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10 साल, 500 मैच...मगर बीसीसीआई ने नहीं दिया एक भी पैसा

बीसीसीआई.

बीसीसीआई.

बीसीसीआई (BCCI) के जनरल मैनेजर (क्रिकेट ऑपरेशंस) सबा करीम (Saba Karim) ने बोर्ड के आला अफसरों के समक्ष मामला ले जाने का आश्वासन दिया है.

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    नई दिल्ली. बीसीसीआई (BCCI) को दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड माना जाता है. यहां तक कि बीसीसीआई अध्यक्ष (BCCI President) सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने भी घरेलू क्रिकेटरों की आर्थिक हालत सुधारने की कवायद शुरू कर दी है. बावजूद इसके एक शख्स ऐसा भी है, जिसका भारतीय घरेलू क्रिकेट के करीब 500 मैचों में अहम योगदान है, लेकिन बीसीसीआई की ओर से उसे करीब 12 सालों से एक भी पैसा नहीं दिया गया है. हालांकि अब बीसीसीआई के जनरल मैनेजर (क्रिकेट ऑपरेशंस) सबा करीम (Saba Karim) इस मामले को बोर्ड के आला अफसरों के सामने लेकर जाएंगे.

    12 सालों में 500 से ज्यादा मैचों के नतीजे
    दरअसल, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के घरेलू क्रिकेट में करीब 12 साल से बारिश से प्रभावित मैचों का नतीजा निकालने के लिए वीजेडी पद्धति (VJD Method) का इस्तेमाल किया जा रहा है. मगर इस पद्धति को बनाने वाले वी. जयदेवन को बीसीसीआई (BCCI) की ओर से पिछले दस साल से किसी तरह की आर्थिक मदद नहीं मिली है. इसके अनुसार, वी. जयदेवन (V Jayadevan) ने कहा, 'पिछले 12 सालों में घरेलू क्रिकेट में 500 मैचों के नतीजे वीजेडी पद्धति का सफलतापूर्वक इस्तेमाल करते हुए निकाले जा चुके हैं. यहां तक कि टी-20 लीग जैसे कर्नाटक प्रीमियर लीग और तमिलनाडु प्रीमियर लीग में भी इसका इस्तेमाल किया गया है. मगर जहां तक पिछले दो दशकों के मेरे प्रयासों की बात है तो मुझे न तो किसी तरह की पहचान मिली और न ही कोई आर्थिक लाभ.'

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    कई मामलों में वीजेडी पद्धति को डकवर्थ लुइस नियम से भी बेहतर माना गया है. (फाइल फोटो)


    2007 से घरेलू क्रिकेट में हो रही है इस्तेमाल
    वी. जयदेवन (V Jayadevan) ने सीमित ओवर प्रारूप में बारिश के चलते संशोधित लक्ष्य निर्धारित करने के लिए वीजेडी पद्धति (VJD Method) बनाई थी. कई लोग इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल किए जाने वाले डकवर्थ लुइस नियम से भी बेहतर मानते हैं. बीसीसीआई ने सभी घरेलू मैचों में वीजेडी पद्धति इस्तेमाल करने की शुरुआत सितंबर 2007 में की थी. इसके बाद से 500 से ज्यादा मैचों का नतीजा वीजेडी नियम से निकाला जा चुका है. जयदेवन फिलहाल इस पद्धति को और बेहतर बनाने में जुटे हुए हैं, लेकिन पैसों की कमी ने उनका रास्ता रोक दिया है.

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    साल 2009 में तत्कालीन बीसीसीआई सचिव एन. श्रीनिवासन ने जयदेवन की पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद की थी. (फाइल फोटो)


    2009 में मिली थी 5 लाख रुपये की मदद
    रिपोर्ट के अनुसार, वी. जयदेवन (V Jayadevan) ने कहा, 'शुरुआत में मैंने इस पद्धति के विकास के लिए आर्थिक मदद मांगी थी. इसके बाद केरल क्रिकेट संघ के सचिव टीसी मैथ्यू मुझे तत्कालीन बीसीसीआई (BCCI) सचिव एन. श्रीनिवासन (N Sriniwasan) के कार्यालय ले गए थे. वहां साल 2009 में मुझे पांच लाख रुपये की मदद मिली. मगर उसके बाद से बीसीसीआई की ओर से मुझे कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई. मैं इस पद्धति को मौजूदा स्वरूप के मुकाबले और आसान बनाना चाहता हूं ताकि इसका इस्तेमाल करने में और सुविधा हो सके.'

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