विराट कोहली के टेस्ट में 10 साल पूरे: बोले- स्टारडम थोड़े समय के लिए होता है, इंसान कभी नहीं बदलता

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा लोगों की मदद करने में भी पीछे नहीं रहते हैं. (Virat Kohli Instagram)

विराट कोहली (Virat Kohli) के टेस्ट में डेब्यू किए आज 10 साल पूरे हो गए. टेस्ट की पहली पारी में वे सिर्फ 10 गेंद ही खेल सके थे. ऐसे में किसी ने भी नहीं सोचा था कि वे बतौर कप्तान टीम को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे. उनकी नजर पहली आईसीसी ट्रॉफी पर होगी.

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    नई दिल्ली. विराट कोहली ने आज ही के दिन 20 जून 2011 को टेस्ट डेब्यू किया था. पहली पारी में सिर्फ 10 गेंद खेल सके थे और 4 रन बनाकर आउट हुए थे. तब किसी ने नहीं सोचा था कि कोहली टेस्ट में टीम इंडिया के सबसे सफलतम खिलाड़ी और कप्तान होंगे. आज उनके टेस्ट क्रिकेट के 10 साल पूर हो गए हैं. टीम अभी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेल रही है. ऐसे में कोहली यह मुकाबला जीतकर अपने इसे समय को और यादगार बनाना चाहेंगे.

    विराट कोहली ने पिछले दिनों स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए कहा था, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं टीम का कप्तान बनूंगा, वो भी एक फॉर्मेट का. आज तो मैं तीनों फॉर्मेट का कप्तान हूं. यह अविश्वनीय है.’ उन्होंने कहा कि कई बार टीम का प्रदर्शन ऊपर-नीचे हुआ. सफलता के साथ असफलता भी मिली. लेकिन एक चीज मैं हमेशा करता हूं, वो है मैच में अपना 100 फीसदी देना.

    विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया ने अंडर-19 वर्ल्ड कप का खिताब भी जीता था. विराट कोहली ने कहा, ‘ऐसा नहीं था कि मेरे में कप्तानी के गुण पहले से थे. अंडर-19 का कप्तान बनने के बाद नजरिया बदला. चीजों को धीरे-धीरे समझा और सीखा. अनुभव से यहां तक पहुंचा हूं.’ उन्होंने कहा कि मुझे बच्चों से बात करना अच्छा लगता है. मुझे जब भी मौका मिलता है मैं उनसे बात करता हूं.

    माता-पिता बच्चों के मन की बात को समझें

    विराट कोहली ने कहा कि माता-पिता को बच्चों के मन की बात को समझना चाहिए. खराब समय में उन्हें सबसे ज्यादा सपोर्ट की जरूरत होती है. ऐसे में बच्चों में दबाब नहीं बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कई बार देखा गया है कि घरेलू क्रिकेट में खिलाड़ी खराब प्रदर्शन से बाहर नहीं आ पाते, क्योंकि उनके ऊपर चारों से ओर से दबाव आ जाता है. विराट कोहली आज बड़े व्यक्ति हैं, ऐसे में वे स्टारडम को कैसे हैंडल करते हैं. इस पर उन्हाेंने कहा कि स्टारडम थोड़े समय के लिए होता है. इंसान कभी नहीं बदलता.

    अर्धशतक से ज्यादा शतक लगाए हैं टेस्ट में

    विराट कोहली के टेस्ट करियर की बात की जाए तो उन्होंने 92 टेस्ट की 154 पारियों में 53 की औसत से 7534 रन बनाए हैं. 27 शतक और 25 अर्धशतक जड़े हैं. यानी टेस्ट में उनके अर्धशतक से अधिक शतक हैं. बतौर कप्तान कोहली भारत की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं. ओवरऑल दुनिया में वे चौथे नंबर पर हैं. कोहली ने बतौर कप्तान 99 पारियों में 59 की औसत से 5436 रन बनाए हैं. 20 शतक और 15 अर्धशतक लगाए हैं. बतौर भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी 3454 रन के साथ दूसरे नंबर पर हैं.

    बतौर कप्तान सबसे ज्यादा मैच खेलने और जीतने का रिकॉर्ड

    विराट काेहली टेस्ट में टीम इंडिया की ओर से 61 मैच में कप्तानी की है. यह सबसे ज्यादा है. महेंद्र सिंह धोनी 60 टेस्ट में कप्तानी करके दूसरे नंबर पर हैं. कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया ने सबसे ज्यादा 36 टेस्ट जीते हैं. धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया को 27 टेस्ट में जीत मिली है.

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