WTC Final: 55 लाख की आबादी वाले न्यूजीलैंड की 10 खूबियां, जो उसे चैंपियन बनाती हैं

न्यूजीलैंड टेस्ट की नंबर-1 टीम भी है. (AFP)

न्यूजीलैंड ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC final) का खिताब जीत लिया है. टीम टेस्ट रैंकिंग में नंबर-1 पर है और टेस्ट खेलने वाले देशों की जनसंख्या के लिहाज से सबसे छोटा देश भी. लेकिन टीम ने अपने प्रदर्शन से बड़े-बड़े दिग्गजों को पछाड़ा.

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साउथैम्पटन. न्यूजीलैंड ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब जीत लिया है. 18 से 23 अक्टूबर यानी 6 दिन तक चले मुकाबले टीम में न्यूजीलैंड ने टीम इंडिया को 8 विकेट से हराया. आईसीसी की ओर से 2019 में टूर्नामेंट की शुरुआत की गई थी. 9 टीमों को मौका दिया गया है. आईसीसी की ओर से 12 देशों को टेस्ट खेलने की मान्यता है. इसमें न्यूजीलैंड की संख्या सबसे कम लगभग 55 लाख के आस-पास है. यानी उसे सबसे छोटा देश माना जा सकता है. वहीं भारत की जनसंख्या टेस्ट खेलने वाले देशों में सबसे ज्यादा है. टीम की 10 बड़ी खूबियां इस तरह हैं:

1- लगातार दो फाइनल हारे, पर टूटे नहीं

न्यूजीलैंड टीम को 2015 और 2019 वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में हार मिली. 2015 में ऑस्ट्रेलिया ने जबकि 2019 में इंग्लैंड ने हराया. इंग्लैंड से टीम मैच टाई होने के बाद हारी. बाउंड्री काउंट नियम से इंग्लैंड चैंपियन बना. दो बड़ी हार के बाद भी खिलाड़ी टूटे नहीं.

2- बड़े नाम नहीं, लेकिन खुद पर भरोसा

न्यूजीलैंड की टीम में विराट कोहली, रोहित शर्मा, ऋषभ पंत जैसे बड़े नाम वाले खिलाड़ी नहीं हैं. लेकिन टीम को और खिलाड़ियों को अपने पर भरोसा है. फाइनल से पहले डेवॉन कॉनवे को इंग्लैंड सीरीज में मौका दिया गया. फाइनल में उन्होंने अर्धशतक लगाया. युवा काइल जेमिसन ने 7 विकेट झटके. कप्तान विलियमसन शांत स्वभाव से दो महत्वपूर्ण पारी खेली.



3- युवा नहीं, अनुभवी खिलाड़ियों को आजमाया

न्यूजीलैंड की टीम सिर्फ युवा खिलाड़ियों के दम पर यहां तक नहीं पहुंची है. डेब्यू टेस्ट में लॉर्ड्स पर दोहरा शतक लगाने वाले डेवॉन कॉनवे 29 साल के हैं. लिमिटेड ओवर में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उन्हें टेस्ट में मौका दिया गया. उन्होंने पहली पारी में न्यूजीलैंड की तरफ से सबसे ज्यादा 54 रन बनाए.

4- बोर्ड खिलाड़ियों को देता है पूरी आजादी

न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड का सालाना रेवेन्यू सिर्फ 285 करोड़ रुपए का है. इतना तो मुनाफा एक आईपीएल टीम हर सीजन में कमा लेती हैं. इस कारण बोर्ड खिलाड़ियों को दुनिया की अन्य लीग में खेलने की अनुमति देता है. इसका फायदा भी खिलाड़ियों को मिलता है.

5- मैदान पर नहीं दिखाते आक्रामकता

न्यूजीलैंड के खिलाड़ी मैदान पर आक्रामकता दिखाते कम ही देखा जाता है. वे विरोधी खिलाड़ी को उकसाते भी नहीं हैं. ऐसे में उनकी एकाग्रता खत्म नहीं होती. दूसरी ओर टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली मैदान पर आक्रामकता के लिए जाने जाते हैं.

6- टीम की बेहतरीन प्लानिंग

वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के पहले टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेली. इससे उसे इंग्लैंड की पिच और ड्यूक बॉल से तैयारी का समय मिल गया. दूसरी ओर टीम इंडिया टी20 खेलकर फाइनल में उतरी. फाइनल से पहले सिर्फ इंट्रा स्क्वॉयड के मैच खेले.

7- घरेलू क्रिकेट का इंफ्रास्ट्रक्चर शानदार

न्यूजीलैंड के घरेलू क्रिकेट का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद शानदार है. वहां की नेशनल एकेडमी की सुविधाएं भारत के एनसीए से काफी अच्छी हैं. इस कारण वहां पर खिलाड़ियों को तैयारी से लेकर उनकी चोट पर विशेष नजर रखी जाती है.

8- कम इंटरनेशनल मैच, इसलिए खिलाड़ी फ्रेश

न्यूजीलैंड की टीम भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों की अपेक्षा कम इंटरनेशनल मुकाबले खेलती है. इस कारण उनसे अधिक खिलाड़ी अधिक फ्रेश और कम चोटिल होते हैं. पिछले 3 साल में उसने टीम इंडिया से 34 इंटरनेशनल मैच कम खेले हैं.

9- अगल-अलग लीग में खेलने का फायदा

न्यूजीलैंड के खिलाड़ी दुनिया की अन्य लीग में खेलते हैं. इस कारण उन्हें वहां की परिस्थितयों को समझने में अधिक कठिनाई नहीं होती है. इसका फायदा उन्हें फाइनल में भी मिला. भारतीय खिलाड़ियों को विदेशी लीग में खेलने की अनुमति नहीं है.

10- खिलाड़ियों पर भरोसा, फाइनल में मिला नतीजा

न्यूजीलैंड के सीनियर बल्लेबाज रॉस टेलर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में सिर्फ तीन अर्धशतक लगा सके. इसके बाद भी उन्हें फाइनल में मौका दिया गया. उन्हाेंने 47 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली. दूसरी ओर टीम इंडिया ने दो दोहरा शतक लगाने वाले ओपनर मयंक अग्रवाल को मौका नहीं दिया.

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