टूट गया विराट कोहली का सपना, अपनी कप्तानी में अब कभी नहीं जीत पाएंगे वर्ल्ड कप!

टीम इंडिया वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंच गई थी. विराट सेना के पास वर्ल्ड कप जीतने का अच्छा मौका था, लेकिन ऐसा हो न सका. इतिहास देखें तो इस बात की पूरी आशंका है कि विराट कोहली अब कभी बतौर कप्तान वर्ल्ड कप नहीं जीत सकेंगे

News18Hindi
Updated: July 11, 2019, 1:44 PM IST
टूट गया विराट कोहली का सपना, अपनी कप्तानी में अब कभी नहीं जीत पाएंगे वर्ल्ड कप!
विराट कोहली ने इस वर्ल्ड कप में पांच अर्धशतक जड़े, लेकिन किसी भी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल पाए. (फोटो-AP)
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Updated: July 11, 2019, 1:44 PM IST
भारतीय टीम वर्ल्ड कप 2019 के सेमीफाइनल में पहुंची थी तो अंक तालिका में उसके 15 अंक थे. यानी टीम ने शीर्ष स्‍थान पर रहकर अंतिम चार में जगह बनाई थी. वहीं न्यूजीलैंड की टीम अपने पिछले तीन मैच लगातार हारी थी और किसी तरह सेमीफाइनल में जगह बना पाई थी. ऐसे में इस बात की पूरी उम्मीद थी कि विराट की कप्तानी में टीम इंडिया न केवल फाइनल में पहुंचेगी बल्कि खिताब भी जीतेगी.

मगर ऐसा नहीं हो सका. हर सफर का एक अंत होता है और भारतीय टीम के सफर का अंत भी वर्ल्ड कप 2019 में सेमीफाइनल की हार के साथ हो गया. इसके साथ ही भारतीय कप्तान विराट कोहली का वर्ल्ड कप जीतने का सपना भी चकनाचूर हो गया. यूं तो बतौर खिलाड़ी विराट कोहली 2011 का वर्ल्ड कप अपने हाथ में उठा चुके हैं. मगर कप्तान के तौर पर ये उपलब्धि हासिल करने का सुख निश्चित रूप से कुछ अलग ही होता है.



बतौर कप्तान पहला विश्व कप
कप्तान के तौर पर विराट कोहली पहली बार वर्ल्ड कप खेल रहे थे. अब जबकि वह खिताब जीतने में नाकामयाब रहे तो इस बात की उम्मीद कम ही है कि विराट अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जिता पाएंगे. भारतीय क्रिकेट का इतिहास देखें तो यही कड़वी सच्चाई सामने आती है.

दरअसल, टीम इंडिया ने जो दो वनडे और एक टी-20 वर्ल्ड कप जीता है, वो तब जीता है जब कोई खिलाड़ी पहली बार अपनी कप्तानी में वर्ल्ड कप में उतरा है. चाहे 1983 में कपिल देव हों, 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप में महेंद्र सिंह धोनी हों या फिर 2011 में एक बार फिर महेंद्र सिंह धोनी. ये सभी पहली बार इन वर्ल्ड कप में टीम की कप्तानी कर रहे थे.

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1983 में अपनी कप्तानी में कपिल देव ने टीम इंडिया को उसका पहला वर्ल्ड कप दिलाया. (फाइल फोटो)


1983 वर्ल्ड कप : लॉर्ड्स की बालकनी और कपिल के हाथ में ट्रॉफी
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1975 और 1979 में भारतीय टीम की कमान वेंकटराघवन के हाथ में थी. इन दोनों वर्ल्ड कप में भारतीय टीम नॉकआउट में जगह नहीं बना सकी. टीम को ग्रुप स्टेज से ही बाहर होना पड़ा. इसके बाद 1983 में भारतीय टीम कपिल देव की कप्तानी में वर्ल्ड कप खेलने उतरी. इस ऑलराउंडर ने न केवल गेंद और बल्ले से योगदान दिया बल्कि वेस्टइंडीज के खिलाफ फाइनल में विवियन रिचर्ड्स का अद्भुत कैच लेकर फील्डिंग से भी अहम योगदान दिया. 25 जून 1983 को खेले गए इस फाइनल में टीम इंडिया ने 43 रन से जीत दर्ज की और भारत पहली बार चैंपियन बना. कपिल देव ने वर्ल्ड कप में पहली बार कप्तानी करते हुए टीम को खिताब दिलवाया. क्रिकेट के मक्का लॉर्ड्स में चमचमाती ट्रॉफी हाथ में पकड़े कपिल देव की तस्वीर भला कौन क्रिकेटप्रेमी भूल सकता है.

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महेंद्र सिंह धोनी ने 2007 का टी-20 वर्ल्ड कप भारत की झोली में डाला. (फाइल फोटो)


2007 : लंबे बालों वाला युवा धोनी और इंडिया पहला टी-20 वर्ल्ड चैंपियन
क्रिकेट का सबसे छोटा प्रारूप यानी टी-20 इस समय अपने पूरे उफान पर था. 2007 में पहला टी-20 वर्ल्ड कप दक्षिण अफ्रीका में होना तय हुआ. सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ जैसे सीनियर खिलाड़ियों ने यह कहते हुए इसमें न खेलने का फैसला किया कि ये युवाओं का फॉरमेट है और इसमें युवा खिलाड़ियों को मौका दिया जाना चाहिए. ऐसे में टीम की कमान भी एक लंबे बालों वाले युवा खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी को सौंपी गई. धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम एक के बाद एक इतिहास बनाते हुए फाइनल तक पहुंची. जोहानिसबर्ग में 24 सितंबर 2007 को हुए फाइनल में सामने थी पाकिस्तान की टीम. पहला टी-20 वर्ल्ड कप और फाइनल भारत-पाकिस्तान के बीच. क्रिकेटप्रेमियों को भला इससे बढ़िया सौगात क्या मिल सकती थी. बीसवें ओवर तक चले रोमांचक मुकाबले में भारतीय टीम ने पांच रन से जीत दर्ज की और पहला टी-20 वर्ल्ड चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया.

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2011 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने 28 साल बाद वनडे वर्ल्ड कप जीता. (फोटो-रॉयटर्स)2011 : आमची मुंबई, 28 साल बाद फिर हाथ आया वनडे वर्ल्ड कप
साल 2011 का वर्ल्ड कप भारत में खेला गया. महेंद्र सिंह धोनी का बतौर कप्तान यह पहला वर्ल्ड कप था. घरेलू जमीन पर होने और टीम के शानदार लय में होने के चलते भारतीय टीम को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था. भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में पाकिस्तान को पीटकर फाइनल में जगह बनाई, जहां उसका सामना श्रीलंका से हुआ. यह मैच 2 अप्रैल 2011 को मुंबई के वानखेडे स्टेडियम में हुआ. श्रीलंका ने महेला जयवर्धने के शानदार शतक की बदौलत 6 विकेट पर 274 रन बनाए. जवाब में भारतीय टीम ने गौतम गंभीर के 97, धोनी के नाबाद 91 रन की बदौलत 49वें ओवर की दूसरी गेंद पर चार विकेट खोकर यह लक्ष्य हासिल कर लिया. इसी के साथ ही नुवान कुलासेकरा की गेंद पर लगाया गया धोनी का विजयी छक्का भी क्रिकेट की किताबों में अमर हो गया.

अगला वर्ल्ड कप 2023 में भारत में खेला जाएगा. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि तब टीम इंडिया की कमान विराट कोहली के ही हाथ में रहेगी या रोहित शर्मा या फिर कोई और भारत का कप्तान होगा. और अगर कमान विराट के ही हाथ रही तो क्या वो इतिहास को बदल पाएंगे. इंतजार कीजिए, अभी चार साल का वक्त बाकी है...

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