होम /न्यूज /खेल /CWG गोल्ड मेडलिस्ट अचिंता शेउली की मां ने बताया- अधफटी साड़ी में लपेटकर रखे हैं मेडल और ट्रॉफी

CWG गोल्ड मेडलिस्ट अचिंता शेउली की मां ने बताया- अधफटी साड़ी में लपेटकर रखे हैं मेडल और ट्रॉफी

भारतीय वेटलिफ्टर अचिंता शेउली ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स-2022 में गोल्ड मेडल जीता है. (AP)

भारतीय वेटलिफ्टर अचिंता शेउली ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स-2022 में गोल्ड मेडल जीता है. (AP)

पश्चिम बंगाल के रहने वाले वेटलिफ्टर अचिंता शेउली ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स-2022 में गोल्ड मेडल जीता. अचिंता की मां पू ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

वेटलिफ्टर अचिंता शेउली ने कॉमनवेल्थ गेम्स-2022 में जीता गोल्ड मेडल
20 साल के अचिंता ने 73 किग्रा वर्ग में कुल 313 किलो वजन उठाया था
अचिंता ने अपनी उपलब्धि के लिए मां और कोच अस्तम दास को श्रेय दिया

कोलकाता. बर्मिंघम के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय वेटलिफ्टर अंचिता शेउली की मां ने उनकी ट्रॉफियां और पदकों को अपनी अधफटी साड़ी में लपटेकर रखा है. शेउली का घर कोलकाता से 20 किमी दूर हावड़ा जिले के देयुलपुर में है. उनकी मां ने बताया कि 2 कमरों के घर में मौजूद एकमात्र बेड के नीचे एक साड़ी में लपेटकर अचिंता की ट्रॉफी और पदक रखे हुए हैं.

जब यह वेटलिफ्टर कॉमनवेल्थ गेम्स से 73 किग्रा वजन वर्ग का गोल्ड मेडल लेकर सोमवार सुबह घर लौटा तो उनकी मां पूर्णिमा ने एक छोटे से स्टूल पर इन ट्रॉफी और पदक को रखा हुआ था. उनकी मां ने अपने छोटे बेटे से अचिंता के अब तक जीते गए पदक और ट्रॉफियों को रखने के लिए एक अलमारी खरीदने के लिए कहा है.

इसे भी देखें, CWG 2022: वेटलिफ्टिंग टीम ने 10 मेडल के साथ दिखाया दम, रहा नंबर 1

पूर्णिमा शेउली ने कहा, ‘मैं जानती थी कि जब अचिंता आएगा तो पत्रकार और फोटोग्राफर हमारे घर आ रहे होंगे. इसलिए मैंने ये मेडल-ट्रॉफी एक स्टूल पर सजा दिए ताकि वे समझ सकें कि मेरा बेटा कितना प्रतिभाशाली है. मैंने सपने में भी कभी नहीं सोचा था कि वह देश के लिए गोल्ड मेडल जीतेगा.’

उन्होंने अपने पति जगत शेउली के 2013 में निधन के बाद अपने बेटों-आलोक और अचिंता- का पालन पोषण करने के लिए कितनी ही मुश्किलों का सामना किया है. उन्होंने कहा, ‘आज, मेरा मानना कि भगवान ने हम पर अपनी कृपा करना शुरू कर दिया है. हमारे घर के बाहर जितने लोग इकट्ठा हुए हैं, उससे दिखता है कि समय बदल गया है. किसी को भी अहसास नहीं होगा कि मेरे लिए दोनों बेटों को पालना कितना मुश्किल था.’

उन्होंने कहा, ‘मैंने उन्हें रोज खाना भी मुहैया नहीं करा पाती थी. ऐसे भी दिन थे जिसमें वे बिना खाये सो गए थे. नहीं पता कि मैं खुद को बयां कैसे करूं और क्या कहूं.’ अचिंता का भाई भी वेटलिफ्टिंग करता है. उनकी मां ने कहा कि उनके बेटों को साड़ियों पर जरी का काम करने के अलावा सामान चढ़ाना और उतारने का का भी करना पड़ता था.

दोनों भाइयों ने इतनी मुश्किलों के बावजूद भारोत्तोलन जारी रखा. उनकी मां ने कहा, ‘मेरे पास अपने बेटों को काम पर भेजने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. वर्ना हमारे लिए जिंदा रहना ही मुश्किल हो गया होता.’ 20 साल के अचिंता ने अपनी उपलब्धि के लिए मां और कोच अस्तम दास को श्रेय दिया था.

इसे भी देखें, कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक मेडल जीतने के बाद भारतीय खिलाड़ी के आंखों से क्यों बहने लगे आंसू? VIDEO वायरल

उन्होंने दिल्ली से कहा, ‘अच्छा काम करके घर लौटना अच्छा महसूस हो रहा है. मैंने जो भी हासिल किया है, वो मेरी मां और मेरे कोच अस्तम दास की वजह से ही है. दोनों ने मेरी जिंदगी में अहम भूमिका निभाई है और मैं आज जो कुछ भी हूं, इन दोनों की वजह से ही हूं.’ यह भारोत्तोलक दिल्ली में एक बैठक में हिस्सा लेने को बुधवार तड़के ही रवाना हो गया.

उन्होंने कहा, ‘जिंदगी मेरे और मेरे परिवार के लिए कभी भी आसान नहीं रही. पिता के निधन के बाद हमें ‘एक जून की रोटी’ के लिए कमाई करनी पड़ी. अब हम दोनों भाइयों ने कमाना शुरू किया है लेकिन हमारी आर्थिक समस्या को सुलझाने के लिए इतना ही काफी नहीं है. अगर सरकार हमारी समस्या देखे और हमारी मदद करे तभी इसमें सुधार हो सकता है.’

उनके कोच अस्मत दास से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने पूरा श्रेय अचिंता को दिया. उन्होंने कहा, ‘वह मेरे बेटे जैसा है. वह अन्य से अलग है. मैंने उसे आसानी से हार मानते हुए नहीं देखा जिससे उसे इतनी मुश्किलों के बावजूद अपना लक्ष्य हासिल करने में मदद मिली.’

Tags: Commonwealth Games, Cwg, Indian weightlifter, Sports news, Weightlifting

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें