गेंदबाज को मिलेगा. आईसीसी ने कहा, ‘और अगर नोबॉल पर फैसला बाद में बताया जाता है तो मैदानी अंपायर आउट (अगर लागू होता है) के फैसले को रोक देगा और नोबॉल करार दे देगा. मैच के दौरान के अन्य फैसलों के लिए सामान्य की तरह मैदानी अंपायर जिम्मेदार होगा.’

इसके अनुसार, ‘ट्रायल के नतीजे का इस्तेमाल यह निर्धारित करने के लिए होगा कि इस प्रणाली का नोबॉल संबंधित फैसलों की सटीकता पर लाभदायक असर होता है या नहीं और क्या इसे खेल के प्रवाह में कम से कम बाधा पहुंचाए बिना लागू किया जा सकता है या नहीं.’अगस्‍त में लिया था जिम्मेदारी तीसरे अंपायर को देने का फैसला 
तीसरे अंपायर को फ्रंट फुट नोबॉल की जिम्मेदारी देने का फैसला इस साल अगस्त में लिया गया था. इस प्रणाली का ट्रायल सबसे पहले 2016 में इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच वनडे श्रृंखला के दौरान किया गया था. आईसीसी ने अपनी क्रिकेट समिति के ज्यादा से ज्यादा सीमित ओवर के मैचों में इसके इस्तेमाल की सिफारिश के बाद फिर से इसके परीक्षण का फैसला किया.

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First published: December 5, 2019, 5:56 PM IST
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