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बाइचुंग भूटिया: भारतीय फुटबॉल को मिला तोहफा जिसने दिलाई विश्व स्तर पर देश को पहचान

News18Hindi
Updated: May 22, 2020, 1:47 PM IST
बाइचुंग भूटिया: भारतीय फुटबॉल को मिला तोहफा जिसने दिलाई विश्व स्तर पर देश को पहचान
बाईचुंग भूटिया पूर्व भारतीय कप्तान हैं

बाइचुंग भूटिया (Baichung Bhutia) भारत के लिए 100 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले पहले खिलाड़ी थी

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नई दिल्ली.  भारत में फुटबॉल को लेकर यूं तो उस तरह का पागलपन नहीं है जैसा क्रिकेट को लेकर हैं लेकिन इस खेल के बारे में जरा भी जानकारी रखने वाला बाइचुंग भूटिया को न जाने ऐसा संभव नहीं है. भारतीय फुटबॉल के दिग्गज आई. एम. विजयन ने बाइचुंग भूटिया (Baichung Bhutia) को ‘भारतीय फुटबॉल के लिए भगवान का तोहफा' कहा था. वह असल मायनों में भारतीय फुटबॉल के लिए तोहफा थे जिन्होंने देश को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई.

17 साल की उम्र में किया था अपना नाम
उनके खेलने का उच्च स्तर तब पता लगा जब वह ‘सिक्किम गवर्नर कोल्ड कप टूर्नामेंट में 1991 में सिक्किम ब्लूज का सदस्य बने थे. तब वह मात्र 17 वर्ष के थे लेकिन पुरुषों की प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे थे. 1993 में अपनी स्‍कूली शिक्षा को छोड़ बाइचुंग कलकत्‍ता के ईस्‍ट बंगाल फुटबॉल क्‍लब में शामिल हो गए. 1999 में बाइचुंग ने व्‍यवसायिक फुटबॉल के लिए यूरोप का रूख किया. तकरीबन तीन साल विदेशी क्‍लबों के लिए खेलने के बाद भूटिया भारत लौट आए. बाइचुंग ने बंगाल की दोनों टीमें मोहन बगान और ईस्‍ट बंगाल के लिए मैच खेले हैं.

भारतीय फुटबॉल के कामयाब खिलाड़ियों में शामिल



भूटिया के नाम पर एक फुटबॉल स्टेडियम भी है. यह उनके भारतीय फुटबॉल में योगदान के लिए किया गया है. वह पहले ऐसे फुटबॉल खिलाड़ी हैं  जिन्होंने खेल में सक्रिय रहते हुए यह उपलब्धी हासिल की. उन्होंने बहुत से अवॉर्ड जीते हैं जिनमें अर्जुन अवार्ड और पद्मश्री शामिल हैं. भारतीय फुटबॉल में उनके महान योगदान के कारण उन्हें भारतीय फुटबॉल में टॉर्चबैरियर के रूप में जाना जाता था, और 22 अक्टूबर 2014 को एएफसी हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया, यह सम्मान हासिल करने वाले पहले भारतीय थे.



यह दूसरे भारतीय खिलाड़ी थे जिन्होंने विदेशी क्लब के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे, जब उन्होंने इंग्लिश क्लब बरी एफसी के साथ 3 साल के अनुबंध पर सहमति व्यक्त की थी. वह एक विदेशी क्लब के लिए प्रतिस्पर्धी खेल खेलने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने जब उन्होंने कार्डिफ़ सिटी के खिलाफ 3 अक्टूबर 1999 को अपनी शुरुआत की. अपने करियर में वह 2 और विदेशी क्लबों के लिए खेले.

खिलाड़ियों को प्रेरित करने के लिए खोला स्कूल
2011 के अगस्त में भूटिया ने अंतराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास ले लिया. उनका आखिरी मैच 10 जनवरी 2012 को भारतीय नेशनल टीम और बायरेन मुनिक के बीच दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हुआ था. 2010 में उन्होंने बाइचुंग भूटिया फुटबॉल स्कूल की स्थापना दिल्ली में की. इसमें उनकी पार्टनरशिप कार्लोस क्वीरोज और नाइकी के साथ है. दिल्ली के बाद सिक्किम में उन्होंने अपना खुद का फुटबॉल स्टेडियम बनाया जहां वह बच्चों को ट्रेन कर रहे हैं.

AIFF का बनना चाहते हैं भूटिया
बाइचुंग भूटिया ने कहा है कि वह भविष्य में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने पर विचार करेंगे. एक दशक से अधिक समय तक भारतीय फुटबॉल का चेहरा रहे भूटिया ने 2011 में संन्यास लिया था. भूटिया से फेसबुक पर सवाल पूछा गया था कि क्या वह भविष्य में एआईएफएफ का अध्यक्ष बनना चाहेंगे तो उन्होंने कहा, ‘निश्चित रूप से इस पर भविष्य में विचार किया जा सकता है.'

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First published: May 22, 2020, 1:21 PM IST
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