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Virat Kohli Quits Captaincy: दादा और धोनी से भी धाकड़ कप्तान रहे विराट, हमेशा अपनी शर्तों पर की कप्तानी

Virat Kohli Quits Captaincy: दादा और धोनी से भी धाकड़ कप्तान रहे विराट, हमेशा अपनी शर्तों पर की कप्तानी

कोहली ने 68 टेस्‍ट मैचों में भारतीय टीम की अगुआई की, जिसमें 40 में जीत दर्ज की. 17 मैच गंवाए और 11 मैच ड्रॉ रहे. बतौर कप्‍तान उनकी जीत का प्रतिशत 58.82 का रहा. (AP)

कोहली ने 68 टेस्‍ट मैचों में भारतीय टीम की अगुआई की, जिसमें 40 में जीत दर्ज की. 17 मैच गंवाए और 11 मैच ड्रॉ रहे. बतौर कप्‍तान उनकी जीत का प्रतिशत 58.82 का रहा. (AP)

Virat Kohli Quits Test Captaincy: विराट कोहली ने भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी भी छोड़ दी है. इसके साथ ही भारतीय क्रिकेट से 'कप्तान विराट' युग का अंत हो गया है. कोहली ने पहली बार 2015 में भारतीय टीम की कप्तानी संभाली थी. उन्होंने बतौर कप्तान 7 साल के सफर में भारत को ऐसी कई उपलब्धियां दिलाईं, जो पहले ख्वाब हुआ करती थीं.

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नई दिल्ली. विराट कोहली ने भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी (Virat Kohli Quits Captaincy) भी छोड़ दी है. भारत के स्टार क्रिकेटर ने शनिवार को यह जानकारी दी. इसके साथ ही भारतीय क्रिकेट से ‘कप्तान विराट’ युग का अंत हो गया है. विराट कोहली (Virat Kohli) ने पहली बार 2015 में भारतीय टीम की कप्तानी संभाली थी. उन्होंने भारत को बतौर कप्तान 7 साल के सफर में ऐसी कई उपलब्धियां दिलाईं, जो पहले ख्वाब हुआ करती थीं. अपनी शर्तों पर कप्तानी करने वाले विराट को अक्सर एग्रेशन के चलते आलोचना का सामना करना पड़ा. लेकिन आज जब हम पलटकर देखते हैं तो यह कहने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि विराट भारत के अब तक के सबसे धाकड़ कप्तान हैं. ‘दादा’ सौरव गांगुली और मिडास टच वाले एमएस धोनी का नाम विराट के बाद ही आएगा.

विराट कोहली अब जबकि पूर्व कप्तान हो गए हैं, तो उनकी बाकी कप्तानों से तुलना स्वाभाविक है. जब भी भारत के बेहतरीन और धाकड़ कप्तानों की बात आती है तो सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी का नाम आता है. सौरव, जिन्होंने भारतीय टीम को मैच फिक्सिंग के साये से बाहर निकाला और विदेश में जीतना सिखाया. धोनी के मिडास टच ने भारत को दो बार विश्व कप जिताया. दूसरी ओर, विराट कोहली की कप्तानी का जिक्र होने पर अक्सर यह कहा जाता है कि वे भारत को कोई भी आईसीसी ट्रॉफी नहीं जिता सके. यही आधार बताकर विराट को दादा और धोनी से कमतर बताने की कोशिश की जाती रही है.

सिर्फ ट्रॉफी जीतना कप्तानी की कसौटी नहीं 
सिर्फ ट्रॉफी या मैच जीतना कप्तानी की कसौटी नहीं हो सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले तो यह देखना होता है कि जब किसी खिलाड़ी को कप्तान बनाया गया तब टीम किस स्थिति में थी और जब कप्तानी छोड़ी तो कहां थी. किस कप्तान ने टीम को बेहतरीन खिलाड़ी दिए. किस कप्तान ने मुश्किल समय में साथियों का साथ दिया. किस कप्तान ने अपने खिलाड़ियों के लिए लड़ाई लड़ी. किस कप्तान ने मैच जीतने के लिए कितनी कोशिश की.

साथी खिलाड़ियों को मिला विराट का साथ
इसमें कोई शक नहीं कि जब सौरव गांगुली ने कप्तानी संभाली तो टीम मुश्किलों में घिरी हुई थी. धोनी और कोहली को बनी-बनाई बेहतरीन टीम मिली. जब नए खिलाड़ी तैयार करने की बात आती है तो ये तीनों ही कप्तान बराबरी पर खड़े मिलते हैं. अगर गांगुली ने सहवाग, युवराज, हरभजन जैसे खिलाड़ियों को पूरा समर्थन दिया तो कोहली ने भी केएल राहुल, ऋषभ पंत, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, रवींद्र जडेजा जैसे खिलाड़ियों को भरपूर मौके दिए. चेतेश्वर पुजारा-अजिंक्य रहाणे को भी अंत तक उनका समर्थन हासिल रहा. और पाकिस्तान से हार के बाद मोहम्मद शमी को ट्रोल करने वालों के सामने कप्तान कोहली जिस तरह से खड़े हुए, वैसी मिसाल तो भारतीय क्रिकेट में कम ही मिलती है.

कोहली हार से नहीं घबराते, 
किस कप्तान ने मैच जीतने के लिए कितनी कोशिश की? इस कसौटी पर किंग कोहली, अपने सीनियरों गांगुली और धोनी से आगे निकल जाते हैं. कोहली शायद देश के पहले कप्तान रहे, जो हार से घबराते नहीं हैं. जब वे प्लेइंग इलेवन चुनते हैं तो उनकी सोच जीतने की होती है. जीत की उनकी चाहत इतनी तेज है कि वे हार का जोखिम लेने से भी नहीं घबराते. यही कारण है कि 90 साल के भारतीय क्रिकेट इतिहास में कोहली पहले कप्तान हैं, जो विदेश में 5 स्पेशलिस्ट गेंदबाजों के साथ मैदान पर उतरते हैं. इसी कारण उनकी कप्तानी में भारत का विनिंग परसेंट 50 से ज्यादा चला जाता है (देखें टेबल).

Virat Kohli Quits Test Captaincy: विराट कोहली ने टेस्ट टीम की कप्तानी भी छोड़ दी है.

दूसरी ओर, सौरव गांगुली और एमएस धोनी की प्लेइंग इलेवन में पांचवां गेंदबाज मुश्किल से ही मिलता है. खास बात यह कि गांगुली और धोनी को जो टीम मिली थी, उसमें भारतीय इतिहास की सबसे मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप थी. इसके बावजूद गांगुली-धोनी पांचवां गेंदबाज खिलाने की हिम्मत नहीं कर पाते हैं. जब हम गांगुली-धोनी की प्लेइंग इलेवन का विश्लेषण करते हैं तो पाते हैं कि इन दोनों की पहली कोशिश यह होती थी कि भारत हारे नहीं, भले ही मैच ड्रॉ हा जाए. जीत उनकी प्राथमिकता में बाद में आता है.

गांगुली को हासिल था गॉडफादर का समर्थन
सफल कप्तान और बोर्ड के रिश्ते पर भी बात होनी चाहिए. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सौरव गांगुली को ना सिर्फ टीम में सचिन और द्रविड़ जैसे साथियों का समर्थन हासिल था, बल्कि उनके पास जगमोहन डालमिया के रूप में एक गॉडफादर भी था, जिनकी बीसीसीआई में तूती बोलती थी. डालमिया के बोर्ड अध्यक्ष रहते गांगुली को ऐसे कई विशेषाधिकार हासिल थे, जो किसी और कप्तान को कभी नहीं मिलते. जैसे कि गांगुली जब कप्तान थे तब वे एक बार चुपके से ऑस्ट्रेलिया गए और 7 दिन की ट्रेनिंग करके वापस आ गए. गांगुली ने अपनी किताब में खुद ही कहा है कि यह बात सिर्फ डालमिया को पता थी.

धोनी को मिला श्रीनिवासन का साथ
जब महान कप्तान धोनी की बात आती है तो सबको पता है कि बोर्ड अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन से उनकी कैसे बनती थी. यह दोनों की जुगलबंदी का ही कमाल था कि जब आईपीएल शुरू हुआ तो चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान एमएस धोनी ही बने. चेन्नई सुपरकिंग्स पर जब स्पॉट फिक्सिंग जैसे आरोपों के बाद बैन लगा तो धोनी दूसरी टीम में जाने को मजबूर हुए. लेकिन बैन हटते ही फिर से धोनी और चेन्नई साथ आ गए. श्रीनिवासन को धोनी का गॉडफादर कहना तो ठीक नहीं होगा, लेकिन यह तो कहा ही जा सकता है कि माही को हर पल बोर्ड में एक कद्दावर व्यक्ति का समर्थन हासिल था.

विराट कोहली का नाम आते ही यह तस्वीर उलट जाती है. विराट के बारे में यह नहीं कहा जा सकता कि वे बीसीसीआई की पसंद थे. वे तो धोनी के कप्तानी छोड़ने के बाद कप्तान के तौर पर स्वाभाविक दावेदार थे. बोर्ड के पास उस वक्त विराट को कप्तान बनाना एकमात्र विकल्प था. बाद के दिनों में विराट कोहली और बीसीसीआई बार-बार टकराते दिखते हैं. चाहे खिलाड़ी चुनना हो या कोच, आखिरी फैसला विराट ही करते हैं. यही बात विराट को गांगुली और धोनी से अलग करती है.

कोहली ने पूरे हक से चुने अपने साथी 
ऐसा नहीं है कि सौरव गांगुली या एमएस धोनी ने अपनी पसंद के खिलाड़ी या कोच नहीं चुने. बिलकुल चुने, लेकिन वही बात जो मैंने पहले कही. तब गांगुली और धोनी को अपनी पसंद का कोच-खिलाड़ी चुनने के लिए बीसीसीआई का समर्थन हासिल होता था. लेकिन हमने देखा कि कैसे विराट ने पूरी जिद के साथ रवि शास्त्री को कोच बनवाया. सौरव गांगुली-सचिन तेंदुलकर-वीवीएस लक्ष्मण की कोच चुनने वाली समिति ने साफ संदेश दे दिया था कि वे अनिल कुंबले को कोच बनाना चाहते हैं. लेकिन विराट ने भारतीय क्रिकेट की इस त्रिमूर्ति को भी एहसास कराया कि वे आखिरी फैसला कप्तान करेगा, ना कि कोई और. साफ है विराट जो चाहते हैं, हक से लेते हैं. उन्हें इसके लिए बोर्ड में समर्थन की दरकार नहीं होती.

एक फैसला, जो विराट की सहमति से नहीं हुआ
टेस्ट कप्तान बनने से लेकर छोड़ने के बीच एक ही ऐसा फैसला दिखता है, जिसमें विराट की सहमति शामिल नहीं थी. वह फैसला विराट कोहली से वनडे टीम की कप्तानी छोड़ने का था. हम सबने देखा कि जब विराट से कप्तानी छीनी गई तो बोर्ड अध्यक्ष का एक बयान आया. कहा गया कि विराट को इस फैसले के बारे में बहुत पहले बता दिया गया था. महीनों पहले. लेकिन शायद ऐसा नहीं था. कम से कम विराट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ-साफ कह दिया कि उन्हें कप्तानी छीने जाने की जानकारी डेढ़ घंटे पहले दी गई, ना कि महीनों पहले.

विराट इमोशनल हैं, डिप्लोमेटिक नहीं 
विराट ने जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोर्ड अध्यक्ष सौरव गांगुली की बातों का खंडन किया तो भारतीय क्रिकेटप्रेमियों की बड़ी जमात उनके विरोध में खड़ी हो गई. कहा गया कि विराट को सबके सामने ऐसा नहीं कहना चाहिए थे. अगर सौरव गांगुली ने उनसे पहले बात नहीं की थी, तो भी विराट को टीम हित को देखते हुए चुप रहना चाहिए था. उनके बयान को अपरिपक्व बताया गया. कहा गया कि इसकी टाइमिंग ठीक नहीं है. लेकिन विराट ने पूरे करियर में दिखाया है कि वे डिप्लोमेटिक नहीं हैं. वे भावुक हैं और अपनी भावनाएं कभी छिपाते भी नहीं है.

बोर्ड फील्डिंग सजा रहा था और विराट ने पारी घोषित कर दी
विराट कोहली के पास यह विकल्प था कि वे बोर्ड की हां में हां मिलाते रहते और इसी दम पर दो-एक साल और कप्तानी करते रहते. अगर कभी बैट ना पकड़ने वाला व्यक्ति भी जानता है कि बोर्ड अध्यक्ष से टकराकर बहुत दिनों तक कप्तान नहीं रहा जा सकता, तो विराट यह बात नहीं जानते होंगे, यह सोचना नादानी ही है. विराट भी यह बात अच्छी तरह जानते थे कि उन्हें कप्तानी से हटाने के लिए घेरेबंदी हो रही है. लेकिन इस बार विराट एक कदम आगे निकले. बोर्ड अभी फील्डिंग सजा ही रहा था कि विराट ने खुद ही कप्तानी छोड़ दी.

Tags: BCCI, Captain Virat Kohli, Cricket news, Indian Cricket Team, Team india, Virat Kohli

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