58 साल मैदान पर बिताने के बाद भारत के इस दिग्गज विकेटकीपर ने लिया संन्यास

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Updated: September 2, 2019, 1:29 PM IST
58 साल मैदान पर बिताने के बाद भारत के इस दिग्गज विकेटकीपर ने लिया संन्यास
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के साथ पिच का मुआयना करते क्यूरेटर दलजीत सिंह. (फाइल फोटो)

1961 में फर्स्ट क्लास करियर शुरू करने वाले दलजीत सिंह (Daljit Singh) ने 87 फर्स्ट क्लास मैच खेलने के अलावा 12 साल से ज्यादा समय तक कोचिंग दी और फिर 22 साल क्यूरेटर रहे. इस तरह उन्होंने 58 साल मैदान पर बिताए.

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दलजीत सिंह (Daljit Singh)...ये वो नाम है जिसने भारत में पिच क्यूरेटर के काम को नाम और बहुत ऊंचा मुकाम दिया. वो नाम जिसने भारत में पिचों की देखरेख में अपनी जिंदगी के 22 साल दे दिए. वो नाम जो साल 1961 से ही मैदान पर कदम रख चुका था. 19 साल तक बतौर विकेटकीपर बल्लेबाज (Wicket Keeper Batsman) मैदान पर धाक जमाने के बाद कोच और फिर क्यूरेटर रहे दलजीत सिंह (Daljit Singh) ने आखिरकार करीब 80 साल की उम्र में बीसीसीआई के चीफ क्यूरेटर के पद से संन्यास ले लिया है. रविवार को संन्यास का ऐलान करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने अब अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने का फैसला किया है. पिछले 22 सालों में बीसीसीआई (BCCI) के साथ ये सफर बेहद शानदार रहा.

1961 में फर्स्ट क्लास करियर शुरू करने वाले दलजीत सिंह (Daljit Singh) ने 19 साल से ज्यादा समय तक विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर क्रिकेट खेला. उनके नाम एक समय रणजी ट्रॉफी में विकेट के पीछे सर्वाधिक शिकार करने का रिकॉर्ड था. उनके नाम 87 फर्स्ट क्लास मैचों में 225 शिकार हैं. इसके अलावा उन्होंने 12 साल से ज्यादा समय तक कोचिंग भी दी और फिर 22 साल क्यूरेटर रहे. इस तरह उन्होंने अपनी जिंदगी के 58 साल मैदान पर बिताए.

चार टीमों के लिए खेले
दलजीत सिंह (Daljit Singh) ने चार टीमों के लिए रणजी ट्रॉफी खेली. उन्होंने सर्विसेज की तरफ से रणजी ट्रॉफी खेली, जबकि नार्दर्न पंजाब के लिए भी मैदान में उतरे. वहीं दिल्ली और फिर बिहार के लिए रणजी मैच खेले. वह छह साल तक बिहार की रणजी ट्रॉफी टीम के कप्तान रहे. इसमें 1975-76 में खेला गया फाइनल भी शामिल है.

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दलजीत सिंह ने पिच क्यूरेटर के तौर पर भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयां दीं. (फाइल फोटो)


12 साल तक कोचिंग दी
एमसीसी, यूके से क्वालीफाइड कोच बनकर लौटे दलजीत सिंह ने 12 साल तक बिहार, कर्नाटक और पंजाब के खिलाड़ियों को कोचिंग भी दी.  1989-92 तक कर्नाटक रणजी टीम के कोच रहे. उनसे कोचिंग लेने वाले खिलाड़ियों में अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़, जवागल श्रीनाथ, वेंकटेश प्रसाद, डेविड जॉनसन, सुनील जोशी, डोडा गणेश जैसे क्रिकेटर भी शामिल थे. कुछ समय बाद मोहाली शिफ्ट हो गए और फिर युवराज सिंह, हरभजन सिंह, हरविंदर सिंह, वीआरवी सिंह समेत अन्य क्रिकेटरों को कोचिंग दी.
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पिच क्यूरेटर की संभाली कमान
पंजाब क्रिकेट संघ (Punjab Cricket Association) के तत्कालीन अध्यक्ष आईएस बिंद्रा (IS Bindra) के आग्रह पर दलजीत सिंह (Daljit Singh) साल 1993 में बंगलोर से मोहाली शिफ्ट हो गए थे. दलजीत का जन्म भी पंजाब में ही हुआ था. वे बताते हैं कि बिंद्रा के प्रोत्साहित करने पर ही मैंने मैदान की देखरेख का जिम्मा संभाला जो उस समय बन ही रहा था. तभी मैंने फैसला किया कि मुझे अपनी ऊर्जा मैदान और पिच पर काम करने में लगानी चाहिए. मैंने कोचिंग छोड़ दी और यही काम शुरू कर दिया. ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड की पिचों के बारे में जानकर मुझे ये बात समझने में मदद मिली कि भारतीय पिचों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर बनाने में किन बातों का ख्याल रखा जाना जरूरी है. बाद में 1994 में मोहाली में पहला टेस्ट मैच खेला गया. ये मैच भारत और वेस्टइंडीज के बीच उछाल भरी और कड़ी सतह वाली पिच पर खेला गया था.

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दलजीत सिंह ने 19 साल तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट भी खेला है. (TWITTER)


बीसीसीआई से जुड़ाव
साल 1997 में पूर्व क्रिकेट प्रशासक जगमोहन डालमिया की पहल पर पहली ग्राउंड एंड पिच समिति का गठन किया गया. जब दलजीत सिंह को समिति के सदस्य के तौर पर फीस की पेशकश की गई तो उन्होंने इसे लेने से साफ इनकार कर दिया.
रणजी ट्रॉफी में तटस्‍थ क्यूरेटर
ऐसा देखने में आया कि कुछ घरेलू टीमें लाभ लेने के लिए पहले ही दिन से स्पिनरों को मदद पहुंचाने वाली पिचें बना रहीं हैं तो 2016 में तटस्‍थ क्यूरेटर नियुक्त करने का फैसला किया गया. इसका लाभ भी देखने को मिला और अधिक मैचों के नतीजे निकलने लगे.

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First published: September 2, 2019, 1:23 PM IST
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