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अपने ही देश में अकेले हो गए हैं ऑस्ट्रेलियाई

अपने ही देश में अकेले हो गए हैं ऑस्ट्रेलियाई

अपील तो माइकल क्लार्क ने की थी, भारतीयों ने सुन ली। सिडनी की हर बस, ट्रैन में से बस यही आवाज आ रही है 'जीतेगा, भई जीतेगा, इंडिया जीतेगा। भारत माता की जय!

अपील तो माइकल क्लार्क ने की थी, भारतीयों ने सुन ली। सिडनी की हर बस, ट्रैन में से बस यही आवाज आ रही है 'जीतेगा, भई जीतेगा, इंडिया जीतेगा। भारत माता की जय!

अपील तो माइकल क्लार्क ने की थी, भारतीयों ने सुन ली। सिडनी की हर बस, ट्रैन में से बस यही आवाज आ रही है 'जीतेगा, भई जीतेगा, इंडिया जीतेगा। भारत माता की जय!

    सिडनी। अपील तो माइकल क्लार्क ने की थी, भारतीयों ने सुन ली। सिडनी की हर बस, ट्रैन में से बस यही आवाज आ रही है 'जीतेगा, भई जीतेगा, इंडिया जीतेगा। भारत माता की जय! 'डिब्बे के किसी कोने से नारा गूंजता है और ना जाने किस किस कोने से आवाजें आ कर मिल जाती हैं। ऐसा नहीं है कि भारतीयों के लिए अलग से कोई ट्रैन या बस हो। ऑस्ट्रेलियाई भी बैठे हैं मगर बेचारे चूं तक नहीं कर रहे हैं। वाकई भीड़ तो बहुत देखी है लेकिन ऐसा कभी नहीं देखा कि दूसरे देश में परदेशी इस कदर हावी हो जाएं। लग तो यह रहा है कि जैसे ऑस्ट्रेलियाई अपने ही देश में अकेले हो गए हों।

    सिडनी क्रिकेट स्टेडियम खचाखच भरा हुआ है। जहां देखो भारतीय चेहरे नजर आ रहे हैं। हां, बांग्लादेशी और श्रीलंकावाले जरूर भारत के खिलाफ हैं, इसलिए ऑस्ट्रेलिया का साथ देने आए हैं। साफ कह रहे हैं कि भारत की हार देखने आए हैं। फिर भी ये इतने कम हैं कि नक्कारखाने में तूती तो फिर भी सुनाई दे सकती है।

    Tags: Australia, India, Sydney

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