जब गंभीर ने मैदान के बाहर भी जीता दिल, क्या नेता-क्या पार्टियां सबको ले चुके हैं आड़े हाथ

कश्मीर का मुद्दा हो या कोई सामाजिक मुद्दा या फिर राजनीति... गौतम गंभीर हर मुद्दे पर न सिर्फ अपनी राय जाहिर करते हैं बल्कि मदद का हाथ भी आगे बढ़ाते हैं.

News18Hindi
Updated: December 7, 2018, 6:52 PM IST
जब गंभीर ने मैदान के बाहर भी जीता दिल, क्या नेता-क्या पार्टियां सबको ले चुके हैं आड़े हाथ
गौतम गंभीर (फाइल फोटो)
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Updated: December 7, 2018, 6:52 PM IST
क्रिकेटर गौतम गंभीर ने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है. गंभीर ने ट्विटर और फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट के जरिए अपने रिटायरमेंट का ऐलान किया. उन्होंने ट्वीट किया, "सबसे मुश्किल फैसले भारी दिल से लिये जाते हैं. आज भारी मन से मैं वह ऐलान कर रहा हूं जिससे मैं पूरी जिंदगी डरता रहा."

गंभीर उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्होंने मैदान पर तो कारनामे किये ही, मैदान के बाहर भी उन्होंने लोगों का दिल जीता. कश्मीर का मुद्दा हो या कोई सामाजिक मुद्दा या फिर राजनीति... गंभीर हर मुद्दे पर न सिर्फ अपनी राय जाहिर करते हैं बल्कि मदद का हाथ भी आगे बढ़ाते हैं.

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जब ट्रांसजेंडर्स के समर्थन में लगाई बिंदी ओढ़ा दुपट्टा

गौतम गंभीर ने इस साल रक्षाबंधन के मौके पर दो ट्रांसजेंडर्स से राखी बंधवाई. उन्होंने ट्वीट किया, “यह मर्द या औरत होने की बात नहीं है. यह इंसान होने की बात है. दो ट्रांसजेंडर्स अभीना अहीर और सिमरन शेख ने मेरी कलाई पर राखी बांधी है. मैं उन्हें वैसे ही स्वीकार करता हूं जैसी वो हैं. क्या आप ऐसा करेंगे?" इसके बाद सितंबर में गंभीर किन्नरों के वार्षिक कार्यक्रम किन्नर अड्डा में शामिल हुए थे. इस कार्यक्रम में वह दुपट्टा ओढ़कर और बिंदी लगाकर पहुंचे थे.

गौतम गंभीर (फाइल फोटो)


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उठा रहे शहीदों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च
2017 में सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के 25 जवानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च गौतम गंभीर उठा रहे हैं. इतना ही नहीं उन्होंने इस साल आईपीएल के दौरान इन बच्चों को अपने खर्च पर एक मैच दिलवाया था.

क्या नेता-क्या पार्टियां, सबको ले चुके हैं आड़े हाथ
आतंकी मन्नान वाणी की मौत के बाद गौतम गंभीर ने उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ़्ती, कांग्रेस और बीजेपी, सभी का सिर शर्म से झुक जाना चाहिए, क्योंकि एक प्रतिभावान युवक ने किताब छोड़कर बन्दूक थाम ली. वहीं धर्म के नाम पर राजनीति को लेकर गंभीर ने आप, कांग्रेस और बीजेपी तीनों को घेरते हुए इस साल 9 अक्टूबर को ट्वीट किया था, 'आज तड़के एक किसान के घर से ख़ुदकुशी को निकलते देखा. मैं संभला ही था कि सांप्रदायिकता ने एक ज़ोर का धक्का मारा.मैं उठा तो पाया कि भूख, अपराध, डेंगू, बेरोज़गारी मुझे घेरे खड़े हैं. मैं बोला “तुम सब कब आए?” वो बोले “जब तुम मंदिर-मस्जिद कर रहे थे.”

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कठुआ मामले में ट्विटर पर जताया था गुस्सा
इतना ही नहीं गौतम गंभीर कई सामाजिक मुद्दों पर ट्विटर के जरिए आवाज उठाते हैं. इस साल की शुरुआत में कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची से गैंगरेप और हत्या के मामले में जब आरोपियों के बचाव में रैलियां निकाली जा रही थीं. तब गंभीर ने ट्वीट किया था, 'भारतीय चेतना का पहले उन्‍नाव और फिर कठुआ में बलात्‍कार किया गया. अब इसकी हमारे सड़ रहे सिस्‍टम में हत्‍या की जा रही है. मैं तुम्‍हे चुनौती देता हूं, सामने आओ मिस्‍टर सिस्‍टम हिम्‍मत है तो दोषियों को सजा दो.' इसके बाद गंभीर ने अगले ट्वीट में कहा, 'कठुआ की हमारी पीडि़त बेटी की वकील दीपिका सिंह राजावत को परेशान करने वाले और चुनौती देने वाले लोगों विशेष रूप से वकीलों को शर्म आनी चाहिए. बेटी बचाओ से अब क्या अब हम बलात्कारी बचाओ हो गए हैं?'
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