8 साल की उम्र में बना फुटबॉलर, फीफा वर्ल्ड कप क्वालीफायर में सुनील छेत्री के बिना ही रचा इतिहास

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Updated: September 11, 2019, 4:00 PM IST
8 साल की उम्र में बना फुटबॉलर, फीफा वर्ल्ड कप क्वालीफायर में सुनील छेत्री के बिना ही रचा इतिहास
सुनील छेत्री की गैर मौजूदगी में गुरप्रीत सिंह संधू ने टीम की कमान संभाली

एशियन चैंपियन कतर के अटैक के सामने गुरप्रीत सिंह संधू (Gurpreet Singh Sandhu ) भारत के लिए दीवार बन गए, जिससे इस साल चौथी बार कतर किसी टीम खिलाफ स्कोर करने में असफल रही

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  • Last Updated: September 11, 2019, 4:00 PM IST
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दोहा. फीफा वर्ल्ड कप क्वालीफायर (FIFA World Cup Qualifiers) में कतर जैसी मजबूत टीम को भारत पर एक भी गोल न करने का मौका देने वाले गोलकीपर गुरप्रीत सिंह‌ संधू (Gurpreet Singh Sandhu) ने अपने नाम एक और कारनामा दर्ज कर लिया. पंजाब में तीन फरवरी 1992 को जन्मे संधू यूरोपियन क्लब से मैच खेलने वाले पहले भारतीय हैं. यही नहीं वे मोहम्मद सलीम, बाइचुंग भूटिया, सुनील छेत्री (Sunil Chhetri) और सुब्रत पाल के बाद यूरोप में पेशेवर फुटबॉल खेलने वाले पांचवें भारतीय भी है. संधू पहले ऐसे भारतीय हैं, जो यूईएफए यूराेप लीग में खेले.

संधू का नाम आज हर किसी की जुबां पर है, क्योंकि उन्होंने एक बार फिर टीम इंडिया (Indian Football) के लिए यादगार प्रदर्शन किया. वर्ल्ड कप क्वालीफायर में 103वें नंबर की भारतीय टीम के सामने जब दुनिया की 62वें नंबर की टीम और एशियन चैंपियन कतर उतरी तो हर किसी को लग रहा था कि कतर मुकाबला एक तरफा जीत लेगी. मुकाबले में कतर आक्रामक लग भी रही थी और उन्हाेंने कई अटैक भी किए, लेकिन 6 फीट 6 इंच लंबे संधू (Gurpreet Singh Sandhu) भारतीय टीम की दीवार बन गए, ‌जिसे कतर की टीम भेद नहीं पाई. पूरे मुकाबले में कतर के अटैक को संधू ने नाकाम किया और भारत ने सभी की उम्मीदों के विपरीत कतर के साथ ड्रॉ खेला. दोनों ही टीम कोई गोल नहीं कर पाई. भारत  एकमात्र एशियन टीम बन गई, जिसे इस साल कतर हरा नहीं पाई. वहीं कतर की टीम चौथी बार किसी टीम के खिलाफ इस साल स्कोर करने में असफल रही.

एकेडमी से निकलकर फिर नहीं देखा पीछे
आठ साल की उम्र में संधू (Gurpreet Singh Sandhu) ने फुटबॉल को चुना और सन 2000 में सेंट स्टीफंस एकेडमी को जॉइन किया. एकेडमी में संधू ने शानदार प्रदर्शन किया और स्टेट यूथ टीम पंजाब अंडर-16 में उन्हें चुन लिया गया. यहीं से भारत के स्टार गोलकीपर का सफर शुरू हुआ.

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गुरप्रीत सिंह 2009 तक स्टीफंस एकेडमी के साथ रहे


इसके बाद गुरप्रीत ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. गुरप्रीत 2009 तक स्टीफंस एकेडमी के साथ रहे. इसके बाद वह ईस्ट बंगाल से जुड़ गए. 2010 में गुरप्रीत (Gurpreet Singh Sandhu) ने ईस्ट बंगाल के साथ आधिकारिक अनुबंध साइन किया.

अचानक आया टीम इंडिया से बुलावा
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गुरप्रीत (Gurpreet Singh Sandhu) ने 2010 में एएफसी अंडर-19 चैंपियनशिप क्वालीफिकेशन में इराक के खिलाफ इंडिया अंडर-19 की ओर से डेब्यू किया. इसके अगले ही साल यानी 2011 में एशियन कप के लिए अचानक ही सीनियर टीम से उनका बुलावा आ गया. तुर्कमेनिस्तान के खिलाफ संधू ने डेब्यू किया. यह मुकाबला 1-1 से ड्रॉ रहा था. इसके बाद संधू रुके नहीं और देखते ही देखते वे टीम इंडिया का चेहरा बन गए.
कतर के खिलाफ सुनील छेत्री  (Sunil Chhetri) की जगह कप्तानी करने वाले गुरप्रीत सिंह (Gurpreet Singh Sandhu) ने कहा कि उन्हें अपनी टीम पर गर्व है. इस मुकाबले से टीम का आत्मविश्वास बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि फुटबॉल में कुछ भी संभव है.

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First published: September 11, 2019, 3:00 PM IST
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