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कभी नहीं झुके धाकड़ कप्‍तान के कॉलर…कहां से आया अजहरुद्दीन का ये स्टाइल…क्‍या आप जानते हैं इसकी वजह?

मोहम्‍मद अजहरुद्दीन ने साल 1993;94 के बाद से कभी अपने कॉलर नीचे नहीं किए. (AFP)

मोहम्‍मद अजहरुद्दीन ने साल 1993;94 के बाद से कभी अपने कॉलर नीचे नहीं किए. (AFP)

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नई दिल्‍ली. भारतीय टीम के पूर्व कप्‍तान मोहम्‍मद अजहरुद्दीन (Mohammad Azharuddin) ने अपने करियर के दौरान टीम इंडिया को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. 1984 में टीम इंडिया में टेस्‍ट डेब्‍यू करने वाले अजहर ने करियर के शुरुआती तीन मैचों में लगातार शतक जड़कर सनसनी मचा दी थी. आज भी यह रिकॉर्ड अजेय है. कोई भी बैटर अपने डेब्‍यू पर ये कारनामा नहीं कर पाया है. इसके बाद कभी इस दिग्‍गज बैटर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. वो क्रिकेट जगत में दूसरे ऐसे कप्‍तान हैं जिन्‍होंने वनडे में लगातार मैचों में अपनी टीम की कमान संभाली है. अजहरुद्दीन ने लगातार 98 मैचों में भारत का नेतृत्‍व किया. इस फेहरिस्‍त में सबसे आगे 130 मैचों में कप्‍तानी करने वाले साउथ अफ्रीका के हैंसी क्रोनिए हैं.

क्‍यों खड़े रहते थे अजहरुद्दीन के कॉलर?

मोहम्‍मद अजहरुद्दीन का स्‍टाइल भी फैन्‍स के बीच काफी फेमस रहा. वो हमेशा क्रिकेट के मैदान पर कॉलर खड़े करके खेलते हुए नजर आते थे. केवल मैच के दौरान ही नहीं बल्कि ऑफ द फील्‍ड भी अजहर को किसी ने भी देखा वो खड़े कॉलर के साथ ही नजर आए. उनका यह स्‍टाइल काफी फेमस हुआ. बड़ी संख्‍या में अजहरुद्दीन के फैन्‍स ने भी इस स्‍टाइल को अपनाया. यहां यह समझना भी जरूरी है कि हमेशा से ही पूर्व कप्‍तान खड़े कॉलर के साथ मैदान पर नहीं उतरते थे. अगर उनके शुरुआती करियर को देखें तो पता चलता है कि वो कॉलर झुकाकर ही क्रिकेट खेला करते थे.

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 कप्‍तान बनने के बाद खड़े हो गए कॉलर!

ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर पूर्व कप्‍तान खड़े कॉलर के साथ ही क्‍यों मैदान उतरते थे. साल 1991 में वो कप्‍तान बने और साल 1993-94 के बाद से कभी भी अजहरुद्दीन के कॉलर नहीं झुके. क्‍या कप्‍तानी के गुरूर में भारत के इस क्रिकेटर ने अपने कॉलर को खड़ा कर लिया था? या फिर इसके पीछे की वजह  कुछ और थी. आइये हम आपको इसका कारण बताते हैं.

अजहरुद्दीन ने बताया कारण

मोहम्‍मद अजहरुद्दीन ने एक इंटरव्‍यू के दौरान बताया था कि खड़े कॉलर करने की वजह सिर्फ और सिर्फ धूप से बचना था. “1993 या 1994 से मैंने कॉलर खड़े करके खेलना शुरू कर दिया था. टीम के खिलाड़ी मजाक उड़ाते थे कि पता नहीं कौन उनकी जिंदगी में आया होगा जिसके चलते उन्‍होंने कॉलर खड़े  कर लिए हैं. मैं अक्‍सर सिली प्‍वाइंट पर फील्डिंग करता था. पीछे से तेज धूप गर्दन में लगती थी. जिसके चलते मुझे अन-इजीनेस फील होता था. जिसके चलते मैंने कॉलर खड़े करके खेलना शुरू किया. यह कॉलर अभी तक भी ऐसे ही खड़े रह गए. कल मैं कही से आ रहा था तो किसी ने कहा अजहर भाई आपका कॉलर अभी भी ऊपर ही है. मैंने उसे पूछा कि नीचे कर दूं. उसने कहा- नहीं-नहीं आप इसमें भी अच्‍छे लगते हैं.“

Tags: Cricket news, Mohammad azharuddin, Team india, Team India Captain

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