विश्व कप क्रिकेट डायरी: चैनल 9 का हश्र


Updated: February 24, 2015, 11:03 AM IST
विश्व कप क्रिकेट डायरी: चैनल 9 का हश्र
करीब बीस साल पहले ऑस्ट्रेलिया में हो रहे क्रिकेट मैच देखने का सबसे ज्यादा लोभ होता था चैनल नाइन। रिची बेनो कमेंट्री करते थे और खेल का मजा दोगुना हो जाता था।

करीब बीस साल पहले ऑस्ट्रेलिया में हो रहे क्रिकेट मैच देखने का सबसे ज्यादा लोभ होता था चैनल नाइन। रिची बेनो कमेंट्री करते थे और खेल का मजा दोगुना हो जाता था।

  • Last Updated: February 24, 2015, 11:03 AM IST
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IBNkhabar exclusive


सिडनी। करीब बीस साल पहले ऑस्ट्रेलिया में हो रहे क्रिकेट मैच देखने का सबसे ज्यादा लोभ होता था चैनल नाइन। रिची बेनो कमेंट्री करते थे और खेल का मजा दोगुना हो जाता था। तब यह भी बात मन में आती थी कि क्या कभी हमारे यहां ऐसा कोई चैनल होगा।

क्या शानदार कवरेज होता था कि रात ढाई बजे भी जाग कर मैच देखने में कोई मुश्किल पेश नहीं आती थी। चैनल-नाइन का कवरेज सपने की तरह लगता था। यहां आए पूरे दो हफ्ते होने आए हैं, मगर एक भी जगह चैनल-नाइन देखने को नहीं मिला है। कुछ लोगों से पूछा भी तो जवाब आया ''जैसे अपने यहां दूरदर्शन है, वैसे ही यहां चैनल नाइन है। सिर्फ ऑस्ट्रेलिया के ही मैच दिखाते हैं।

फिर जब कपिल देव, सौरव गांगुली, शोएब अख्तर, संजय मांजरेकर और गावस्कर जैसे हिंदी में बोल रहे हों तो चैनल-नाइन क्यों लेना। आम भारतीय परिवार में हिंदी के चैनल ही चलते हैं। जिन्हें ऑस्ट्रेलिया के अलावा मैच देखने होते हैं वे भी हमारे चैनल का ही सहारा लेते हैं।

कहने को यह परदेस है, लेकिन आपको अगर अंग्रेजी नहीं आती है तो भी आप यहां से वहां आराम से भटक सकते हैं। हिंदी बोलने और समझने वाले इतने हैं कि आप का काम आराम से चल जाता है। मेलबर्न और एडिलेड में तो यही देखा है। कल पर्थ जा रहा हूं, देखता हूं वहां कितनी इंग्लिश बुलवाते हैं।

ये दोस्ती, हम नहीं तोड़ेंगे
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भारत-साउथ अफ्रीका मैच से बाहर निकला तो देखा थोड़ी दूर पर कुछ युवक भारत और पाकिस्तान के झंडे आपस में बांधकर यहां से वहां दौड़ लगा रहे हैं। कुछ ने पाकिस्तान की जर्सी पहन रखी थी तो कुछ ने भारत की। ये लोग मैच शुरू होने के पहले से वहां थे और जब साड़ी भीड़ छंट गई तब भी वहीँ झंडा लिए दौड़ रहे थे।

पूछने पर कादिर खान ने बताया कि 'खेल के नाम पर दोनों मुल्कों में बहुत ज्यादा तनाव हो जाता है। सिडनी में तो इतनी मार-कूट हुई कि अस्पताल ले जाना पड़ा। बस हम लोग इसी का विरोध कर रहे हैं। खेल को बस खेल तक ही रहने दें, अपने मन में खारिश की तरह नहीं आने दें। सियासत करने वालों का तो काम ही हमें आपस में लड़ाना है। मगर हम तो समझ और भाईचारे से काम लें। हार-जीत को इज्जत से नहीं जोड़ें। हमारी इसी कोशिश का नतीजा है कि एडिलेड और मेलबर्न में कोई झगड़ा नहीं हुआ।

इलाहाबाद में जन्मे और मेलबर्न में रह रहे विजय चौधरी कहते हैं, हम यहां भाई-चारे की बात करने के लिए ही जमा होते हैं। हम लोगों ने दोस्ती के लिए संगठन बना रखा है, जिसमें इसी विचार के लोग शामिल होते हैं। यही चाहते हैं कि सभी जगह यह बात पहुंचे। हम कहने को अलग मुल्क के हैं, हमारी जड़ें तो एक ही हैं। तो फिर झगड़ना कैसा। लोग अगर खेल के नाम पर झगड़ा करते हैं तो हम खेल के जरिए भारत-पाकिस्तान के बीच दोस्ती की बात करते हैं।

अच्छी बात यह थी कि इन युवाओं की इस कोशिश को लोगों से भी सराहना मिल रही है। तभी तो कोई ठंडा दे रहा था उन्हें तो कोई अपनी टी-शर्ट। उम्मीद करें ये कोशिश परवान चढ़ेगी।

बाहर गए तो बाहर ही कर दिया!

बांग्लादेश के गेंदबाज को होटल से रात भर बाहर रहने की यह सजा मिली कि उसका बोरिया बिस्तर ही बांध दिया गया है। बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया के बीच बारिश की वजह से मैच नहीं हो पाया। इस छुट्टी का मजा लेने के लिए बांग्लादेशी तेज गेंदबाज अल-अमिन हुसैन होटल से बाहर निकले तो रात भर वापस ही नहीं लौटे।
निगरानी करनेवाले स्टाफ ने इसकी शिकायत की तो आईसीसी की कमिटी ने हुसैन को वर्ल्ड-कप छोड़ कर जाने की सजा सुना दी। हुसैन को आज या कल में घर भेज दिया जाएगा। आमतौर पर खिलाड़ी अगर होटल से बाहर जाते हैं तो उन्हें पहले से इजाजत लेना होती है। उस पर भी रात साढ़े दस बजे के बाद यह छूट नहीं मिलती है। बांग्लादेश के मैनेजर ने माना कि हुसैन ने पहले से मजूरी नहीं ली थी।


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First published: February 24, 2015, 11:03 AM IST
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