गोल-गप्‍पे बेचने वाले खिलाड़ी ने टीम इंडिया को दिलाई शानदार जीत

भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम ने पांचवें और निर्णायक वनडे मैच में को श्रीलंका को आठ विकेट से हराकर पांच मैचों की वनडे सीरीज 3-2 से अपने नाम कर ली.

News18Hindi
Updated: August 10, 2018, 10:44 PM IST
गोल-गप्‍पे बेचने वाले खिलाड़ी ने टीम इंडिया को दिलाई शानदार जीत
यशस्वी जायसवाल
News18Hindi
Updated: August 10, 2018, 10:44 PM IST
सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल (नाबाद 114) के शानदार शतक के दम पर भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम ने पांचवें और निर्णायक वनडे मैच में शुक्रवार को श्रीलंका को आठ विकेट से हराकर पांच मैचों की वनडे सीरीज 3-2 से अपने नाम कर ली. मेजबान श्रीलंका ने यहां ताइरोने फर्नाडो स्टेडियम में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर 212 रन का स्कोर बनाया, जिसे भारत ने 42.4 ओवर में दो विकेट खोकर हासिल कर लिया.

जायसवाल ने 128 गेंदों पर आठ चौके और तीन छक्के लगाए. इसके अलावा देवदत्त पडिकल ने 48 गेंदों पर छह चौकों की मदद से 38 और पवन शाह ने 45 गेंदों पर तीन चौकों और एक छक्के सहारे 36 रन का योगदान दिया. कप्तान आर्यन जुयाल ने नाबाद 22 रन बनाए.

श्रीलंका के लिए लक्षिता मानसिंगे और अविस्का लक्षण को एक-एक विकेट मिला.

इससे पहले, श्रीलंका की टीम भारत की कसी गेंदबाजी के सामने नौ विकेट पर 212 रन ही बना सकी.

मेजबान टीम के लिए विकेटकीपर बल्लेबाज निरोशन डिकवेला शतक बनाने से चूक गए. उन्होंने 137 गेंदों पर सात चौकों की बदौलत 95 रन बनाए. नोवानिदु फर्नाडो ने 68 गेंदों पर पांच चौके और एक छक्का लगाया तथा 50 रन की पारी खेली. टीम के सात बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके.

भारत की ओर से मोहित जांगड़ा ने 30 रन देकर सर्वाधिक दो विकेट लिए. इसके अलावा अजय देव गौड़, सिद्वार्थ देसाई, हर्ष त्यागी, आयुष बदौनी और समीर चौधरी को एक-एक विकेट मिला.

यशस्‍वी का संघर्ष
यशस्वी जायसवाल...ये उस क्रिकेटर का नाम है जो मुंबई के मुस्लिम यूनाइटेड क्लब के गार्ड के साथ तीन साल तक टेंट में रहा. यशस्वी इससे पहले डेयरी में काम करता था और वहीं सोता था लेकिन वहां से उसे भगा दिया गया. यशस्वी उस वक्त 11 साल का था...उसने ये मुश्किल वक्त सिर्फ एक सपने के सहारे काट लिया- वो था एक दिन भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलना.

दो भाइयों में छोटा यशस्वी उत्तर प्रदेश के भदोही का रहने वाला है. मुंबई में यशस्वी के चाचा का घर इतना बड़ा नहीं था कि वो उसे साथ रख सकें. इसलिए चाचा ने मुस्लिम यूनाइटेड क्लब से अनुरोध किया कि वो यशस्वी को टेंट में रहने की इजाज़त दें.

अगले तीन साल के लिए वो टेंट ही यशस्वी के लिए घर बन गया. पूरी कोशिश यही होती कि मुंबई में उनकी संघर्ष से भरी ज़िंदगी की बात मां-बाप तक नहीं पहुंचे. अगर उनके परिवार को पता चलता तो क्रिकेट करियर का वहीं अंत हो जाता. उनके पिता कई बार पैसे भेजते लेकिन वो कभी भी काफी नहीं होते. राम लीला के समय आज़ाद मैदान पर यशस्वी ने गोल-गप्पे भी बेचे. लेकिन इसके बावजूद कई रातों को उन्हें भूखा सोना पड़ता था.
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर