होम /न्यूज /खेल /बॉलर बेदम,आखिर कैसे भरे टीम इंडिया जीत का दम?

बॉलर बेदम,आखिर कैसे भरे टीम इंडिया जीत का दम?

पाकिस्तान के खिलाफ पहले टी-20 में हार ने टीम इंडिया की कमजोरी को खुलकर सामने रख दिया है। इस मैच में बल्लेबाज तो फ्लॉप हुए ही, गेंदबाजों ने भी लुटिया डुबोने में कसर नहीं रखी।

पाकिस्तान के खिलाफ पहले टी-20 में हार ने टीम इंडिया की कमजोरी को खुलकर सामने रख दिया है। इस मैच में बल्लेबाज तो फ्लॉप हुए ही, गेंदबाजों ने भी लुटिया डुबोने में कसर नहीं रखी।

पाकिस्तान के खिलाफ पहले टी-20 में हार ने टीम इंडिया की कमजोरी को खुलकर सामने रख दिया है। इस मैच में बल्लेबाज तो फ्लॉप ह ...अधिक पढ़ें

    नई दिल्ली। पाकिस्तान के खिलाफ पहले टी-20 में हार ने टीम इंडिया की कमजोरी को खुलकर सामने रख दिया है। इस मैच में बल्लेबाज तो फ्लॉप हुए ही, गेंदबाजों ने भी लुटिया डुबोने में कसर नहीं रखी। वो तो भुवनेश्वर कुमार ने बचा लिया, नहीं तो टीम इंडिया की और बुरी गत बनती। इस हार ने टीम इंडिया में गेंदबाजों को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।

    खास बात ये है कि टी-20 में विपक्षी टीम ने लगातार दूसरी बार आखिरी गेंद पर छक्का मारकर अपनी टीम को जिताया। इससे जाहिर होता है कि भारत की गेंदबाजी किस कदर कमजोर हो चुकी है। बेशक भारत की मजबूती उसकी बल्लेबाजी ही रही है, लेकिन टीम में हमेशा कुछ ऐसे गेंदबाज रहे हैं जिन्होंने टीम को जिताने में अहम योगदान दिया। कभी रिवर्स स्विंग गेंदबाजों ने टीम को जिताया तो कभी स्पिनरों ने मैच का रुख मोड़ा। लेकिन अब टीम स्ट्राइक गेंदबाजों के लिए ही तरस रही है।

    कहां गए रिवर्स स्विंग गेंदबाज?
    टीम इंडिया में हमेशा कुछ ऐसे रिवर्स स्विंग गेंदबाज रहे जिन्होंने विपक्षी बल्लेबाजों की नाक में दम किए रखा। 80 के दशक में कपिल देव, 90 के दशक में श्रीनाथ और साल 2000 में अजीत अगरकर और जहीर खान जैसे गेंदबाजों ने भारत के लिए ये काम बखूबी किया। लेकिन जहीर खान की बढ़ती उम्र और घटती फिटनेस ने टीम इंडिया को मझधार में लाकर खड़ा कर दिया है। जब नए दौर के गेंदबाज आए तो लगा कि अब टीम को मजबूत सहारा मिलेगा। लेकिन ये उम्मीद भी जल्दी ही टूट गई।

    तेज गेंदबाजों ने किया नाउम्मीद

    पिछले कुछ सालों में टीम के लिए खेल चुके गेंदबाजों ने शुरुआत में उम्मीद की किरण तो जगाई, लेकिन जल्द ही नाकामी के अंधेरे में गुम हो गए। इनमें आर पी सिंह, मुनफ पटेल, आशीष नेहरा, प्रवीण कुमार जैसे गेंदबाजों को शुमार किया जा सकता है। अच्छी शुरुआत के बावजूद ये गेंदबाज टीम में लंब समय तक टिक नहीं सके। फिर वो दौर भी आया जब टीम में तेज गेंदबाजों की पौध आई। तब लगा कि भारत भी तेज गेंदबाज पैदा कर सकता है। इशांत शर्मा, उमेश यादव, वरुण एरोन जैसे गेंदबाजों ने 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ज्यादा गेंद फेंककर एक सुकून का अहसास कराया। टीम इंडिया में तेज गेंदबाजी के भविष्य का आधार तैयार किया। लेकिन जल्द ही ये सभी फिटनेस और फॉर्म की भुलभुलैया में खो गए।

    फिटनेस की समस्या
    खास बात ये है कि सभी उभरते तेज गेंदबाज फिटनेस की वजह से टीम से बाहर हो गए। इशांत शर्मा ने अत्याधिक क्रिकेट के चलते पहले फॉर्म गंवाया फिर फिटनेस भी खो बैठे। उमेश शर्मा का प्रदर्शन कभी एक सा नहीं रहा। वरुण एरोन तो टीम में आते ही चोटिल हो गए और अब तक वापसी नहीं कर सके हैं। प्रवीण कुमार भी चोट के चलते टीम से बाहर हैं। जहीर खान भी फिटनेट और फॉर्म दोनों समस्याओं से जूझ रहे हैं।

    स्पिनर भी बेदम
    जब से भारत ने क्रिकेट खेलना शुरू किया है तब से स्पिनर उसकी ताकत रहे हैं। स्पिनरों को दम पर ही टीम इंडिया ने कई बड़े खिताब अपने नाम किए और टेस्ट क्रिकेट में मुकाम बनाया। वेंकटराघवन, बिशन सिंह बेदी, ई प्रसन्ना से लेकर अनिल कुंबले और हरभजन सिंह तक हर स्पिनर ने टीम इंडिया को नए मुकाम तक पहुंचाया। लेकिन अब हालात जुदा हैं, टीम एक अदद क्वॉलिटी स्पिनर के लिए तरस रही है। इसके उलट विदेश टीमों के पास कम से कम एक शानदार स्पिनर है जो खेल का पासा पलट देता है। इंग्लैंड के पास ग्रीम स्वान, वेस्टइंडीज के पास सुनील नारायण, श्रीलंका के पास मेंडिस और पाकिस्तान के पास सईद अजमल जैसे टॉप क्लास के स्पिनर हैं। लेकिन टीम इंडिया स्पिनर के नाम पर पार्ट टाइम गेंदबाजों से काम चला रही है। हरभजन सिंह टीम से बाहर हो चुके हैं, आर अश्विन और प्रज्ञान ओझा में वो बात नहीं है जो टीम को जीत दिला सके।

    पार्ट टाइम गेंदबाज कैसे जिताएंगे?
    जाहिर है टीम इंडिया के सामने बेशुमार चुनौतियां हैं। वर्ल्ड कप जीतने के बाद टीम अब तक चैंपियन जैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई तो इसके पीछे भी गेंदबाजों की नाकामी ही है। हमारे गेंदबाज टेस्ट में दो बार विपक्षी टीम को हराने का माद्दा नहीं रखते। अगर बल्लेबाज फ्लॉप हो जाएं तो गेंदबाज भी बेबस नजर आते हैं। पाकिस्तान के खिलाफ हुए पहले टी-20 में विशेषज्ञ गेंदबाजों की जगह पार्ट टाइम गेंदबाज खेल रहे थे। युवराज सिंह, विराट कोहली और रवींद्र जडेजा से मैच जिताऊ गेंदबाजी की उम्मीद बेमानी ही है। तेज गेंदबाजी में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। अशोक डिंडा अब तक खुद को साबित नहीं कर सके हैं, इशांत वापसी के लिए संघर्ष कर रहे हैं जबकि भुवनेश्वर कुमार ने अभी अपना पहला ही मैच खेला है।

    टी-20 मुकाबला जितना बल्लेबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण है उतना ही गेंदबाजों के लिए भी। एक ओवर ही मैच का रुख पलट सकता है। अगर दो-तीन विकेट मिल जाए तो गेंदबाज हावी हो जाते हैं। लेकिन टीम इंडिया के मौजूदा गेंदबाजों में ये माद्दा नजर नहीं आता। ऐसे में ये उम्मीद लगाना कि गेंदबाज मैच का रुख पलटकर रख देंगे, बेमानी सा लगता है।

    Tags: Cricket, Pakistan, Umesh yadav, Zaheer Khan

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें