OPINION| आप विराट कोहली से चिढ़ते क्‍यों हैं!

जब टीम इंडिया बस से उतरी तो लगभग हर खिलाड़ी के चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन कोहली काफी उखड़े-उखड़े से नजर आए.

रवि प्रताप दुबे | News18Hindi
Updated: December 21, 2018, 3:46 PM IST
OPINION| आप विराट कोहली से चिढ़ते क्‍यों हैं!
विराट कोहली
रवि प्रताप दुबे | News18Hindi
Updated: December 21, 2018, 3:46 PM IST
ऑस्ट्रेलिया में इन दिनों विराट कोहली उदास हैं. दरअसल, पर्थ टेस्ट खत्म होने के बाद 19 दिसंबर को टीम इंडिया मेलबर्न पहुंची, जहां 26 दिसंबर से बॉक्सिंग डे टेस्ट से यानी कि सीरीज़ का तीसरा टेस्ट मैच खेला जाना है. जब टीम इंडिया बस से उतरी तो लगभग हर खिलाड़ी के चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन कोहली काफी उखड़े-उखड़े से नजर आए. कप्तान बिना किसी से कोई बात किए हुए सीधा होटल में दाखिल हो गए. शायद कोहली को भी इस बात का एहसास है कि उनके रवैये को लेकर उन्हें बहुत खिंचाई का सामना करना पड़ रहा है.

विराट ने भारतीय क्रिकेट में शानदार योगदान दिया है और देते जा रहे हैं. विराट युवाओं के परफेक्ट रोल मॉडल हैं या नहीं इस पर बहस हो सकती है लेकिन वो नए भारत के मिडिल क्लास युवा की ख्वाहिशों के सबसे बड़े मॉडल है इसमें कोई शक नहीं. वो युवा जो कदम कदम पर व्यवस्था को चुनौती देता है, वो जो अपना लक्ष्य भी जानता है और अपनी योग्यता पर यकीन रखता है. अगर कोई उसके रास्ते में आएगा तो रुकने थमने के बजाय वो उसे करारा जवाब देगा. उसके लिए मामूली खुशियां मायने ही नहीं रखती और संतोष उसके स्वाभाव का हिस्सा नहीं है. वो अपने समकक्षों के मुकाबले बहुत ज्यादा मेहनत करता है और वो मेहनत कभी उसे अधीर भी बनाती है. पर उसने खुद के भगवान होने का कभी दावा भी नहीं किया. वो कभी भी अपनी खामियां नहीं छिपाता बल्कि अपनी खूबियों के सहारे आगे बढ़ता है.

विराट के स्वाभाव की तुलना आप सचिन से मत कीजिये, ये दो अलग लोग हैं, अलग व्यक्तित्व, अलग परवरिश, अलग माहौल, अलग चुनौतियां और अलग समय. दरअसल, आक्रामकता कोहली के व्यवहार का एक हिस्सा है जबकि टेस्ट टीम के ज़्यादातर खिलाडी ऐसे हैं जो शांत स्वाभाव के हैं- चाहे वो ओपनर मुरली विजय और केएल राहुल हों या फिर नयी दीवार चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे भी शांत रहते हैं. और तो और भारतीय टीम के तेज़ गेंदबाज़ भी चुपचाप रहते हैं चाहे वो उमेश यादव हों, शमी हो या बुमराह. गौरतलब है कि टीम में तीन खिलाड़ी दिल्ली से हैं-कप्तान कोहली, विकेटकीपर रिषभ पंत और तेज गेंदबाज़ इशांत शर्मा. तीनों आक्रामक हैं, मैदान पर कहते सुनते रहते हैं यानी कुछ बात तो दिल्ली में है ही.



कोहली जैसा बल्लेबाज़ हाल फिलहाल तो कोई भी नहीं है, बल्कि वो “ऑल टाइम ग्रेट” में भी सबसे ऊपर जाने का माद्दा रखते हैं. इस बात से सहमत भी बहुत सारे लोग होंगे ही. लेकिन मसला ये है कि क्या विराट कोहली एक परफेक्ट रोल मॉडल हैं ? क्या उनका व्यवहार उचित है? क्या वो टीम मैन हैं ? क्या उनका “एग्रेशन” नाकाबिल-ए-बर्दाश्त है? क्या वो इतने पंगे मोल लेते हैं कि उनकी शख्सियत नासूर बन रही है?

आखिर विराट से चिढ़ किस बात की?

सवाल ये कि क्या कोहली की आक्रामकता गलत है? जहीर खान के मुताबिक, 'आपको जिसमें सफलता मिलती है वे उस पर कायम रहें. आपको सफलता के अपने फार्मूले से नहीं हटना चाहिए. यह मायने नहीं रखता कि बाकी क्या कह रहे हैं. वैसे भी ऑस्ट्रेलिया में सीरीज हमेशा इस तरह से कड़ी होती है.' वहीं पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार ने भी जहीर का समर्थन करते हुए कहा कि ''कोहली अंडर-16 के दिनों से ही ऐसी ही आक्रामक क्रिकेट खेल रहे हैं. अगर वह भारत की तरफ से खेलते हुए वही आक्रामकता दिखा रहे हैं तो इसमें क्या ख़ास है. मैंने उसके साथ काफी क्रिकेट खेली है और मैं कह सकता हूं कि वह आक्रामकता के बिना अपनी सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट नहीं खेल सकते'.

ऐसा नहीं है कि केवल साथी खिलाड़ियों ने ही विराट को सपोर्ट किया हो, बल्कि खुद ऑस्ट्रेलिया के कोच जस्टिन लैंगर को भी दूसरे टेस्ट में भारत का आक्रामक लेकिन हद पार नहीं करने का रवैया पसंद आया. लैंगर ने कहा, 'विराट कोहली और टिम पेन के बीच बहस हलके फुल्के माहौल की थी अपमानजनक नहीं और उन्हें यह टकराव पसंद आया क्‍योंकि दोनों कप्तान मैच पर अपना दबदबा जताने का प्रयास कर रहे थे.'
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कुल मिलाकर देखा जाए तो विराट की शख्सियत में आपको एक चिर-परिचित दिल्ली वाले लड़के की झलक मिलती है. जो आक्रामक होता है, चीखता-चिल्लाता है, जीत हासिल करने के लिए जान लड़ा देता है. इस रवैये की आलोचना समाज में भी होती है लेकिन याद रखिये कि इसी दिल्ली के एक शायर ने ही कहा था कि “रगों में दौड़ने-फिरने के हम नहीं कायल, जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है.”
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