केवल इंदौर लिखने से देवधर का खत पहुंच गया था मुश्ताक को!

भारतीय क्रिकेट के शुरूआती समय के दिग्गज बल्लेबाज मुश्ताक अली अपने शहर इंदौर में इतने मशहूर थे कि बिना पते का पत्र आसानी से उनके घर पहुंच जाया करते थे।

भाषा
Updated: September 30, 2015, 12:36 PM IST
केवल इंदौर लिखने से देवधर का खत पहुंच गया था मुश्ताक को!
भारतीय क्रिकेट के शुरूआती समय के दिग्गज बल्लेबाज मुश्ताक अली अपने शहर इंदौर में इतने मशहूर थे कि बिना पते का पत्र आसानी से उनके घर पहुंच जाया करते थे।
News18india.com
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Updated: September 30, 2015, 12:36 PM IST
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के शुरूआती समय के दिग्गज बल्लेबाज मुश्ताक अली अपने शहर इंदौर में इतने मशहूर थे कि बिना पते का पत्र आसानी से उनके घर पहुंच जाया करते थे। दरअसल हुआ यूं कि जब एक बार महान प्रो. डीबी देवधर ने उनके नाम के आगे केवल इंदौर लिखकर पत्र भेज दिया था और डाकिये को यह पत्र उनके घर तक पहुंचाने में कोई परेशानी नहीं हुई थी।

यह खुलासा मशहूर क्रिकेट इतिहासकार और लेखक सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी ने अपनी नयी किताब ‘बाईस गज की दुनिया’ में किया है, जो राजकमल प्रकाशन ने प्रकाशित की है। किताब में ‘मिनी बाम्बे’ इंदौर की समृद्ध क्रिकेट विरासत और उससे जुड़े क्रिकेटरों का विस्तार से जिक्र किया गया है।

मुश्ताक अली के साथ लंबा समय बिताने वाले चतुर्वेदी ने उनसे जुड़ी कई घटनाओं का जिक्र किया है। उन्होंने एक जगह पर लिखा है, ‘जब प्रो. देवधर 75 साल के हुए तो मुश्ताक साहब ने उन्हें बधाई पत्र भेजा। देवधर साहब ने कई साल बाद आभार व्यक्त करते हुए पत्र लिखा। लेकिन उन्हें मुश्ताक साहब का पुराना पत्र नहीं मिला। इसलिए उन्होंने पते के स्थान पर सिर्फ इतना लिखा, ‘सैयद मुश्ताक अली, टेस्ट क्रिकेटर, इंदौर’ और वह पत्र मुश्ताक साहब को मिल गया। ’

लाला अमरनाथ को 1936 के इंग्लैंड दौरे के बीच से बाहर करने का मुश्ताक अली को हमेशा मलाल रहा और इसलिए जब वह भी दिल्ली आते थे तो इस धाकड़ बल्लेबाज से जरूर मिलते। इन दोनों दिग्गजों के बीच मुलाकात पर एक बार लेखक ने लाला से वनडे क्रिकेट पर सवाल कर दिया था। लाला का जवाब था, ‘हम लोग वनडे क्रिकेट जैसा ही खेलते थे। अगर हमारे जमाने में वनडे क्रिकेट होता तो कर्नल नायडू व मुश्ताक अली पारी की शुरूआत करते और मैं तीसरे नंबर पर जाने के लिये तैयार होकर बैठा रहता। बाकी के खिलाड़ी बाजार में खरीद फरोख्त कर रहे होते।’
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