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विराट कोहली को कठिन निर्णय के बारे में पता था? खराब बल्लेबाजी ने मैनेजमेंट को दिया मौका

विराट कोहली को कठिन निर्णय के बारे में पता था? खराब बल्लेबाजी ने मैनेजमेंट को दिया मौका

विराट कोहली को वनडे टीम की कप्तानी से हटा दिया गया है. (AFP)

विराट कोहली को वनडे टीम की कप्तानी से हटा दिया गया है. (AFP)

विराट कोहली ने तीन महीने पहले खुद ही टी20 टीम की कप्तानी छोड़ दी थी. इसके बाद से उन पर वनडे की कप्तानी छोड़ने का दबाव था. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. अंत में यह फैसला बीसीसीआई और सेलेक्टर्स को करना पड़ा.

बीसीसीआई (BCCI) हमेशा से कठिन सवालों पर अपनी बात रखने और निर्णय लेने के लिए काफी सहज रहा है. लगभग 2 दशक पहले ऑस्ट्रेलिया के ट्रेवर जाेंस एक शक्तिशाली कप्तान स्टीव वॉ को आसानी से बता सकते थे कि सेलेक्शन कमेटी ने रिकी पोंटिंग के रूप में वनडे टीम का नया कप्तान चुना है. हालांकि वॉ इस फैसले से हैरान रह गए थे. इसका खुलासा उन्होंने अपनी किताब में किया था. लेकिन भारतीय क्रिकेट में सौरव गांगुली जैसे पावरफुल अध्यक्ष ने इस कठिन फैसले का रास्ता निकाल ही लिया. यहां बात हो रही है विराट कोहली को वनडे की कप्तानी से हटाए जाने की.

विराट कोहली ने तीन महीने पहले टी20 टीम की कप्तानी छोड़ने का ऐलान किया था. अब उन्हें वनडे टीम की कप्तानी से हटा दिया गया है. हालांकि यह चौंकाने वाला फैसला नहीं है. कोहली ने टी20 वर्ल्ड कप से पहले कप्तानी छोड़कर अपनी प्रतिष्ठा बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें पता था कि शक्तिशाली क्रिकेट बोर्ड में क्या कुछ चल रहा है. कोहली ने वनडे टीम की कप्तानी करने की इच्छा जताई थी, लेकिन अंत में उन्हें हटना पड़ा. कोहली ने कई बार बयानों से यह बताने की कोशिश की कि आखिर टी20 का अगला कप्तान किसे बनाया जाना जाए. यह बात कोहली के अभी भी ऊंचे कद को दिखा रही थी. यह बीसीसीआई को भी यह दिखाने की कोशिश थी कि अगर वे उन्हें बदलना चाहते हैं तो वे उन्हें बर्खास्त करें. शायद यह उनकी बड़ी गलती रही.

बीसीसीआई इससे पहले भी सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली पर कड़े निर्णय ले चुका था. ऐसे में वह इंतजार करने वाला नहीं था. राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले और एमएस धोनी ने खुद ही कप्तानी छोड़ दी थी, जब उन्हें एहसास हो गया था कि वे बर्खास्त हो सकते हैं. हालांकि इसका तर्क दिया जा सकता है कि किसी अच्छे कप्तान को ट्रॉफी जीतने से नहीं आंका जा सकता है. लिमिटेड ओवर क्रिकेट की बात करें तो कोहली को सिर्फ तीन टूर्नामेंट 2017 चैंपियंस ट्रॉफी, 2019 वनडे वर्ल्ड कप और 2021 टी20 वर्ल्ड कप में कप्तानी करने का मौका मिला. हालांकि उनका वनडे में प्रदर्शन ओवरऑल अच्छा रहा.

विराट कोहली को 2017 में वनडे का स्थायी कप्तान बनाया गया. इसके बाद से उन्होंने 17 में से 13 द्विपक्षीय सीरीज जीतीं. सिर्फ 4 में हार मिली. 2023 का वनडे वर्ल्ड कप भारत में हाेना है और यहां टीम को हराना असंभव है. हालांकि 2019 में घर में ऑस्ट्रेलिया से मिली हार एक अपवाद है. उनके वनडे की जीत का प्रतिशत सिर्फ हैंसी क्रोन्ये, रिकी पोंटिंग और क्लाइव लॉयड से कम था. हालांकि लॉयड और पोंटिंग ने वर्ल्ड कप जीते.

विराट कोहली के लिए अक्सर ये तर्क दिए जाते हैं कि एमएस धोनी की तुलना में उन्होंने कम मैच हारे. इसके अलावा टीम ने वेस्टइंडीज और श्रीलंका के अलावा SENA देशों में भी जीत हासिल की. हालांकि कोहली की अधिक चर्चा टीम सेलेक्शन को रही. जैसे हार्दिक पंड्या को अधिक समर्थन देना. इतना ही नहीं 2019 वर्ल्ड कप में हार के बाद कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल बाहर हो गए. केदार जाधव को 2 साल तक फिनिशर के रूप में तैयार किया गया और बाद में उन्होंने कप्तान का भरोसा खो दिया.

2019 वर्ल्ड कप में अंबाती रायडू के साथ हुए खराब व्यवहार के लिए सिर्फ सेलेक्शन कमेटी को दोष नहीं दिया जा सकता. कोहली ने खुद नंबर-4 के लिए रायडू का समर्थन किया. लेकिन बाद में इसे लेकर काफी विवाद हुआ. पिछले कुछ समय से विराट कोहली बल्ले से भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं. यदि रन मशीन कोहली पहले की तरह रन बनाते रहते तो शायह ही चेतन शर्मा की अगुआई वाली सेलेक्शन कमेटी इस तरह का साहसिक निर्णय कर पाती.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

Tags: BCCI, Chetan Sharma, Cricket news, Rohit sharma, Sourav Ganguly, Team india, Virat Kohli

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