कोहली के निशाना साधने के बाद छलका पुजारा का दर्द, कहा-कोई भी मेरे जैसा नहीं बनना चाहता, मैं मनोरंजन के लिए नहीं खेलता

टीम इंडिया के भरोसेमंद बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा हालिया समय में अपनी धीमी बल्लेबाजी को लेकर निशाने पर रहे हैं.

न्यूजीलैंड (New Zealand) के खिलाफ टेस्ट सीरीज (Test Series) में धीमी बल्लेबाजी को लेकर कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) ने चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) की परोक्ष रूप से आलोचना की थी.

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    नई दिल्ली. भारतीय टीम (Indian Team) के टेस्ट बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) इन दिनों अपनी बल्लेबाजी को लेकर सुर्खियों में हैं. या यूं कहा जाए कि अपनी धीमी बल्लेबाजी को लेकर. न्यूजीलैंड (New Zealand) के खिलाफ वेलिंगटन टेस्ट के बाद तो भारतीय कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) के सब्र का बांध भी टूट गया था और उन्होंने सार्वजनिक रूप से पुजारा की धीमी बल्लेबाजी पर सवाल खड़े कर दिए थे. दरअसल, इस मैच में पुजारा ने पहली पारी में 42 गेंद पर 11 रन बनाए थे, जबकि दूसरी पारी में 81 गेंद पर 11 रनों की पारी खेली ‌थी. यहां तक कि क्राइस्टचर्च में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी पुजारा ने 54 रनों के लिए 140 और 24 रनों के लिए 88 गेंदें खेली ‌थीं. अब इस मामले में पुजारा का दर्द छलक आया है.

    चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) की मौजूदगी में सौराष्ट्र (Saurashtra) की टीम ने बंगाल (Bengal) को हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) खिताब अपने नाम किया. इस मैच में पुजारा ने एक बार फिर धीमी, लेकिन अहम पारी खेली. पुजारा ने 237 गेंद पर 66 रन बनाए थे. पुजारा ने खुलासा किया कि रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनने के बाद टीम ने शानदार तरीके से इसका जश्न मनाया. शाम को पार्टी की गई और फिर अगले दिन वो फिल्म भी देखने गए.

    मौजूदा वक्त में कोई भी बल्लेबाज मेरे जैसा नहीं बनना चाहता

    इंडियन एक्सप्रेस
    से बातचीत में चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) ने अपनी बल्लेबाजी के अहम पहलुओं पर रोशनी डाली. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि मौजूदा वक्त में कोई भी उनके जैसा बल्लेबाज नहीं बनना चाहता तो उन्होंने बड़ी साफगोई से कहा, 'जी हां, मैं इससे सहमत हूं. लेकिन युवा पीढ़ी मेरे खेल को समझती है. और फिर टेस्ट मैच अब बहुत कम खेले जा रहे हैं. ऐसे में जबकि सीमित ओवर प्रारूप के मैचों की संख्या बढ़ रही है तो युवा पीढ़ी मेरी बल्लेबाजी शैली को नहीं अपनाते क्योंकि वो टेस्ट क्रिकेट के अधिक मुफीद है. ऐसा नहीं है कि मैं तेज नहीं खेल सकता. मैं सीमित ओवर प्रारूप में भी खेल सकता हूं. अधिकतर लोगों ने मुझे सफेद गेंद से खेलते हुए टीवी पर नहीं देखा है.'

    पिच के हिसाब से पारी को आगे बढ़ाना होता है
    भारत की टेस्ट टीम (Indian Test Team) के अहम बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) से बंगाल (Bengal) के खिलाफ रणजी ट्रॉफी फाइनल (Ranji Trophy Final) में खेली गई पारी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि आपको पिच के हिसाब से अपनी पारी को आगे बढ़ाना होता है. पुजारा के अनुसार, 'पहली पारी में मैंने करीब 60 रन बनाने के लिए 200 से अधिक गेंदें खेली. मगर टीम के मेरे साथी और मैं जानता था कि पिच कितनी मुश्किल थी. वो फाइनल था और मुझ पर जिम्मेदारी ‌थी. हालात के हिसाब से धीमा खेलने को लेकर मेरी बल्लेबाजी में कोई कमी नहीं है. अगर मुझे ये बात पता है कि पिच मुश्किल है और मैं अपने शाॅट नहीं खेल सकता तो मैं ऐसा नहीं करूंगा. न्यूजीलैंड (New Zealand) में भी हालात ऐसे ही थे.'

    मेरा काम किसी का मनोरंजन करना नहीं, अपनी टीम के लिए मैच जीतना है
    चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) ने साथ ही कहा कि वो सोशल मीडिया के लिए बल्लेबाजी नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, 'सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने वाले अधिकतर लोग मेरा खेल और टेस्ट क्रिकेट नहीं समझते, क्योंकि वे अधिक वनडे और टी20 क्रिकेट देखते हैं. कृपया इस बात को समझिए, मेरा लक्ष्य किसी का मनोरंजन करना नहीं है, बल्कि अपनी टीम के लिए मैच जीतना है. चाहे वो भारतीय टीम हो या फिर सौराष्ट्र की. किसी दिन मैं तेज खेलता हूं तो किसी दिन धीमा. मैं क्रिकेट प्रशंसकों का सम्मान करता हूं. मैं ऐसा खिलाड़ी नहीं हूं जो छक्के लगाता है. मैं सोशल मीडिया को नजरअंदाज करने की कोशिश करता हूं. जब मैं खेल रहा होता हूं तो सोशल मीडिया पर ध्यान नहीं देता. मैं मनोरंजन के लिए बल्लेबाजी नहीं करता.'

     

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