इस वजह से रणजी ट्रॉफी फाइनल में जीत की 'गारंटी' है ये दबंग खिलाड़ी

वसीम जाफर ने आठ बार मुंबई तो दो बार विदर्भ टीम के लिए रणजी ट्रॉफी फाइनल खेला है और हर बार उनकी टीम को जीत मिली है.

News18Hindi
Updated: February 7, 2019, 3:51 PM IST
इस वजह से रणजी ट्रॉफी फाइनल में जीत की 'गारंटी' है ये दबंग खिलाड़ी
विदर्भ बना रणजी चैंपियन
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Updated: February 7, 2019, 3:51 PM IST
रणजी ट्रॉफी 2018-19 का खिताब विदर्भ टीम ने सौराष्‍ट्र को 78 रन से हराकर अपने नाम कर लिया है. विदर्भ का यह लगातार दूसरा रणजी खिताब है. इस जीत का हीरो स्पिनर आदित्‍य सरवटे (मैच में 11 विकेट) को चुना गया. जबकि इस दौरान विदर्भ के सबसे अनुभवी बल्‍लेबाज़ वसीम जाफर ने एक दिलचस्‍प रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. वह अब तक दस बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में शामिल हुए हैं और हर बार उनकी टीम ने बाजी मारी है.

आपको बता दें कि वसीम जाफर ने आठ बार मुंबई तो दो बार विदर्भ टीम के लिए रणजी ट्रॉफी फाइनल खेला है और हर बार उनकी टीम को जीत मिली है. इस सीजन में वसीम जाफर ने 11 मैच में 69.13 के औसत से 1037 रन बनाए हैं, जिसमें चार शतक (सर्वोच्‍च 202) और दो अर्धशतक शामिल हैं. वह इस बार मिलिंद कुमार (1331 रन, 8 मैच) के बाद दूसरे सबसे सफल बल्‍लेबाज़ हैं. दिल्‍ली के पूर्व खिलाड़ी मिलिंद अब सिक्‍कम के लिए रणजी खेलते हैं.



और बन गए इस क्‍लब का हिस्‍सा
जाफर दस बार रणजी चैंपियन टीम का हिस्‍सा बने हैं और उन्‍होंने मनोहर हार्दिकर और दिलीप सरदेसाई की बराबरी कर ली है. हालांकि सबसे अधिक बार रणजी चैंपियन टीम का हिस्‍सा होने का रिकॉर्ड अशोक मांकड़ (12) के नाम है. जबकि अजीत वाडेकर (11) दूसरे नंबर पर हैं.

वसीम जाफर


विदर्भ भी खास क्‍लब में हुई शामिल
विदर्भ ने लगातार दूसरी बार रणजी चैंपियन होने का गौरव हासिल किया है. इससे पहले महाराष्‍ट्र, दिल्‍ली, कर्नाटक (दो बार) और राजस्‍थान ऐसा कारनामा कर चुके हैं. जबकि मुंबई ने सबसे अधिक 41 बार इस खिताब पर कब्‍जा किया है.

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