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EXCLUSIVE: हिमा दास के साथ न्यूज़18 की खास बातचीत 

विमल कुमार@Vimalwa | News18Hindi
Updated: January 7, 2019, 12:31 PM IST

तेज रफ्तार के लिए फेमस हिमा दास यूनिसेफ की यूथ एंबेसडर हैं

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  • Last Updated: January 7, 2019, 12:31 PM IST
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फिनलैंड में जब हिमा दास ने गोल्ड मेडल जीता तो पूरे देश में वह सनसनी की तरह फैल गईं. हर कोई जान गया कि आखिर हिमा दास कौन हैं. हिमा असम के एक गांव से आती हैं. अपनी तेज रफ्तार के लिए लोकप्रिय हिमा की जिंदगी पिछले चार महीनों में पूरी तरह से बदल गई है. अब वह यूनिसेफ की यूथ एंबेसडर हैं. हिमा दास से न्यूज़18 के स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार ने एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बातचीत की.

न्यूज18: पिछले चार महीनों में आपकी जिंदगी में कितना बदलाव देखने को मिला है. क्या कभी इस बात पर यकीन होता है कि जितनी तेजी से आप भाग रही हैं उतनी तेजी से चीजें आपके साथ-साथ भाग रही हैं?

हिमा दास: सभी के आशीर्वाद के सहारे मैं यहां पहुंची हूं. मुझे नहीं लगता कि मेरी जिंदगी बदली है क्योंकि मेरे नजरिए से मैं हिमा ही हूं.

न्यूज18: जो लोग छोटे शहरों से आते हैं तो उनका आत्मविश्वास उतना नहीं रहता. लेकिन आपका आत्मविश्वास गजब का है. ऐसा लगता है कि आप इसी स्तर के लिए बनी हुई हैं. ये कहां से आया?

हिमा दास: ऐसा नहीं है, ट्रेक में तो अमूमन सभी खिलाड़ी नर्वस हो जाते हैं. मैं भी होती हूं लेकिन मुझमें ये चीज दिखाई नहीं देती.

न्यूज18: आपके इस मुकाम के पहुंचने के पहले आपके घरवालों ने गरीबी में जिंदगी गुजारी है. बहुत सारे लोग इस बात से प्रेरणा लेते हैं कि अगर हिमा इतनी मुश्किल के बाद आगे बढ़ सकती हैं तो हम भी बढ़ सकते हैं.

हिमा दास: घर में जमीन है तो खेती करनी ही पड़ेगी. हमारा संयुक्त परिवार है. मैंने देखा है कि हमारे घर में 17 लोग एक साथ खाते-पीते थे और वो चीज मुश्किल होती थी. आज तक तो लोगों को एक ही बच्चे को संभालने में दिक्कत होती है.न्यूज18: फिनलैंड में शानदार मेडल जीतने के बाद आपकी तरफ लोगों का रवैया कैसे बदला?

हिमा दास: फिनलैंड में वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद कुछ सोचने का समय ही नहीं मिला क्योंकि तीन महीने बाद एशियन गेम्स थे. इसलिए उसके लिए तैयारी के सिलसिले में बाहर रहना पड़ा. इसलिए मुझे कुछ भी बदलाव नहीं दिखाई दिया क्योंकि मैं ट्रेनिंग मे व्यस्त थी.

न्यूज18: बचपन से आप किसे आपना हीरो मानती थी, किसकी तरह बनना चाहती थी?

हिमा दास: सबको मालूम है सचिन तेंदुलकर को. उनकी जर्सी देखकर ही मैं प्रेरित हुई थी. जब सचिन से मुलाकात हुई तो बहुत अच्छा लगा. उन्होंने मुझे अपनी टी20 क्रिकेट की टी शर्ट भी तोहफे में दी है.

न्यूज18: आप इतनी धुन की पक्की थी. आपने कार के साथ रेस लगाई थी और उसको भी पीछे छोड़ दिया था. वो क्या कहानी है?

हिमा दास: बचपन में मेरे गांव के एक व्यक्ति की नई कार आई थी. मैं स्कूल जा रही थी तो उन्होंने मुझसे कहा कि चलो मैं तुम्हें छोड़ देता हूं लेकिन आधी दूरी पर जाने के बाद उन्होंने कहा कि अब उतरो और पैदल जाओ. ये बात मुझे अच्छी नहीं लगी और करीब 100 मीटर की रेस में मैं कार से आगे निकल गई थी.

न्यूज18: पीछा करने की, लड़ाई करने की, भागने की ये बात आपमें बचपन से ही हैं. ये जज्बा कैसे आया?

हिमा दास: ये मेरे परिवार से आया है. मेरे परिवार में सभी क्रिकेट और फुटबॉल खेलते है. मैं अपने भाई और पापा के साथ फुटबॉल खेलती थी और वहीं से ये जज्बा आया.

न्यूज18: लड़की होने के चलते क्या आपको किसी तरह की मुश्किल का सामना करना पड़ा है?

हिमा दास: नहीं मुझे किसी तरह की मुश्किल का सामना अब तक नहीं करना पड़ा है.

न्यूज18: भारत में ये स्पोर्ट्स पहले जितना पॉपुलर नहीं है. पीटी ऊषा के जमाने वाले लोग अब या है नहीं या उनकी उतनी दिलचस्पी नहीं है. लेकिन जो छोटी लड़कियां है आपकी तरह बनना चाहती हैं उनको लेकर आप क्या कहेंगी?

हिमा दास: उन्हें एक कदम आगे आकर आने की जरूरत है. उन्हें कंपटीशन में भाग लेने की जरूरत है. जैसे ही आप आगे बढ़ेंगे लोग सपोर्ट करेंगे.

न्यूज18: आपने अपनी क्षमता कैसे पहचानी?

हिमा दास: निपुन सर और अभिजीत सर मुझे गुवाहाटी लेकर आए थे और तबसे मेरी जिंदगी बदल गई लेकिन जिले तक मैं खुद आई.

न्यूज18: एशियन गेन्स में भी आपने कमाल दिखाया लेकिन हर किसी की निगाहें ओलंपिक पर हैं. उसको लेकर कैसी तैयारी है?

हिमा दास: बेस ट्रेनिंग बनानी है, खूब मेहनत करेंगे. एक हफ्ते के बाद हम टर्की जा रहे हैं ट्रेनिंग के लिए. मैं कोशिश करूंगी, बाकी देखा जाएगा.

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First published: December 31, 2018, 1:06 PM IST
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