मुश्किल से जूझ रहे हैं भारत में फंसे फुटबॉलर्स, लौटना चाहते हैं अपने घर

मुश्किल से जूझ रहे हैं भारत में फंसे फुटबॉलर्स, लौटना चाहते हैं अपने घर
भारत में फंसे हैं कई विदेशी खिलाड़ी

भारत (India) में लगे लॉकडाउन के कारण कई विदेशी खिलाड़ी अपने घर नहीं जा पाए हैं

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण कई विदेशी खिलाड़ी भारत में फंसे हुए हैं खासतौर पर वह फुटबॉलर जो यहां क्लाबों में ट्रायल के लिए आए थे. ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं घाना के रहने वाले रिचर्ड हडसन जो लंबे समय से दीमापुर (Dimapur) में फंसे हुए हैं. यह खिलाड़ी इस साल की शुरुआत में नागालैंड की रायजिंग स्टार अकेडमी में बतौर खिलाड़ी और कोच जुड़े थे. उनका छह महीना का कॉन्ट्रैक्ट था लेकिन वह फंस गए.

खिलाड़ियों ने राष्ट्रपति से मांगी मदद
रिचर्ड ऐसे अकेले खिलाड़ी नहीं है जो अकेले इस स्थिति में है. उनके जैसे कुल 30 खिलाड़ी भारत में अलग-अलग जगह फंसे हुए हैं. रिचर्ड ने घाना के राष्ट्रपति अकुफो अड्डो को ट्वीट करते हुए मदद मांगी है. उन्होंने लिखा, 'प्रेसीडेंट हम भारत में फंसे हुए खिलाड़ी हैं. हम यहां ट्रायल के लिए आए थे. हम चाहते हैं कि आप हमारी मदद करें. हम अपना किराया बी नहीं दे पा रहे हैं और कोविड के कारण खाने का इंतजाम करने में मुश्किल हो रही है. हमे घर वापस लाने के लिए कुछ करें.'

फ्लाइट के खर्च के लिए भी नहीं है पैसे
ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं फॉरसन कोरो ओबेंग ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया कि उन्हें कोलकाता में रहने में कितनी मुश्किल हो रही है. उन्होंने कहा, 'हम तीन लोग एक कमरे में कोलकाता में रहते हैं. घर से हम जो थोड़ा बहुत पैसा लाए थे वह खत्म हो चुका है. अब हम साढ़े नौ हजार का किराया भी नहीं दे पा रहे हैं साथ ही हमें खाना का भी इंतजाम करना होता है . हमें नहीं पता अब हम क्या करे. ' इन खिलाड़ियों ने किसी तरह घाना की फ्लाइट के बारे में पता किया लेकिन फ्लाइट के लिए 1200 रुपए खर्च करना उनके बस की बात नहीं है.



73 दिन पार्क में रहे थे मुलर
ऐसे ही खिलाड़ी थे घाना (Ghana) के 24 साल के फुटबॉलर रैंडी जुआन मुलर (Randy Juan Muller) जो 73 दिनों तक पार्क में अपना ठिकाना बनाकर रह रहे थे जिसके बाद आखिरकार सरकार उनकी मदद के लिए आगे आई थी. पहले महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे (Aditya Thackrey) और घाना एंबसी की मदद से उन्हें सनबर्न होटल में पहुंचा दिया गया है और उनसे वादा किया गया है कि वह घर लौट गए थे.
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