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एक साल में पूरी हुई विराट कोहली की मुराद, ये तोहफा पाकर चेहरे पर तैर गई खुशी

News18Hindi
Updated: October 9, 2019, 8:26 AM IST
एक साल में पूरी हुई विराट कोहली की मुराद, ये तोहफा पाकर चेहरे पर तैर गई खुशी
भारतीय कप्तान विराट कोहली पहले भी एसजी बॉल को लेकर अपनी नाखुशी जाहिर कर चुके हैं. (एपी)

भारतीय कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) ने पिछले साल एसजी बॉल (SG Ball) की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए ड्यूक गेंदों के इस्तेमाल की वकालत की थी. हालांकि साउथ अफ्रीका के खिलाफ मैच में इस्तेमाल की गई एसजी बॉल पर उन्होंने संतोष जताया है.

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  • Last Updated: October 9, 2019, 8:26 AM IST
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नई दिल्ली. दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट जीतने के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) के चेहरे पर मुस्कुराहट की एक वजह और थी. वो वजह विशाखापत्तनम टेस्ट में इस्तेमाल की गई एसजी बॉल (SG Ball) थी, जिसे लेकर कप्तान कोहली काफी खुश नजर आए. मगर ये बात किसी से छिपी नहीं है कि विराट कोहली ने करीब एक साल पहले एसजी बॉल को लेकर कितनी कड़ी नाराजगी जताई थी. उन्होंने यहां तक कहा दिया था कि अगर संभव हो तो दुनियाभर में टेस्ट क्रिकेट (Test Cricket) के लिए ड्यूक गेंद का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. विराट कोहली ने कहा था कि एसजी बॉल कुछ समय में ही ढीली हो जाती है और अपनी चमक खो देती है, जिससे तेज गेंदबाजों को अधिक मदद नहीं मिलती. विराट कोहली के अलावा तेज गेंदबाज उमेश यादव और ऑफ स्पिनर आर. अश्विन भी एसजी बॉल की गुणवत्ता पर सवाल उठा चुके हैं.

गेंदबाज आपको चुनौती देते हैं... टेस्ट क्रिकेट का मजा यही है
मगर एक साल बाद मानो विराट कोहली (Virat Kohli) की मुराद पूरी हो गई. विशाखापत्तनम टेस्ट जीतकर जब बात बयान देने की आई तो भारतीय कप्तान ने साफ कर दिया कि इस मैच में इस्तेमाल की गई एसजी बॉल काफी शानदार थी. उन्होंने कहा, 'एसजी बॉल का ये लॉट काफी बेहतर है. यानी कुछ तो सुधार हुआ है. हम चाहते हैं कि गेंद 80 ओवर तक हार्ड बनी रहे. अगर ये 40-45 ओवरों के बाद ही नरम पड़ जाएगी तो मैच में कुछ नहीं होगा. ये टेस्ट क्रिकेट (Test Cricket) के लिए आदर्श स्थिति नहीं है. हार्ड बॉल से बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें आतीं हैं. अगर गेंद 80 ओवरों तक हार्ड न भी रहे तो भी 60 ओवरों तक तो होनी ही चाहिए. इससे मैच में बने रहने में मदद मिलती है. गेंदबाज आपके सामने मुश्किलें पेश करते हैं. यही टेस्ट क्रिकेट का मजा है.'

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विराट कोहली विदेशी जमीन पर सबसे ज्यादा टेस्ट मैच जीतने के मामले में भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान हैं. (AP)


एसजी, कूकाबुरा और ड्यूक गेंद में अंतर यू समझिए
एसजी बॉल : एसजी गेंद (SG Ball) भारत में बनती है और यहां टेस्ट मैच इसी से खेला जाता है. एसजी गेंद की सिलाई सबसे बढ़िया होती है लेकिन भारतीय हालात में 10-20 ओवर तक ही इसमें स्विंग मिलती है और यह अपनी चमक खो देती है. इसकी सीम 80-90 ओवर तक रहती है जिससे इससे रिवर्स स्विंग की संभावना बनी रहती है. इसके अलावा इस गेंद से स्पिनरों को ग्रिप बनाने में भी काफी आसानी होती है.

कूकाबुरा गेंद : ये गेंद ऑस्ट्रेलिया में बनती है और इसका इस्तेमाल ऑस्ट्रेलिया के अलावा द. अफ्रीका, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, जिम्बाब्वे और न्यूजीलैंड में होता है. 20-25 ओवरों के बाद जब सिलाई ढीली पड़ने लगती है, तो ये स्विंग करने में मददगार हो जाती है. लेकिन स्पिनर्स आमतौर पर इन गेंदों को पसंद नहीं करते, क्योंकि ये स्पिनर्स के लिए मददगार नहीं होतीं. कूकाबुरा गेंदों में अंदर कार्क और सफेद मोटे धागे का धागे का इस्तेमाल होता है. कार्क को गोल आकार में ढालकर उनके ऊपर सफेद धागों को लपेटकर एक सतह बनाई जाती है. फिर उन्हें चमड़े के दो अर्धगोलाकार खोल में डालकर मशीनों से सिला जाता है. आमतौर पर इनके दाम 1200 रुपये से लेकर 2400 रुपये तक होगा.
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ड्यूक गेंद : ये गेंदें इंग्लैंड में बनती हैं और इसका इस्तेमाल इंग्लैंड के अलावा वेस्टइंडीज में होता है. ड्यूक बॉल की सीम शानदार होती है और 50-55 ओवर तक यह बनी रहती है. यह बढ़िया स्विंग करती है. यह तेज गेंदबाजों की सबसे ज्यादा मददगार गेंद है. इस गेंद की सिलाई, स्विंग और उछाल गेंदबाजों के लिए वरदान साबित होती है. ड्यूक गेंद अंदर और बाहर दोनों तरफ स्विंग करती है.यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है. डयूक गेंद की भारतीय उपमहाद्वीप में भी स्विंग कर सकती है. ड्यूक की एक सिंगल गेंद की सिलाई में तीन से साढ़े तीन घंटे का वक्त लगता है. इस गेंद की दूसरी खासियत यह है कि इसकी शाइन बहुत देर तक बनी रहती है.

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First published: October 9, 2019, 8:09 AM IST
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