क्या 2011 से भी बेहतर है मौजूदा टीम इंडिया?

वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के मौजूदा फॉर्म को देखकर लग रहा है कि वाकई में ये टीम साल 2011 के वर्ल्ड कप की टीम से भी बेहतर है।

विमल कुमार@Vimalwa
Updated: March 11, 2015, 1:09 PM IST
विमल कुमार@Vimalwa
Updated: March 11, 2015, 1:09 PM IST
मेलबर्न। वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के मौजूदा फॉर्म को देखकर लग रहा है कि वाकई में ये टीम साल 2011 के वर्ल्ड कप की टीम से भी बेहतर है। हालांकि कागजों में ये थोड़ी कमजोर लग रही है। इस टीम की औसत उम्र करीब 27 साल है। इनके बल्लेबाज़ों के पास करीब 30 हजार रनों का अनुभव और इनका औसत करीब 40 का और स्ट्राइक रेट 88 का है। साथ ही 48 शतक और 178 अर्धशतक का अनुभव इस युवा टीम के पास है। लेकिन अगर 2011 की टीम से इसकी तुलना करें तो उस टीम के पास करीब 2000 मैचों का अनुभव, 50 हजार से ऊपर रन, 99 शतक और 273 अर्धशतक का अनुभव था।

साथ ही 2011 की टीम में तेंदुलकर, सहवाग, गंभीर, जहीर ,नेहरा, युवराज सिंह और हरभजन जैसे धुरंधर खिलाड़ी थे जिनमें गंभीर को छोड़कर बाकि 5 ने 2003 के वर्ल्ड कप का फाइनल भी खेला था। जबकि मौजूदा टीम में सिर्फ 4 खिलाड़ी को वर्ल्ड कप में खेलने का अनुभव है। वैसे बल्लेबाजी के मोर्चे पर अब तक इस टीम ने निराश नहीं किया है।

वहीं अगर फील्डिंग की बात की जाए तो 2011 की टीम की फील्डिंग बेहद साधारण थी। 4 साल पहले वर्ल्ड चैंपियन बनने वाली टीम बाकि पुरानी चैंपियन टीमों से फील्डिंग की तुलना में सबसे कमजोर थी। लेकिन, मौजूदा टीम इस मामले पर भारतीय इतिहास की सबसे ताकतवर फील्डिंग यूनिट में से एक है। इस टीम में धवन, रहाणे,रोहित, कोहली, रैना, रायडू और यहां तक मोहित शर्मा समेत कई ऑल राउंडर फील्डर हैं जो इनर सर्किल में भी तेज तर्रार है और बाउंडी पर भी रन रोकने में माहिर है।

बता दें कि क्लाइव लॉयड(1975 और 1979) और रिकी पोटिंग( 2003 और 2007) वन-डे क्रिकेट के इतिहास में सिर्फ दो ऐसे कप्तान रहें हैं जिन्होंने वर्ल्ड कप ट्रॉफी डिफेंड की है। दिलचस्प बात ये है कि इन दोनों कप्तानों के पास वन-डे इतिहास की बेहद असाधारण गेंदबाजी आक्रमण था।

वहीं धोनी के पास 2011 में ज़हीर खान, हरभजन सिंह, आशीष नेहरा और मुनाफ पटेल जैसे गेंदबाज थे लेकिन दूसरे सबसे कामयाब गेंदबाज टीम के लिए पार्ट टाइमर युवराज साबित हुए। लेकिन, 2015 में कमजोर समझे जाने वाली गेंदबाजी ने हर किसी को हैरान करते हुए लगातार 5 मैचों में विरोधी को ना सिर्फ ऑल आउट किया है बल्कि 1 मैच को छोड़ दिया जाए तो बाकि 4 मैचों में 250 से नीचे समेटा है।

साल 2011 में ग्रुप मैचों में टीम इंडिया ने बांग्लादेश को आसानी से हराया लेकिन इंग्लैंड जैसी टीम को हराने में नाकाम रहे। अपने ग्रुप की सबसे मजबूत टीम साउथ अफ्रीका से वो नागपुर में बेहद कड़ा मुकाबला करने के बावजूद हार गए। इसके बाद ऑयरलैंड और हॉलैंड के खिलाफ आसान जीत दर्ज की लेकिन वेस्टइंडीज़ के साथ आखिरी लीग मुकाबले में एकदम हार के नजदीक जाकर जीतने में कामयाब रहे।

लेकिन, इसके बाद अगले तीन मुकाबलों में पहले ऑस्ट्रेलिया, फिर पाकिस्तान और आखिर में श्रीलंका को मात देकर टीम इंडिया ने इतिहास रच दिया। इस बार भी फॉर्मेट वही है। अगर टीम इंडिया ने शुरुआती दौर की कामयाबी बरकरार रखा तो चुनौती 2011 की तरह 2015 में नॉकआउट मैचों की होगी।
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भले ही मौजूदा टीम ने लीग मैचों में शानदार खेल दिखाया है लेकिन इनका असली इम्ताहन तो नॉक आउट दौर में ही शुरु होगा। अगर उसमें ये टीम कामयाब होती है तो तभी इसे 2011 से बेहतर टीम कहा जा सकता है।

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First published: March 11, 2015, 1:09 PM IST
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