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अंपायरिंग करना नहीं आसान, 140 में से महज 3 हुए पास, सवाल देखकर पकड़ लेंगे सिर

अंपायरिंग करना नहीं आसान, 140 में से महज 3 हुए पास, सवाल देखकर पकड़ लेंगे सिर

अंपायरिंग करना नहीं आसान. (FILE Photo)

अंपायरिंग करना नहीं आसान. (FILE Photo)

हाल ही में अहमदाबाद में अंपायरों के लिए लेवल दो का परीक्षा आयोजित किया गया था, जिसमें से 140 सदस्यों में से महज तीन ही शख्स इस परीक्षा को पास कर सके. बाकी अन्य सदस्यों को निराश होना पड़ा.

हाइलाइट्स

अंपायरिंग करना नहीं आसान
लिखित परीक्षा में उम्मीदवारों का घुमा सिर
140 में से महज 3 हुए पास

नई दिल्ली. भारत में क्रिकेट को पंसद करने वालों की संख्या करोड़ों में है. इस खेल में किस्मत आजमाने वाले लगभग प्रत्येक युवाओं का सपना होता है कि वह एक दिन ब्लू जर्सी में देश का प्रतिनिधित्व करें, लेकिन यह सपना कुछ ही खिलाड़ियों का पूरा हो पाता है. क्रिकेट के मैदान में असफल होने के बाद मन में सवाल आता है कि क्रिकेट से जुड़ा और क्या किया जा सकता है. ऐसे में कई खिलाड़ियों का दिमाग अंपायरिंग की तरफ जाता है. हालांकि अंपायरिंग करना कोई बच्चों का खेल नहीं है. हाल ही में अहमदाबाद में अंपायरों के लिए लेवल दो का परीक्षा आयोजित किया गया था, जिसमें से 140 सदस्यों में से महज तीन ही शख्स इस परीक्षा को पास कर सके. बाकी अन्य सदस्यों को निराश होना पड़ा.

अंपायरिंग के लिए शामिल सदस्यों से क्रिकेट से संबंधित 37 सवाल पूछे गए. इस दौरान सभी उम्मीदवारों को लिखित, वाइवा, वीडियो और फिजिकल परीक्षा के माध्यम से गुजरना पड़ा. विश्व भर में फैले कोरोना महामारी की वजह से पहली बार बोर्ड ने अंपायरिंग में बढ़ती शारीरिक मांगों को ध्यान में रखते हुए शारीरिक परीक्षण शामिल किया था. वीडियो टेस्ट में मैच की फुटेज और विशिष्ट परिस्थितियों में अंपायरिंग पर सवाल किए गए थे.

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परीक्षा में शामिल लगभग सभी उम्मीदवारों ने प्रैक्टिकल में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन लिखित परीक्षा में सबका सिर घूमता रहा. लिखित परीक्षा के कुछ सवाल इस प्रकार हैं-

अगर पवेलियन, पेड़ या फील्डर की परछाई पिच पर पड़ने लगे और बल्लेबाज शिकायत करे तो आप क्या करेंगे?

– अगर किसी गेंदबाज के हाथ की तर्जनी उंगली में चोट लगी है, और उसके टेप हटाने से रक्तस्राव होगा. ऐसे स्थिति में क्या आप उसे गेंदबाजी के दौरान टेप हटाने को कहेंगे?

बल्लेबाज द्वारा शॉट लगाने के बाद शॉर्ट लेग के क्षेत्ररक्षक का हेलमेट बाहर निकल आता है, लेकिन इस दौरान भी गेंद हेलमेट में फंसी रहती है और क्षेत्ररक्षक जमीन पर गिरने से पहले उसे पकड़ लेता है. ऐसे में खिलाड़ियों के अपील पर आपका क्या निर्णय होगा?

बीसीसीआई के एक अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस के साथ खास बातचीत में कहा कि परीक्षा को इस लिए सख्त बनाया गया था, जिससे सर्वश्रेष्ठ योग्यता वाले अंपायरों का चयन हो सके. अधिकारी ने कहा, ‘अंपायरिंग एक कठिन काम है. इसके लिए जुनून रखने वाले ही वास्तव में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं.’

उन तीनों सवालों के जवाब कुछ इस तरह हैं:

स्टेडियम या पेड़ की छाया को नजरंदाज करना चाहिए. इस दौरान क्षेत्ररक्षकों को स्थिर रहने के लिए बोला जाना चाहिए, नहीं तो अंपायर को डेड बॉल का फैसला लेना चाहिए.

गेंदबाज को अगर गेंदबाजी करनी है तो उसे पट्टी हटानी होगी.

सही निर्णय ‘नॉट आउट’ है.

बोर्ड के अधिकारी के अनुसार सदस्यों का मूल्यांकन केवल कानूनों और उपनियमों पर नहीं था, बल्कि सैद्धांतिक ज्ञान के बजाय व्यावहारिक तर्क के परीक्षण पर आधारित था. घरेलू अंपायरों की खराब गुणवत्ता की बार-बार शिकायतों के बाद उनके स्तर को बढ़ाने के लिए बोर्ड ऐसी पहल करती है. पिछले साल के आईपीएल में भारतीय अंपायरों ने काफी निराश किया था. इस दौरान पूर्व खिलाड़ियों ने भी काफी आलोचना की थी.

Tags: BCCI, Indian Cricket Team, Indian team

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