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WTC Explainer: जीत-हार पर कैसे तय होते हैं अंक, फाइनल का फॉर्मूला क्या है? जानें WTC-2 की ABC

भारत ने बांग्‍लादेश के‍ खिलाफ टेस्‍ट सीरीज 2-0 से अपने नाम की. (AP)

भारत ने बांग्‍लादेश के‍ खिलाफ टेस्‍ट सीरीज 2-0 से अपने नाम की. (AP)

What is World Test Championship: विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की दूसरी साइकिल का फाइनल अगले साल जून में खेला जाना है. ऑस्ट्रे ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के पॉइंट्स टेबल में भारत दूसरे स्थान पर
WTC क्या है और इसे क्यों शुरू किया गया है?

नई दिल्ली. भारत ने एक दिन पहले बांग्लादेश को मीरपुर टेस्ट में हराया था. इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने 2 टेस्ट की सीरीज में बांग्लादेश को क्लीन स्वीप कर लिया था. इस सीरीज के बाद भारत ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के प्‍वाइंट्स टेबल में दूसरे स्थान पर अपनी पोजीशन और मजबूत कर ली. ऑस्ट्रेलिया भी 120 अंकों के साथ टॉप पर है और उसका फाइनल खेलना तय है. लेकिन, इंग्लैंड के इन दोनों टीमों से ज्यादा 124 अंक हैं. फिर वो फाइनल की रेस से बाहर है. ऐसा क्यों हैं? इसकी वजह क्या है. इस बार की विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में क्या अलग है? कैसे फाइनल में पहुंचने का फॉर्मूला तय होगा. इन सारी बातों को तफ्सील से समझेंगे.

इससे पहले, यह जान लेते हैं कि किस देश को इस बार कितने मैच खेलने थे. विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की दूसरी साइकिल में इंग्लैंड को सबसे अधिक 22 टेस्ट खेलने थे. इसमें से 11 घर में और 11 विदेश में. दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया को 19 (10 होम और 9 अवे), भारत को 18 (8 घर में, अवे 10), साउथ अफ्रीका को 15, पाकिस्तान को 14, वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड को 13-13, बांग्लादेश-श्रीलंका को 12-12 टेस्ट खेलने थे.

भारत को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की दूसरी साइकिल में 4 टेस्ट और खेलने हैं, जो अगले साल फरवरी-मार्च में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होंगे. वहीं, दक्षिण अफ्रीका को 4 टेस्ट (2 ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और बाकी दो अपने घर में वेस्टइंडीज से खेलने हैं), श्रीलंका को 2 टेस्ट खेलने हैं (न्यूजीलैंड के घऱ में). इस सीरीज में टीमों के हार-जीत से विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की प्‍वाइंट्स टेबल में बदलाव होंगे.

WTC क्या है और इसे क्यों शुरू किया गया?
इस बदलाव के बारे में जानने से पहले हम आपको इस खबर के जरिए यह बताएंगे कि आखिर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप है क्या, क्यों इसे शुरू करने का फैसला लिया गया? विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में कितने देश शामिल हैं? कितनी सीरीज खेली जाती है और कैसे जीत, हार या मैच ड्रॉ होने पर अंक मिलते हैं और पिछले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप से इस बार क्या अलग है?

तो आइए आपको सिलसिलेवार तरीके से विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की सारी बातें समझाते हैं. सबसे पहले यह कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप है क्या और क्यों शुरू हुई?

जैसा कि नाम से ही पता लग जाता है कि टेस्ट फॉर्मेट की वर्ल्ड चैंपियनशिप है. जैसा वनडे और टी20 में विश्व कप होता है. वैसे ही, इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने टेस्ट क्रिकेट को पॉपुलर और रोमांचक बनाए रखने के लिए इसकी शुरुआत की. इसमें टेस्ट की 9 टॉप टीमों को शामिल किया गया है.

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WTC में किस टीम को कितनी सीरीज खेलनी है?
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की साइकिल दो साल की होता है. इस 2 साल की अवधि में टेस्ट की टॉप-9 टीमों में से हर एक को कुल 6 सीरीज खेलनी होती है. यह सीरीज होम और अवे फॉर्मेट के हिसाब से होती है. यानी एक टीम को अपने घर में 3 और विदेश में भी इतनी टेस्ट सीरीज खेलनी होती है. सभी टीमों की निर्धारित सीरीज खत्म होने के बाद जो दो टीमें प्‍वाइंट्स टेबल में टॉप पर रहती हैं, उन्हीं के बीच फाइनल खेला जाता है.

पहली बार WTC का आयोजन 2019 से 2021 के बीच हुआ था. तब भारत और न्यूजीलैंड फाइनल में पहुंचे थे. इंग्लैंड के साउथैम्प्टन में हुए खिताबी मुकाबले में भारत को हराकर न्यूजीलैंड पहली बार टेस्ट का विश्व चैंपियन बना था.

अभी दूसरी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (2021-2023) चल रही है. इसका फाइनल जून के पहले हफ्ते में प्रस्तावित है. मुकाबला ओवल में खेला जाएगा. इस बार की साइकिल का फॉर्मेट भी पिछले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप जैसा ही है, बस, प्‍वाइंट्स सिस्टम में बदलाव हुआ है. वो क्या है, आइए आपको समझाते हैं.

पिछली बार से क्यों अलग है WTC का प्‍वाइंट्स सिस्टम?
2019 से 2021 के बीच हुई पहली विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में हर सीरीज के 120 पॉइंट तय थे. लेकिन, दूसरी साइकिल में सीरीज के बजाए हर मैच के अंक तय किए गए हैं. विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की दूसरी साइकिल में एक टेस्ट जीतने पर टीम को 12 अंक मिलते हैं, मैच ड्रॉ रहने पर 4 और टाई होने की स्थिति में 6 अंक मिलेंगे.

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क्यों प्‍वाइंट्स सिस्टम में बदलाव किया गया?
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के प्‍वाइंट्स सिस्टम में बदलाव इसलिए किया गया है ताकि ज्यादा मैचों की सीरीज खेलने वाली टीमों को अतिरिक्त फायदा ना मिले. इसे ऐसे समझ सकते हैं कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की मौजूदा साइकिल में हर टीम को 6 सीरीज (3 होम, 3 अवे) खेलनी है. लेकिन, हर सीरीज में टेस्ट मैच की संख्या बराबर नहीं होती. किसी सीरीज में 2 टेस्ट ही खेले गए हैं और किसी में पांच. ऐसे में किसी टीम को अतिरिक्त फायदा ना मिले, उसे दुरुस्त करने के लिए ही हर मैच की जीत-हार के हिसाब से अंक तय किए गए हैं.

इस बार हर मैच के अंक तय किए गए हैं
पिछली विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में हर सीरीज के कुल 120 अंक थे, जिन्हें मैचों की संख्या के अनुसार बांटा गया था. तब पांच टेस्ट की सीरीज के एक मैच जीतने पर किसी टीम को अधिकतम 24 अंक मिले थे. वहीं, 2 टेस्ट की सीरीज का मैच जीतने पर 60 अंक मिले थे. इसका मतलब यह था कि 5 टेस्ट की सीरीज की तुलना में 2 टेस्ट की सीरीज में पूरे अंक हासिल करना किसी भी टीम के लिए आसान था. इसी अनुचित फायदे को खत्म करने के लिए सीरीज के अंक निर्धारित करने के बजाए मैच के पॉइंट तय़ किए गए और फिर इसी आधार पर आईसीसी ने पर्सेंटेज प्‍वाइंट्स सिस्टम लागू किया.

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टीमें फाइनल के लिए कैसे क्वालीफाई करेंगी?
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के दूसरे साइकिल में फाइनल का रास्ता कुल अंकों से नहीं, बल्कि पर्सेंटेज प्‍वाइंट्स से तय होगा. इसे सीधे शब्दों में समझें तो आईसीसी ने टीमों द्वारा खेले गए मैचों की संख्या के असंतुलन को हटाने के लिए क्वालिफिकेशन का पैमाना अंकों के बजाए पर्सेंटेज पॉइंटस को बनाया है. यानी इससे फर्क नहीं पड़ता कि किस टीम ने कितने ज्यादा मैच जीते हैं, जिसका पर्सेंटेज पॉइंट ज्यादा होगा, वो टीम फाइनल में जाएगी. इसी वजह से इंग्लैंड के ऑस्ट्रेलिया और भारत से ज्यादा अंक होने के बावजूद वो फाइनल की रेस से बाहर है. क्योंकि उसके पर्सेंटेज प्‍वाइंट्स इन दोनों देशों से कम हैं.

बता दें कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का पहला साइकिल प्‍वाइंट्स सिस्टम के आधार पर शुरू हुआ था. लेकिन, जब यह साफ हो गया कि कोरोना के कारण सभी सीरीज पूरी नहीं कराई जा सकती, तब यह पर्सेंजेट प्‍वाइंट्स सिस्टम अस्तित्व में आया था. इसके जरिए ही पहली साइकिल को तय समय में खत्म किया जा सका था.

अब बात आती है कि पर्सेंटेज प्‍वाइंट्स कैसे कैलकुलेट किए जाते हैं? उसके बारे में आपको बताने से पहले यह बता देते हैं कि कौन सी टीम, किसके खिलाफ और कितने मैच की सीरीज खेलेगी, यह आईसीसी तय नहीं करती है. यह उस देश का क्रिकेट बोर्ड तय करता है. मैचों की संख्या भी दोनों क्रिकेट बोर्ड मिलकर तय करते हैं और आईसीसी अपने फ्यूचर टूर प्रोग्राम के हिसाब से इसे मंजूरी देती है.

पॉइंट सिस्टम और पर्सेंटेज प्‍वाइंट्स क्या है?
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की दूसरी साइकिल में एक टेस्ट जीतने पर 12 अंक, एक मैच ड्रॉ होने पर 4 और टाई होने की स्थिति में 6 अंक मिलते हैं और मैच हारने की स्थिति में कोई अंक नहीं मिलता है. अभी टीम इंडिया विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के प्‍वाइंट्स टेबल में दूसरे स्थान पर है. भारत के कुल 99 अंक हैं और 58.93 पर्सेंटेज प्‍वाइंट्स हैं. अब यह 99 अंक कैसे हैं, पहले यह आपको बता देते हैं. इसके बाद पर्सेंटेज पॉइंट समझेंगे.

भारत ने अब तक 5 टेस्ट सीरीज खेल ली है. इसमें टीम इंडिया ने कुल 14 टेस्ट खेले हैं. इसमें से 8 मैच जीते हैं, 4 हारे हैं और 2 ड्रॉ रहे हैं. भारत को 8 जीत के लिए 96 और 2 ड्रॉ के लिए 8 प्‍वाइंट्स मिले हैं. यानी टीम इंडिया के कुल 104 अंक होने चाहिए थे. लेकिन, अभी टीम इंडिया के खाते में 99 अंक ही हैं. अब सवाल यह उठेगा कि ऐसा क्यों? ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि भारतीय टीम पर धीमे ओवर रेट के कारण 5 प्‍वाइंट्स की पेनल्टी लगाई गई है. इस तरह टीम इंडिया के 104 में से पांच अंक कम होकर 99 प्‍वाइंट्स ही हैं.

अब बात करते हैं पर्सेंटेज प्‍वाइंट्स की. भारत के 58.93% परसेंटेज प्‍वाइंट्स हैं. परसेंटेज प्‍वाइंट्स क्या होता है और कैसे निकाला जाता है यह आगे समझते हैं.

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में किसी टीम के पर्सेंटेज प्‍वाइंट्सका सीधा सा मतलब यह है कि किसी टीम ने अपने लिए मुमकिन अधिकतम प्‍वाइंट्स में से कितने अंक हासिल किए हैं. तो इस लिहाज से देखें तो भारत ने अब तक 14 टेस्ट खेले हैं. एक मैच में जीत से 12 प्‍वाइंट्स मिलते हैं. यानी 14 टेस्ट मैच से भारत अधिकतम 168 प्‍वाइंट्स हासिल कर सकता था. भारत ने इनमें से 99 प्‍वाइंट्स हासिल किए हैं. यानी भारत या किसी भी टीम का पर्सेंटेज प्‍वाइंट्स अगर निकालना है तो टीम के कुल प्‍वाइंट्स को 100 से गुणा करके, उसे कुल अधिकतम अंकों से भाग दे दीजिए. तो पर्सेंटेज पॉइंट निकल आएगा. इसी आधार पर ऑस्ट्रेलिया पहले, भारत दूसरे, दक्षिण अफ्रीका तीसरे और श्रीलंका चौथे स्थान पर है.

Tags: Australia, ICC, South africa, Sri lanka, Team india, World test championship, WTC Final

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