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Exclusive: टोक्यो ओलंपिक में भी कमाल करना चाहते हैं जेरेमी लालरिनुंगा

विमल कुमार@Vimalwa | News18Hindi
Updated: January 7, 2019, 12:34 PM IST

जेरेमी लालरिनुंगा आजकल NIS पटियाला में अभ्यास कर रहे हैं. न्यूज18 के स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार ने जेरेमी से एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बातचीत की

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  • Last Updated: January 7, 2019, 12:34 PM IST
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16 साल के जेरेमी लालरिनुंगा एक शानदार वेटलिफ्टर हैं. उन्होंने पिछले महीनों के दौरान यूथ ओलंपिक गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर तहलका मचा दिया था. यह भारत का इस इवेंट में पहला गोल्ड मेडल था. इतनी छोटी उम्र में जिस तरह का प्रदर्शन उन्होंने किया है उसे लेकर उनसे ओलंपिक 2020 में मेडल की उम्मीदें बंध गई हैं. वह आजकल NIS पटियाला में अभ्यास कर रहे हैं. न्यूज18 के स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार ने जेरेमी से एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बातचीत की और उनके छोटे से करियर के उतार-चढ़ाव के बारे में विस्तार से चर्चा की.

न्यूज18: अर्जेंटीना में जब आपने यूथ ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता तब आपके गांव में आपका मैच लोग Youtube पर देख रहे थे. यूथ ओलंपिक के बाद पिछले कुछ महीनों में आपकी जिंदगी कैसे बदली?

जेरेमी: यूथ ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के बाद मेरा यकीन काफी बढ़ गया और लगा कि अब मैं सीनियर लेवल पर भी मेडल जीत सकता हूं. जब मैं यूथ ओलंपिक के लिए ब्यूनस आयर्स गया था तब मैंने मेडल के बारे में नहीं सोचा था. मैंने सोचा था कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दूं और यही बात मेरे कोच ने भी बोली थी. बेस्ट फरफॉर्मेंस से मैंने दो-तीन किलो कम ही उठाया लेकिन मैंने सोचा नहीं था कि गोल्ड जीत जाऊंगा.

न्यूज18: आपके पिताजी खुद बॉक्सर थे लेकिन वह अपने करियर को आगे नहीं ले जा सके तो आपकी खेल के क्षेत्र में यात्रा कैसे शुरू हुई?

जेरेमी: वेटलिफ्टिंग मैंने 2011 अक्टूबर से शुरू की थी. जब मेरे पापा ट्रेनिंग करते हैं तो उनके साथ मैं बॉक्सिंग ट्रेनिंग लंबे समय से करता आ रहा हूं. साल 2011 में हमारे गांव में वेटलिफ्टिंग एकेडमी खुली थी. मैंने सोचा कि ये ताकत वाला गेम है तो मुझे भी ट्राय करना चाहिए. वहां मैंने शुरुआती दौर में वेटलिफ्टिंग की कला सीखी और उसके बाद जनवरी 2012 में वेटलिफ्टिंग इंस्टिट्यूट पुणे में हमें ट्रेनिंग के लिए भेजा गया. जहां मैंने ट्रेनिंग की.

न्यूज18: आपके पिताजी बड़े लेवल पर नहीं खेल पाए तो कहीं न कहीं आपके लिए ये प्रेरणा रही कि उनका सपना पूरा करना हैं, इसको लेकर क्या कहेंगे?

जेरेमी: पापा ने भारत की ओर से खेलने की दो बार कोशिश की लेकिन वह कामयाब नहीं हुए. जब मैंने नेशनल खेलना शुरू किया तो मेरे पापा ने कहा कि बेटा मैं टीम इंडिया की जर्सी नहीं पहन पाया लेकिन मुझे यकीन है कि आप पहन सकते हैं. वैसे मैंने मेडल जीतकर अपने पापा का सपना साकार किया.न्यूज18: आप आगे क्या करना चाहते हैं, आपका लक्ष्य क्या है?

जेरेमी: मेरा मकसद है कि मैं सीनियर ओलंपिक में मेडल हासिल करूं. उसके लिए मैं पूरी कोशिश और ट्रेनिंग करूंगा. कोच, फिजियो हमारे साथ हैं. हम जमकर ट्रेनिंग करेंगे बाकि भगवान के हाथ में है.

न्यूज18: वेटलिफ्टिंग या उससे बाहर आपके हीरो कौन हैं?

जेरेमी: मैं फुटबॉल पसंद करता हूं. रोनाल्डो मेरे पसंदीदा खिलाड़ी हैं. वह इतना पैसा होने के बावजूद अच्छा खेल रहे हैं और ये बात मुझे प्रेरित करती है.

न्यूज18: आप अभी सिर्फ 15 साल के हैं, इस उम्र में लोग आपसे बहुत उम्मीद करने लगे हैं, क्या इसका प्रेशर महसूस होता है आपको?

जेरेमी: मेरे ऊपर कोई प्रेशर नहीं है. मुझे अपना काम पता है कि मुझे ट्रेनिंग करना है बस.

न्यूज18: भारत में वेटलिफ्टिंग में किसी ने गोल्ड नहीं जीता है, चूंकि आपसे उम्मीदें ज्यादा है तो आप इसे कैसे देखते हैं?

जेरेमी: मैं यूथ ओलंपिक और वेटलिफ्टिंग में पहला गोल्ड मेडलिस्ट भी हूं. साथ में मुझे अच्छा सपोर्ट भी मिल रहा है. अगर ऐसा ही सपोर्ट मिलता रहा तो मैं जरूर अच्छा करूंगा.

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First published: December 31, 2018, 1:16 PM IST
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