धोनी ने बदल दी 'अंधविश्वासी' विराट कोहली की जिंदगी, खुद किया था बड़ा खुलासा!

धोनी ने बदल दी 'अंधविश्वासी' विराट कोहली की जिंदगी, खुद किया था बड़ा खुलासा!
गौतम गंभीर ने कहा कि सपाट विकेटों पर मौजूदा गेंदबाजी आक्रमण के बीच तीसरे नंबर पर एमएस धोनी बेहतरीन होते

विराट कोहली (Virat Kohli) के करियर की ऐसी कहानी जो बहुत कम लोग जानते हैं, कैसे वो अंधविश्वासी थे

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नई दिल्ली. 27 टेस्ट शतक, 43 वनडे शतक, वनडे-टेस्ट और टी20 तीनों ही फॉर्मेट में 50 से ज्यादा का औसत. आंकड़े देखकर पता चल जाता है कि आखिर किस खिलाड़ी की बात हो रही है. टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) मौजूदा वक्त के सबसे अच्छे बल्लेबाजों में शूमार हैं. इंटरनेशनल क्रिकेट में 70 शतक लगाने वाला ये बल्लेबाज इस वक्त दुनिया का सबसे बड़ा मैच विनर है. पिच बदलती है, विरोधी बदलता है लेकिन नहीं बदलता है तो विराट कोहली का रवैया और उनकी फॉर्म. अब सवाल ये है कि विराट कोहली आखिर इतने कामयाब हुए कैसे. जाहिर सी बात है अपनी मेहनत से और अपनी गलतियों से सबक लेकर उन्होंने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया है. लेकिन कभी वो दौर भी था जब विराट कोहली मेहनत के साथ-साथ अंधविश्वास पर भी भरोसा रखते थे. आइए आपको बताते हैं भारत के कप्तान का ऐसा अंधविश्वास जिसके बगैर वो मैदान पर कदम तक नहीं रखते थे.

विराट कोहली का अंधविश्वास
क्रिकेट ही नहीं दुनिया के हर खेल में खिलाड़ी अकसर अंधविश्वासी होते हैं. वो किसी ना किसी चीज को खुद के लिए भाग्यशाली मानते हैं. विराट कोहली भी इसी जमात में शामिल थे. विराट कोहली  (Virat Kohli) ने जिन ग्लव्ज़ के साथ शतकीय पारी खेली थी, वो उसे कभी नहीं बदलते थे. मतलब वो काफी समय तक लगातार एक ही ग्लव्ज़ के जोड़े को इस्तेमाल करते रहे. उनके मन में ये बैठा हुआ था कि इन्हें पहनकर वो अकसर रन बनाते हैं. विराट कोहली ने खुद इंटरव्यू में ये बात स्वीकार की. विराट ने कहा था कि वो बहुत अंधविश्वासी थे.

धोनी ने तोड़ा विराट का अंधविश्वास



विराट कोहली (Virat Kohli) ने एक इंटरव्यू में बताया था कि साल 2011 में इंग्लैंड दौरे पर उनका अंधविश्वास खत्म हुआ और ये सब धोनी (MS Dhoni) की वजह से हुआ. विराट कोहली ने बताया कि साल 2011 में इंग्लैंड दौरे पर खेली गई वनडे सीरीज उनके करियर के लिए बेहद अहम थी क्योंकि वो चोट के बाद वापसी कर रहे थे. विराट ने उस सीरीज के पहले मैच में अर्धशतक लगाया लेकिन अगले तीन मैचों में उनका बल्ला नहीं चला. फ्लॉप होने के बाद विराट कोहली काफी परेशान हो गए. इसके बाद कप्तान एमएस धोनी उनके पास आए और उनसे बातचीत की. विराट कोहली ने धोनी को बताया कि वो कैसी मानसिकता के साथ जी रहे हैं. इसके बाद धोनी ने उन्हें कहा कि सबकुछ छोड़ो और सिर्फ मैदान पर क्रिकेट खेलो.



अंधविश्वास छोड़ते ही सुपरहिट हुए विराट
विराट कोहली (Virat Kohli) 16 सितंबर 2011 को पहली बार नए पैड और नए ग्लव्ज़ के साथ मैदान पर उतरे. विराट कोहली ने उस मैच में शानदार शतक ठोका. उन्होंने 93 गेंदों में 107 रनों की पारी खेली. टीम इंडिया ये मैच हार गई लेकिन विराट कोहली को एक बात समझ आ गई कि रन अंधविश्वास से नहीं बल्कि खुद पर विश्वास रखकर बनाए जाते हैं.

अंधविश्वास छोड़ते ही विराट कोहली की बल्लेबाजी ही बदल गई. टीम इंडिया के इस स्टार बल्लेबाज ने कार्डिफ वनडे से पहले 60 पारियों में 42.26 की औसत से 2240 रन बनाए थे, जिसमें 5 शतक शामिल थे. वहीं टेस्ट में विराट कोहली ने महज 3 मुकाबले खेले थे और उन्होंने 15.20 की औसत से 76 रन ही जोड़े थे. लेकिन अंधविश्वास को छोड़ते ही विराट कोहली ने जैसे रनों का तूफान ही मचा दिया. विराट कोहली ने अंधविश्वास खत्म होते ही अगले 179 मैचों में 65.48 की औसत से 9627 रन बना डाले, इसमें 38 शतक शामिल हैं. अंधविश्वास खत्म होने के बाद विराट कोहली ने 140 टेस्ट पारियों में 55.10 की औसत से 7164 रन बनाए और उन्होंने 27 शतक लगाए.

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