यूरोपियन सुपर लीग ने दुनिया को चौंकाया, क्या ये फुटबॉल का अंत है...

European Super League ने चैंपियंस लीग और अन्य देशों की लीगों का आस्तित्व खतरे में डाल दिया है. (AP)

European Super League ने चैंपियंस लीग और अन्य देशों की लीगों का आस्तित्व खतरे में डाल दिया है. (AP)

European Super League: यूरोप के दिग्गज फुटबॉल क्लब अगस्त से यूरोपियन सुपर लीग शुरू करना चाहते हैं. इस निर्णय के बाद से सभी क्लब की आलोचना हो रही थी. अब इसका असर भी होता दिख रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 21, 2021, 7:43 PM IST
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नई दिल्ली. पिछले दिनों फुटबॉल की दुनिया से एक ऐसी खबर आई जिसने फैंस को ये कहने पर मजबूर कर दिया कि ‘ये फुटबॉल का अंत है’. खबर यह है कि यूरोप में नई फुटबॉल लीग (European Super League) शुरू होने जा रही है. इस लीग ने वर्तमान में चल रहीं यूएफा चैंपियंस लीग और अन्य देशों की लीगों का आस्तित्व खतरे में डाल दिया है. दांव पर हैं लियोनल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे खिलाड़ी, रियल मैड्रिड और बार्सिलोना जैसे बड़े क्लब. लेकिन लीग को शुरू होने के पहले ही झटका लग चुका है. 12 में से 9 टीमों ने नाम वापस ले लिया है. जानते हैं इसकी पूरी कहानी...

इस लीग का मतलब

यूरोप के 12 दिग्गज फुटबॉल क्लब ने यह घोषणा कि वे एक नई लीग की शुरुआत करने जा रहे हैं. इनमें बार्सिलोना, मैनचेस्टर यूनाइटेड और रियल मैड्रिड जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं. आधिकारिक घोषणा में ये कहा गया है कि यह नई लीग जल्द ही शुरू होने वाली है. इस लीग के अध्यक्ष यानि चेयरमैन होंगे, रियल मैड्रिड टीम के वर्तमान अध्यक्ष फ्लोरेंटीनो पेरेज. पेरेज को यूरोप के फुटबॉल जगत का एक बड़ा नाम माना जाता है.

यूएफा और फीफा आखिर करते क्या हैं?
हर महाद्वीप की अपनी फुटबॉल संचालन समिति होती है. जैसे एशिया की एशियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (AFC ) और UEFA यानि यूनियन ऑफ फुटबॉल एसोसिएशन. इन सभी समितियों का काम होता है अपने महाद्वीप में प्रतियोगिताओं का आयोजन और संचालन कराना. अब इन सारी समितियों के ऊपर आता है फीफा. फीफा फुटबॉल की वर्ल्ड संस्था है. अब यूएफा के बारे में ये समझना जरूरी है कि ये सबसे ज्यादा लोकप्रिय और पैसा बनाने वाली फुटबॉल से जुड़ी संस्था है. ऐसा इसलिए है क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी टीम और सबसे बेहतरीन खिलाड़ी यूरोप में ही खेलते हैं. यूएफा के अंदर अन्य यूरोप के देशों की लीग भी आती हैं. जैसे स्पेन की ला लिगा, इंग्लैंड की प्रीमियर लीग, इटली की सीरी ए. इन लीग की शीर्ष की तीन टीमें यूएफा चैंपियंस लीग में खेलती हैं. ये लीग बेहद लोकप्रिय है. 2018-2019 वाले सीजन में इसने लगभग 3 बिलियन डॉलर कमाए थे.

सुपर लीग का फॉर्मेट

आधिकारिक बतान में बताया गया है की नई लीग में 20 क्लब भाग ले सकते हैं, जिनमें से 15 ‘फाउंडिंग मेंबर्स’ होंगे और बाकी के 5 क्लब को पिछले सीजन के प्रदर्शन के अनुसार क्वालिफाई करने का मौका दिया जाएगा. लीग के मैच ‘मिड-वीक’ में होंगे, ताकि बाकी लीग और चैंपियनशिप गेम्स वीकेंड में हो सके. इस लीग में अलग-अलग ग्रुप बनाए जाएंगे और इन ग्रुप में जिन टीमों का प्रदर्शन सबसे बढ़िया होगा, वह टीम क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालिफाई करेगी. सुनने में इन सब चीज़ों में कुछ बुरा नहीं लगता, लेकिन अगर थोड़ा ध्यान से देखा जाए तो इसमें कई दिक्कतें दिखाई देती हैं.



- इस  लीग  के कारण क्लब फुटबॉल की नींव हिल जाएगी. लड़ाई सिर्फ चंद टीमों के बीच ही रह जाएगी.

- टीवी राइट्स, स्पॉन्सरशिप, मर्चेंडाइज सेल्स, फैंस का प्रभाव. ये सब तीन प्रतियोगिताओं में बंट जाएगा.

- ऐसे में छोटी टीमों को उभरने का मौका ही नहीं मिलेगा.

आखिर ये सब हो क्यों रहा है?

पिछले कुछ सालों से खिलाड़ियों की ट्रांसफर फीस और वेतन से लेकर स्टेडियमस और स्पोर्ट्स फैसिलिटीज बनाने जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड के लिए जरूरी था की इन क्लब की आमदनी तेजी से बढ़ती रहे. लेकिन कोविड-19 के आते ही सब कुछ बंद हो गया. मार्च 2020 से ही एक तरह से स्टेडियम में फैंस का आना बंद हो गया. इससे टिकट से मिलने वाला पैसा भी बंद हो गया और ग्लोबल आर्थिक मंदी के कारण लोग भी फुटबॉल पर कम पैसा खर्च करने लगे. अन्य आमदनी के स्रोत भी बंद हो गए, इससे फुटबॉल क्लब का कर्ज भी बढ़ता चला गया.

जेपी मॉर्गन ने सभी क्लब को 400 मिलियन डॉलर देने की बात कही

जेपी मॉर्गन दुनिया की बड़ी कंपनियों में से एक है और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग का काम करती है. सीधे शब्दों में कहा जाए तो ये सुपर लीग का पूरा मामला इसी कंपनी का फैलाया हुआ है. जेपी मॉर्गन हर उस क्लब को 400 मिलियन डॉलर दे रहा, जो इस सुपर लीग का हिस्सा बन रहे हैं. कुल मिलाकर कंपनी सुपर लीग में 6 बिलियन डॉलर खर्च कर है. इस पैसे से इन क्लब का काफी कर्जा चुकाया जा सकता है. लेकिन सोशल मीडिया पर फैन्स ने क्लब की काफी आलोचना की. इसने क्लबों पर दबाव बढ़ा दिया.

खिलाड़ियों के वर्ल्ड कप खेलने पर रोक लग सकती है

इस खबर के आते ही यूएफा और फीफा को झटका लगा. उन्होंने तुरंत ही यह बात कह डाली कि जो भी क्लब और खिलाड़ी इस लीग में हिस्सा लेंगे, उन्हें यूएफा और फीफा के किसी भी टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से बैन कर दिया जाएगा. यानि की अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2022 के फीफा वर्ल्ड कप में मेसी, रोनाल्डो समेत कई खिलाड़ी भाग नहीं ले पाएंगे. सुपर लीग के अध्यक्ष फ्लोरेंटिनो पेरेज ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर सुपर लीग के खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप में भाग लेने से रोका गया तो वह एक दूसरे वर्ल्ड कप की शुरुआत बिना किसी झिझक के कर देंगे. इस पूरी घटना पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि उनकी सरकार यूरोपियन सुपर लीग का गठन होने नहीं देगी. फिलहाल, चैंपियंस लीग को स्थगित कर दिया गया है और टूर्नामेंट के कैंसिल होने की भी संभावना है.

बार्सिलोना और रियल मैड्रिड ने अब तक निर्णय नहीं लिया

पिछले कुछ घंटों में खबर ये भी आ गई है की इन 12 में से इंग्लैंड के 6 क्लब लीग से हट गए हैं. यह सब इंग्लेंड के फुटबॉल फैंस की वजह से हुआ या है. इसके अलावा एसी मिलान, इंटर मिलान और एटलेटिको मैड्रिड भी हट गए हैं. अब सिर्फ बार्सिलोना, रियल मैड्रिड औ युवेंतस ही बचे हैं. ऐसे में लीग का आयोजन होना असंभव दिखता है.

(लेखक फ्रीलांस राइटर हैं. रामजस कॉलेज दिल्ली में राजनीति शास्त्र के छात्र हैं. अंतरराष्ट्रीय विषयों, फुटबॉल, संगीत और सिनेमा में खास रुचि है.) 
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